कांतिलाल बम को बड़ा झटका: इंदौर कलेक्टर ने 1000 करोड़ से ज्यादा की होप/भंडारी मिल जमीन सरकारी घोषित की
Indore News | Kantilal Bam Land Dispute Update 2025
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए डॉ. अक्षय बम के पिता कांतिलाल बम को बड़ा झटका लगा है। इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने गुरुवार, 21 अगस्त 2025 को आदेश जारी कर भंडारी मिल (होप टेक्सटाइल मिल) की ज़मीन को सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया। इस जमीन की कीमत 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। आदेश के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जमीन पर कब्जा भी कर लिया।
कांतिलाल बम कैसे बने जमीन विवाद का हिस्सा?
इस जमीन विवाद की कहानी काफी पुरानी है। 2003 से पहले कांतिलाल बम का इस मिल से कोई नाता नहीं था। मिल के BIFR केस के दौरान उन्हें एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया गया और सभी अधिकार सौंप दिए गए। तभी से वे इस मिल और जमीन विवाद में औपचारिक रूप से सामने आए।
कलेक्टर तक मामला कैसे पहुंचा?
- साल 2012 में तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस जमीन को सरकारी घोषित किया था।
- इसके खिलाफ कांतिलाल बम ने 2012 में याचिका दायर की।
- अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले की विधिवत सुनवाई होनी चाहिए और इसे कलेक्टर कोर्ट को भेज दिया।
- इसके बाद वर्तमान कलेक्टर आशीष सिंह ने दो नोटिस जारी किए, जवाब लिया और 20 अगस्त 2025 को अपना आदेश पारित किया।
- 21 अगस्त को प्रशासन ने जमीन पर कब्जा कर लिया।
जांच में क्या पाया गया?
- कुल 22.24 एकड़ जमीन (Survey No. 282/2) की जांच की गई।
- नजूल विभाग की रिपोर्ट में सामने आया कि 8.24 एकड़ क्षेत्र में मिल मौजूद ही नहीं थी। यानी उद्योग की शर्तें पहले ही समाप्त हो चुकी थीं।
- 1982 में शासन ने सिर्फ 4.5 एकड़ भूमि पर वाणिज्यिक और आवासीय उपयोग की मंजूरी दी थी।
- इसके विपरीत 10.21 एकड़ जमीन को विकसित कर बेच दिया गया।
- करीब 12 एकड़ जमीन खाली पड़ी थी, जिसे बाउंड्रीवाल से घेरकर रखा गया था।
कलेक्टर का आदेश क्यों आया?
कलेक्टर कोर्ट ने माना कि:
- जमीन का उपयोग लीज की शर्तों का उल्लंघन करता है।
- विकास के नाम पर तय सीमा से ज्यादा जमीन व्यावसायिक रूप से बेची गई।
- इसलिए पूरी जमीन को शासकीय घोषित करना सही है।
हालांकि, कोर्ट परिसर की पार्किंग के लिए 4.93 एकड़ जमीन का उपयोग जारी रहेगा। बाकी जमीन प्रशासन के कब्जे में आ चुकी है।
बीजेपी से जोड़कर चर्चा क्यों?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जमीन सुरक्षित रखने के लिए ही कांतिलाल बम ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में प्रवेश किया। लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बावजूद इस विवादित जमीन पर से उनका कब्जा खत्म हो गया और प्रशासन ने जमीन अपने अधिकार में ले ली।
कांतिलाल बम के तर्क
कलेक्टर कोर्ट में बम ने दलील दी कि—
- यह जमीन 1939 में होलकर स्टेट से 99 साल की लीज पर मिली थी।
- 1982 में सरकार ने वाणिज्यिक उपयोग की मंजूरी दी थी।
- न्यू सियागंज परियोजना से प्राप्त 14.25 करोड़ की राशि से देनदारियां चुकाई गईं।
लेकिन, कलेक्टर कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए जमीन को सरकारी घोषित कर कब्जा ले लिया।
