उज्जैन: स्ट्रीट डॉग्स का आतंक — एक ही दिन में पाँच लोगों को काटा, एनिमल एक्टिविस्ट और पार्षद में तीखी बहस
उज्जैन।
शहर में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बावजूद इसके, नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही से यह समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। ऋषिनगर क्षेत्र में तो हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि एक ही दिन में पाँच लोगों को स्ट्रीट डॉग्स ने काट लिया — जिनमें चार बच्चे शामिल हैं।
स्थिति ने इतना विकराल रूप ले लिया कि कुत्ते को पकड़ने पहुंचे नगर निगम कर्मचारियों और एनिमल एक्टिविस्ट के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।
तीन हमले, पाँच पीड़ित — बच्चों में दहशत
पहला मामला मंगलवार देर रात का है। ऋषिनगर में भावसार नमकीन के पीछे रहने वाले 14 वर्षीय कनव कुमावत पर एक स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया।
कनव का बड़ा भाई आयुष कुमावत ने बताया कि वह गरबा देखकर घर लौट रहा था, तभी अचानक कुत्ते ने उस पर झपट्टा मारा और हाथ व पैर में पाँच जगह काट लिया। परिजन तुरंत उसे दशहरा मैदान स्थित निजी अस्पताल ले गए, जहाँ उसका इलाज हुआ। कनव फिलहाल कक्षा 7वीं का छात्र है।
दूसरा मामला भी बुधवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे का है। ऋषिनगर ईडब्ल्यूएस क्षेत्र में रहने वाले संजय श्रीवास का 12 वर्षीय बेटा चर्चित घर के बाहर खड़ा होकर गरबा देख रहा था, तभी चार स्ट्रीट डॉग्स ने मिलकर उस पर हमला कर दिया। राहगीरों की मदद से बच्चे को बचाया गया, लेकिन उसकी जांघ और पैर पर गहरे घाव आए। परिजनों ने बताया कि क्षेत्र में डॉग्स का आतंक इस कदर है कि बच्चे अब घरों से बाहर निकलने से डरते हैं।
सुबह युवक पर हमला, इलाज के लिए अस्पताल पहुँचा
तीसरा मामला बुधवार सुबह लगभग 7:45 से 8 बजे के बीच हुआ।
ऋषिनगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के पास रहने वाले दीपेश जॉन अपने छोटे भाई सेम के साथ महानंदानगर बैडमिंटन क्लब से घर लौट रहे थे।
गली में मुड़ते ही एक स्ट्रीट डॉग ने गुर्राना शुरू कर दिया और अचानक उन पर हमला कर दिया।
दीपेश ने बताया,
“कुत्ते ने भागते हुए मेरे पैर में काट लिया, जिससे खून निकल आया। मैं तुरंत पुष्पा मिशन अस्पताल गया और ट्रीटमेंट करवाया।”
पार्षद ने बुलाई नगर निगम की टीम, एक्टिविस्ट ने किया विरोध
पीड़ितों और स्थानीय रहवासियों ने घटना की शिकायत क्षेत्रीय पार्षद नवीता मालवीय से की।
शिकायत के बाद पार्षद पति विकास मालवीय मौके पर पहुँचे और नगर निगम आयुक्त को सूचना देकर डॉग कैचिंग टीम को बुलाया।
इसी दौरान, एनिमल एक्टिविस्ट डिंपल लुल्ला (निवासी मुनिनगर) भी मौके पर पहुँच गईं और उन्होंने कुत्ते को पकड़ने का विरोध किया।
उनके विरोध पर पार्षद पति से तीखी बहस हुई।
स्थानीय लोगों के अनुसार,
“डिंपल ने पार्षद पति के साथ बदतमीजी की और भोपाल की एक संस्था से फोन लगवाकर नगर निगम की टीम को डराने की कोशिश की।”
बाद में मोहल्ले के कुछ लोग डिंपल के घर पहुँचे और उनके पिता को पूरे मामले की जानकारी दी।
डिंपल के पिता ने स्पष्ट किया कि उन्हें कुत्ता पकड़ने से कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद नगर निगम की टीम ने कुत्ते को पकड़ लिया।
स्थानीयों का गुस्सा, बच्चे घरों में कैद
ऋषिनगर के रहवासी इस पूरी घटना के बाद काफी नाराज़ हैं। उन्होंने कहा कि लगातार डॉग बाइट की घटनाओं से मोहल्ले में दहशत का माहौल है।
बच्चों को अब स्कूल और खेल के मैदान तक भेजने में डर लगता है।
लोगों का कहना है कि नगर निगम की डॉग कंट्रोल नीति सिर्फ कागज़ों में है, जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
पार्षद पति का बयान
पार्षद पति विकास मालवीय ने बताया —
“एनिमल एक्टिविस्ट महिला दादागीरी कर रही थीं। उन्होंने अलग-अलग नंबरों से फोन लगवाकर डराने की कोशिश की।
इस पूरे मामले में हम माधवनगर थाने में आवेदन दे रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे हस्तक्षेप न हों।”

