राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगंबर जैन महिला संगठन द्वारा भव्य गरबा महोत्सव — बहू से परनानी तक ने झूमकर मनाया उत्सव
इंदौर, 8 अक्टूबर 2025।
भक्ति, उल्लास और पारिवारिक सौहार्द से ओतप्रोत वातावरण में राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगंबर जैन महिला संगठन द्वारा इंदौर में भव्य गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि महिलाओं की ऊर्जा, एकता और रचनात्मकता का सशक्त प्रतीक बन गया।
संस्थान के संस्थापक संदीप शीतल पहाड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन संगठन की महिला शक्ति का अनूठा प्रदर्शन था। इसकी सबसे विशेष बात यह रही कि इसमें बहू से लेकर दादी, नानी, परदादी और परनानी तक ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। अनेक पीढ़ियों की महिलाओं का एक साथ गरबा नृत्य करना एक अद्भुत दृश्य था, जिसने यह संदेश दिया कि यह संगठन सिर्फ एक सामाजिक समूह नहीं, बल्कि एक सशक्त पारिवारिक परिवार है।
गरबा महोत्सव का वातावरण रंगों, रोशनी और संगीत की गूंज से जीवंत था। मंच पर पारंपरिक परिधान में सजी महिलाएं जब घूमती हुई झूम उठीं, तो पूरा पंडाल तालियों और हर्षोल्लास से भर गया। आयोजन की शोभा बढ़ाने वालीं श्रीमती विनोद जी अजमेरा, जो दादी-परनानी होते हुए भी अत्यंत जोश और उमंग के साथ गरबा नृत्य कर रही थीं, सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र रहीं। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित जनों का मन मोह लिया और यह साबित किया कि उम्र नहीं, उत्साह ही असली ऊर्जा है।
इस आयोजन को सफल बनाने में अनेक महिलाओं की सक्रिय भूमिका रही। संयोजक के रूप में महासचिव नमीता कासलीवाल, सचिव श्वेता काला, मोनिका अजमेरा, दीपाली बज, दीपाली सोगानी, दीपाली पाटनी, डाली झांझरी, हिमाली अजमेरा, उषा गंगवाल, दीपिका गंगवाल, मोनिका झांझरी, बबीता लुहाड़िया, खुशबू गोधा, ज्योति शरद गंगवाल, सोनल पहाड़िया और अनुराधा बिलाला जैसी सक्रिय कार्यकर्ताओं ने मिलकर आयोजन को यादगार बना दिया। इन सभी ने मिलकर मंगलाचरण, गरबा नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को गरिमामय स्वरूप प्रदान किया।
संगठन की अध्यक्ष ज्योति सेठी ने कहा कि यह आयोजन महिलाओं की एकजुटता और उनमें निहित असीम ऊर्जा को सामने लाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि हर महिला में एक कलाकार, एक संगठक और एक प्रेरक शक्ति छिपी होती है, और ऐसे आयोजन उस शक्ति को उजागर करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी संयोजकों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में परंपराओं को जीवित रखने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
महोत्सव को सफल बनाने में मार्गदर्शक कल्पना बाकलीवाल एवं प्रभारी शीतल पहाड़िया, अंतिम गंगवाल, रेखा बाकलीवाल और संगीता बड़जात्या का विशेष सहयोग रहा। इन सबके समन्वय और परिश्रम से आयोजन ने भव्य स्वरूप ग्रहण किया।
आयोजन का आकर्षण तब और बढ़ गया जब मंच पर महिलाओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट गरबा प्रस्तुति, आकर्षक परिधान, केश सज्जा, समूह नृत्य और पारंपरिक लुक जैसी श्रेणियों में पुरस्कार वितरित किए गए। यह सम्मान पाकर प्रतिभागियों का उत्साह और भी बढ़ गया और पंडाल में हर्षोल्लास का वातावरण छा गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रभारी शीतल पहाड़िया ने सभी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि महिलाओं का यह उत्साह संगठन की शक्ति, ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं साथ आती हैं, तो समाज में परिवर्तन, प्रेम और सकारात्मकता का वातावरण स्वतः निर्मित होता है।
भव्य गरबा महोत्सव के इस आयोजन ने यह साबित किया कि परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम तभी संभव है जब समाज की महिलाएं एकजुट होकर अपने उत्साह, कला और संस्कारों से वातावरण को आलोकित करें। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक पर्व था, बल्कि महिला शक्ति और सामाजिक एकता का उत्सव बनकर इंदौर की स्मृतियों में अंकित हो गया।

