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नेमीनाथ जैन मंदिर, कोसमा: आचार्य 108 विमल सागर जी की स्मृति में भजन-भक्ति का अद्भुत माहौल

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Published On: 17 October 2025
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कोसमा जैन मंदिर में आचार्य विमल सागर स्मृति महोत्सव की तैयारियाँ तेज़, भजन-भक्ति का अद्भुत माहौल

कोसमा (एटा, उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश के एटा जिले के छोटे से कस्बे कोसमा में जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक विशेष धार्मिक केंद्र है। यहां का प्राचीन नेमीनाथ जैन मंदिर और आचार्य 108 विमल सागर जी महाराज की स्मृति मंदिर स्थानीय लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन चुके हैं।

सुप्रसिद्ध भजन गायक स्व. रविंद्र जैन का भजन –
“कहा मिलेंगे हमें विमल पद कलम सर्व दुख हारा उन्हें मृत्यु के समाचार ने मारा” – आज भी लोगों के हृदय में गूंजता है और भक्त इसे श्रद्धा-भक्ति भाव से सुनते हैं।

कोसमा में लगभग 3,000 की आबादी रहती है, जिसमें मुख्य रूप से कुशवाहा और बघेल ओबीसी समाज के लोग शामिल हैं। आश्चर्य की बात यह है कि कस्बे में कोई जैन परिवार नहीं रहता, फिर भी यह स्थान जैन धर्म की श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बन चुका है।

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मंदिर परिसर और सुविधाएँ

  • नेमीनाथ जैन मंदिर में भगवान नेमीनाथ की मनोहारी प्रतिमा विराजमान है।

  • इसके समीप स्मारक स्वरूप आचार्य 108 विमल सागर जी महाराज की मूर्ति स्थापित है।

  • मंदिर परिसर में हनुमान जी, शिव-पार्वती और मां अम्बा की मूर्तियाँ भी हैं, जो सर्वधर्म समभाव का प्रतीक हैं।

  • प्रतिदिन स्थानीय लोग और महिलाएँ सायंकाल भजन और चालीसा का आयोजन करते हैं।

मंदिर के पास चार मंजिला धर्मशाला और सम्पूर्ण सुविधायुक्त चिकित्सालय भी है, जिसमें प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहाँ आधुनिक उपकरणों और 40 से अधिक दक्ष चिकित्सकों की टीम जटिल ऑपरेशन और उपचार में लगी रहती है।

आचार्य विमल सागर स्मृति महोत्सव और पंच कल्याणक

मंदिर का शिलान्यास आचार्य 108 चैत्य सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में श्री आर के जैन बॉम्बे द्वारा किया गया। नवंबर 2025 में यहां पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन प्रस्तावित है, जो जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

लेखक और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन “पार्श्वमणि” ने इस स्थल का निरीक्षण किया और कहा कि आचार्य विमल सागर जी महाराज के प्रति श्रद्धा देखते ही बनती है। उन्होंने सभी जैन समुदाय से आग्रह किया कि वे इस पुनीत कार्य में सहयोग करें और शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में भी समाज की भागीदारी बढ़ाएँ।

कोसमा के यह धार्मिक स्थल और जैन मंदिर न केवल भक्ति का केंद्र हैं, बल्कि शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।

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