अफगान तालिबान का दावा: डूरंड रेखा पर 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत, तनाव बढ़ा
नई दिल्ली / काबुल: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा पर शनिवार रात को हुई भीषण झड़पों में अफगान तालिबान ने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने बताया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा अफगान क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों का प्रतिशोध है। इस झड़प में लगभग 30 पाकिस्तानी सैनिक घायल हुए हैं।
तालिबान ने 25 पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर कब्जा करने का दावा भी किया है। हालांकि पाकिस्तान ने इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने जवाबी कार्रवाई में कई अफगान चौकियों को नष्ट करने की बात कही है।
डूरंड रेखा का ऐतिहासिक और सामरिक महत्व
डूरंड रेखा 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवादित मानी जाती है। यह रेखा ब्रिटिश भारत के समय 1893 में ब्रिटिश राज और अफगानिस्तान के बीच तय की गई थी। अफगानिस्तान ने इस सीमा को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, जिससे दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक तनाव और सुरक्षा खतरे हमेशा बने रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डूरंड रेखा सिर्फ भौगोलिक विभाजन नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील सीमा है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान पर आरोप है कि उसने अफगानिस्तान के काबुल और पूर्वी अफगानिस्तान के बाजारों पर हवाई हमले किए, जिनमें कई नागरिक भी मारे गए। तालिबान ने इन हमलों को अफगान क्षेत्र की संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए शनिवार रात को जवाबी कार्रवाई की।
तालिबान ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के हेलमंद प्रांत में दो सैन्य चौकियों पर कब्जा किया और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार डाला। पाकिस्तान ने जवाब में भारी तोपखाने और टैंकों का उपयोग कर अफगान चौकियों को निशाना बनाया।
तालिबान का आरोप: पाकिस्तान में ISIS का ठिकाना
तालिबान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में ISIS-K (इस्लामिक स्टेट खुरासान) के प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी जमीन पर छिपे ISIS आतंकवादियों को बाहर निकालना चाहिए।
पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकवादी पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं, जिन्हें अफगानिस्तान में शरण मिली हुई है।
सीमा पार तनाव और सुरक्षा उपाय
झड़प के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी मुख्य सीमा चौकियों टोरखम और चमन को बंद कर दिया। इसके अलावा, खारलाची, अंगूर अड्डा और गुलाम खान जैसी छोटी चौकियां भी बंद की गई हैं।
अफगानिस्तान की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। तालिबान ने अपने क्षेत्र की संप्रभुता की रक्षा का संकल्प जताया है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस घटना ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। सऊदी अरब, जिसने हाल ही में पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, ने दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष से क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा पर यह संघर्ष दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनाव का संकेत है।
यह घटना केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति को गंभीरता से लेकर संवाद और समझौते की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
