यूनीसेफ़ रिपोर्ट: बच्चों में मोटापा अब कम वजन से ज़्यादा, Fast Food और अस्वास्थ्यकर भोजन मुख्य कारण। सरकारें अब सुधारात्मक कदम उठा रही हैं।
दुनिया भर में बच्चों का पोषण अब नई चुनौती बन गया है। यूनीसेफ़ की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि इतिहास में पहली बार स्कूली बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर, कम वजन वाले बच्चों से अधिक हो गई है।
मोटापा और स्वास्थ्य पर असर
5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 18.8 करोड़ बच्चे अब मोटापे से प्रभावित हैं। इससे टाइप-2 डायबटीज़, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कुछ कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक ने कहा, “अब हम केवल कम वजन वाले बच्चों की बात नहीं कर रहे। मोटापा बच्चों के विकास, संज्ञानात्मक क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।”
स्वास्थ्य के लिए अस्वास्थ्यकर आहार और Fast Food का प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीनी, नमक, अस्वास्थ्यकर वसा और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बच्चों के आहार पर हावी हैं। Fast Food और मीठे पेय के विज्ञापन बच्चों को अस्वस्थ विकल्पों की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
एक सर्वेक्षण में 75 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि उन्होंने Fast Food के विज्ञापन देखे और 60 प्रतिशत ने कहा कि इससे उन्हें यह उत्पाद खाने की प्रेरणा मिली।
वैश्विक आर्थिक प्रभाव
यूनीसेफ़ ने चेताया है कि 2035 तक मोटापे और अधिक वज़न से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की वैश्विक लागत सालाना 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। केवल पेरू में ही मोटापे से संबंधित नुकसान 210 बिलियन डॉलर के आसपास हो सकता है।
सरकारों की भूमिका और समाधान
कुछ देशों ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, मैक्सिको ने सरकारी स्कूलों में अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और मीठे पेय पर प्रतिबंध लगाया।
यूनीसेफ़ का कहना है कि सरकारों को अनिवार्य खाद्य लेबलिंग, अस्वस्थ उत्पादों पर टैक्स, स्कूलों में Junk Food पर प्रतिबंध और नीति निर्माण में उद्योग के हस्तक्षेप को रोकने जैसे कदम उठाने होंगे।
कैथरीन रसैल ने कहा, “हर बच्चे को उसके विकास और स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक और किफ़ायती भोजन मिलना चाहिए। इसके लिए लक्षित और प्रभावी नीतियाँ बनाना बेहद जरूरी है।”


