सच्ची दीपावली 2025: अर्चना जैन, इंदौर की कलम से — हर हृदय में दीप जलाएँ
दीपावली, प्रकाश और उल्लास का पर्व, हर साल अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है। पर क्या हमने कभी सोचा है कि सच्ची दीपावली केवल दीयों से नहीं, बल्कि हृदय के उजियारे से होती है?
इंदौर की लेखिका अर्चना जैन अपनी रचना में इसी गहराई को उजागर करती हैं — “सच्ची दीपावली वही, जहाँ प्रकाश बाहर नहीं, भीतर जगमगाए।”
दीपावली का अर्थ केवल रोशनी नहीं, भावनाओं का उत्सव है
हर साल हम दीप सजाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और घरों को रंगोली से सजाते हैं। लेकिन अगर हमारे मन में अंधकार, क्रोध या स्वार्थ की छाया बनी रहे, तो क्या वह दीपावली सच्ची हो सकती है?
अर्चना जैन लिखती हैं –
“दीप जले तो केवल बाती न जले,
मन का तम मिटे, आत्मा की ज्योति जले।”
यानी दीपावली की असली ज्योति वही है जो भीतर के अंधकार को मिटा दे। घर सजे तो सुंदर लगता है, पर असली सजावट हृदय की होती है।
उन चेहरों की भी सोचें, जहाँ दीप नहीं जलता
कवि की संवेदनशीलता तब और बढ़ जाती है जब वे उन लोगों की बात करती हैं जिनके जीवन में इस दीपावली कोई उजाला नहीं।
“जिसके आँगन में चिराग बुझा है,
वह दीप कैसे जलाएगा बताओ?
जिसका पुत्र चला गया,
वह माँ दीप सजाएगी कैसे मुस्कुराएगी?”
यह पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके घरों में दीप नहीं जलते — किसी ने अपना प्रियजन खोया, कोई बीमारी या अकेलेपन से जूझ रहा है। सच्ची दीपावली तब होगी जब हम उनके जीवन में भी प्रेम और उम्मीद का प्रकाश जलाएँ।
बनो किसी के जीवन का उजियारा
अर्चना जैन का संदेश बहुत सशक्त है — “बनो किसी का दिया।”
किसी के घर का उजियारा बनो, किसी के मन का सहारा बनो।
जब कोई रोए तो उसके आँसुओं में दीप जलाना, जब कोई थके तो उसके मार्ग में आशा बिछाना — यही सच्ची दीपावली है।
यह संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक है, जब लोग भौतिक सुखों में उलझे हैं और आत्मिक शांति खो बैठे हैं।
मिट्टी का दिया और जीवन का संदेश
मिट्टी का छोटा-सा दीप हमें बहुत कुछ सिखाता है —
“जलकर ही प्रकाश बनना पड़ता है,
पिघलकर ही गगन छूना पड़ता है,
बुझकर भी दूसरों को रोशन करना पड़ता है।”
यानी हमें भी अपने भीतर की लौ को प्रेम, करुणा और आस्था से प्रज्वलित करना चाहिए।
दीपावली 2025 पर यह संकल्प लें कि हम वैर, तिरस्कार और स्वार्थ के अंधेरे को मिटाकर प्रेम और करुणा का उजियारा फैलाएँ।
सच्ची दीपावली का अर्थ – भीतर की रोशनी
अर्चना जैन की लेखनी हमें यही याद दिलाती है कि दीपावली केवल पटाखों और सजावट का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मा के प्रकाश का प्रतीक है।
“प्रेम की बाती में आस्था का तेल डालो,
करुणा की लौ में सत्य का खेल डालो।”
ऐसी दीपावली मनाओ कि कोई कोना अंधेरा न रह जाए, हर मन में दीप जले और हर जीवन में उजियारा छा जाए।
