—Advertisement—

“टाटा समूह में गृहकलह 2025: नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के टाटा ट्रस्ट विवाद पर सरकार ने किया हस्तक्षेप”

Author Picture
Published On: 9 October 2025
08 10 2025 tata group feud 1 24074243

—Advertisement—

टाटा समूह में गृहकलह: नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच बढ़ता विवाद

मुख्य कीवर्ड: टाटा समूह कलह, टाटा ट्रस्ट विवाद, नोएल टाटा, एन. चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट्स आंतरिक झगड़ा, टाटा संस बोर्ड विवाद, सरकार हस्तक्षेप

नई दिल्ली / मुंबई: 150 वर्षों से अधिक की प्रतिष्ठा वाले टाटा समूह (Tata Group) के अंदर हाल ही में गहरा आंतरिक विवाद उभरकर सामने आया है। इस विवाद की जड़ें केवल कारोबारी रणनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह अब सीधे केंद्र सरकार की नजरों में भी आ गया है। टाटा ट्रस्ट्स के नए अध्यक्ष नोएल टाटा और Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच बढ़ते मतभेदों ने समूह की निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व संरचना को चुनौती दी है।


विवाद की जड़: ट्रस्ट और होल्डिंग कंपनी का जाल

टाटा समूह की मूल संरचना में Tata Trusts और Tata Sons का अहम रोल है।

  • Tata Trusts समूह की परोपकारी संस्था है, जिसमें कई ट्रस्ट सम्मिलित हैं। यह ट्रस्ट्स मिलकर Tata Sons की लगभग 66% हिस्सेदारी रखते हैं, जिससे ट्रस्ट्स के पास समूह की रणनीति और नियंत्रण पर निर्णायक अधिकार होता है।

  • Tata Sons समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसके अंतर्गत टाटा मोटर्स, टीसीएस, टाटा पावर जैसी प्रमुख कंपनियाँ आती हैं।

इसलिए, ट्रस्ट्स में चलने वाले आंतरिक मतभेद सीधे समूह के निर्णय-लेने की क्षमता और सार्वजनिक प्रतिष्ठा पर असर डालते हैं।

images 13


विवाद के मुख्य कारण

1. ट्रस्टी सदस्यों के बीच गुटबाजी

रतन टाटा के निधन (9 अक्टूबर 2024) के बाद, समूह नेतृत्व में नए युग की शुरुआत हुई। नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि एन. चंद्रशेखरन पहले से ही Tata Sons के चेयरमैन थे।

समय के साथ ट्रस्ट्स में दो मुख्य गुट उभरकर सामने आए:

  • नोएल टाटा गुट: इसमें Venu Srinivasan और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह जैसे सदस्य शामिल हैं।

  • विरोधी गुट (मेहली मिस्त्री गुट): इसमें मेहली मिस्त्री, प्रमित झावेरी, जहांगीर एच.सी., डेरियस खंबाटा जैसे ट्रस्ट सदस्य हैं।

नोएल टाटा गुट का मानना है कि उनके निर्णय पारंपरिक दृष्टिकोण से केंद्रीकृत हैं और समूह की गति बनाए रखने में मददगार हैं। वहीं, विरोधी गुट पारदर्शिता और ट्रस्ट प्रक्रिया में सुधार चाहता है।


2. बोर्ड सदस्य नियुक्तियाँ और वेटो अधिकार

Tata Sons बोर्ड में ट्रस्ट द्वारा नामित प्रतिनिधियों (nominee directors) का चयन भी विवाद का एक मुख्य कारण है। ट्रस्ट्स दोनों गुट अपने समर्थक प्रतिनिधियों को बोर्ड में लाना चाहते हैं, क्योंकि ये सदस्य समूह की रणनीति और निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।

विजय सिंह की पुनर्नियुक्ति पर मतभेद और विवाद इस विषय को और संवेदनशील बना गया। चार ट्रस्टी इसके विरोध में हैं, जबकि नोएल टाटा पक्ष इसे समर्थन देता है।


3. Tata International के लिए धनराशि प्रस्ताव

Tata International Ltd (TIL) के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ की पूँजी प्रविष्टि की योजना भी विवाद का केंद्र बनी। ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ, लेकिन कई ट्रस्टी मानते हैं कि इसे बिना पर्याप्त चर्चा और सभी सदस्यों की सहमति के पारित किया गया।

विरोधी गुट का कहना है कि यह प्रस्ताव Tata Sons के लेख 121A का उल्लंघन कर सकता है, जो बड़े वित्तीय फैसलों के लिए पूर्व स्वीकृति का प्रावधान देता है।


4. सूचना का भेद (Information Asymmetry)

कुछ ट्रस्टी दावा करते हैं कि उन्हें बोर्ड स्तर की जानकारी नहीं मिल रही, जबकि बोर्ड में बैठे ट्रस्टी कहते हैं कि संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की जा सकती। इससे भरोसा टूटने और संदेह बढ़ने की स्थिति उत्पन्न हुई है।


सरकार की दखल — क्यों और कैसे?

इस विवाद की गंभीरता तब बढ़ी जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व से बैठक कर स्पष्ट संदेश दिया कि आंतरिक मतभेद तुरंत सुलझाए जाएँ और समूह में स्थिरता बहाल की जाए।

सरकार की चिंता का मुख्य कारण यह है कि टाटा समूह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा स्तंभ है। यदि समूह में नेतृत्व संकट बढ़ा, तो परिसंपत्ति मूल्य, निवेशक विश्वास और पूरे उद्योग पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने साफ किया कि समूह में स्थिरता किसी भी तरह बहाल होनी चाहिए और Tata Sons के संचालन पर विवाद का असर नहीं पड़ना चाहिए।


वर्तमान स्थिति और संभावित परिणाम

स्थिति अभी भी संतुलन में

चूंकि विवाद सार्वजनिक स्तर पर उभरा है, दबाव बढ़ गया है कि कम से कम अवधि के लिए विवादित मुद्दों पर सुलह या मोराटोरियम हो।

  • ट्रस्ट्स की अगली बैठक 9–10 अक्टूबर को प्रस्तावित है, जिसमें विवादित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

  • नोएल टाटा, Venu Srinivasan, N. Chandrasekaran और Darius Khambata ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बैठक की।

संभावित खतरे

  1. निरंतरता खतरे में: अगर ट्रस्ट्स और Tata Sons के बीच गतिरोध बना रहा, तो निर्णय लेने में देरी होगी और समूह की गति रुक सकती है।

  2. ब्रांड वैल्यू को झटका: टाटा नाम पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। अगर विवाद बढ़ा, तो निवेशकों और जनता का विश्वास टूट सकता है।

  3. निवेशकों और शेयरधारकों की चिंता: समूह की कंपनियों के शेयरों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

  4. SP समूह की भूमिका: शापूर्जी पलोनजी (SP) समूह Tata Sons में लगभग 18.37% हिस्सेदारी रखता है। उनका रवैया विवाद को और जटिल बना सकता है।

  5. नियमों और प्रतिबंधों से टकराव: RBI के “उच्च स्तर के NBFC” के रूप में Tata Sons की लिस्टिंग बाध्यताओं पर सवाल उठ सकते हैं।


निष्कर्ष: कलह और समूह का भविष्य

टाटा समूह भारतीय उद्योग और समाज का अभिन्न हिस्सा है। नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच तालमेल केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं हैं, बल्कि समूह की परंपरा, मूल्य और भविष्य की दिशा से जुड़े हैं।

यदि ट्रस्ट्स और Tata Sons के बीच समंजन संभव हुआ, तो समूह पुनः एकीकृत स्थिति में आगे बढ़ सकता है। लेकिन यदि विवाद लंबी लड़ाई में बदल गया, तो इसका असर न केवल टाटा समूह पर बल्कि पूरे इंडस्ट्रियल परिदृश्य पर पड़ेगा।

टाटा समूह की स्थिरता और पारदर्शिता, भारतीय उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। अब यह देखना बाकी है कि ये दिग्गज नेता कैसे इस आंतरिक कलह को सुलझाते हैं और समूह की प्रतिष्ठा को बनाए रखते हैं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp