MP News: नल-जल योजना पर बड़ा आर्थिक बोझ, केंद्र ने ठुकराई मदद, अब पूरा खर्च उठाएगी मध्य प्रदेश सरकार
भोपाल।
मध्य प्रदेश की नल-जल योजनाओं (Nal Jal Yojana) पर अब राज्य सरकार का आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है। जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत चल रही 8,358 नल-जल योजनाओं की लागत पहले 6,213.76 करोड़ रुपये थी। लेकिन काम में देरी और महंगाई बढ़ने की वजह से अब लागत बढ़कर 9,026.97 करोड़ रुपये हो गई है। यानी करीब 2,813 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सरकार पर आ गया है।
सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि केंद्र सरकार ने बढ़ी हुई लागत का हिस्सा देने से साफ इनकार कर दिया है। केंद्र सिर्फ पुरानी स्वीकृत लागत (6213.76 करोड़) के आधार पर 50% राशि दे रहा है।
कैबिनेट मीटिंग में लिया गया बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि अब यह बढ़ा हुआ खर्च राज्य सरकार ही उठाएगी। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बारिश के बाद काम की रफ्तार और तेज की जाए, ताकि सात लाख से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को जल्द से जल्द शुद्ध पीने का पानी मिल सके।
क्यों ठुकराई केंद्र सरकार ने मदद?
दरअसल, नियमों के मुताबिक पुनरीक्षित अनुमान (Revised Estimate) 31 मार्च 2024 से पहले केंद्र को भेजना जरूरी था। लेकिन राज्य सरकार इसमें देरी कर गई। बाद में जब बढ़ा हुआ बजट भेजा गया तो केंद्र ने उसे मानने से मना कर दिया। अब राज्य सरकार फिर से केंद्र को प्रस्ताव भेजकर अतिरिक्त मदद मांगने की कोशिश करेगी। अगर केंद्र मान जाता है, तो एमपी सरकार को 2813 करोड़ रुपये की बड़ी राहत मिल सकती है।
अब तक कितने काम पूरे हुए?
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साल 2023 में MP में 27,990 एकल नल-जल योजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिन पर 20,765 करोड़ रुपये खर्च होना था।
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इसके अलावा 148 समूह नल-जल योजनाएं भी स्वीकृत हुई थीं, जिनकी लागत करीब 60,786 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
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अब तक 15,947 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 12,043 काम अभी जारी हैं।
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अनुमान है कि पूरी नल-जल परियोजनाओं पर कुल मिलाकर करीब 80,000 करोड़ रुपये तक खर्च होगा।
देरी से लगातार बढ़ रही लागत
राज्य सरकार का कहना है कि यदि समय पर काम पूरे नहीं हुए, तो आगे भी लागत और बढ़ती जाएगी। इसी वजह से अब काम में तेजी लाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
गड़बड़ी करने वालों पर गिर रही गाज
अब तक परियोजनाओं में गड़बड़ी और अनियमितताओं के मामलों में 139 अधिकारियों, कर्मचारियों और इंजीनियरों की पहचान हो चुकी है। कैबिनेट बैठक में इन मामलों पर चर्चा हुई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश सरकार के लिए नल-जल योजनाएं अब बड़ा आर्थिक बोझ बन चुकी हैं। केंद्र सरकार की मदद न मिलने से राज्य पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। हालांकि सरकार का दावा है कि सभी परियोजनाएं समय पर पूरी की जाएंगी और हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाएगा।

