सप्त दिवसीय निःशुल्क योग शिविर का शुभारंभ: परशुराम जयंती पर स्वास्थ्य और संस्कार का संदेश
Indore : भगवान श्री परशुराम जी की जयंती के पावन अवसर पर इंदौर में सर्वब्राह्मण महासभा, महिला मंडल एवं श्री जी अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में सप्त दिवसीय निःशुल्क योग शिविर का भव्य शुभारंभ किया गया। यह शिविर न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का माध्यम है, बल्कि समाज में योग, अनुशासन और संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।
यह योग शिविर प्रतिवर्ष परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित किया जाता है और इस वर्ष भी 13 अप्रैल 2026, सोमवार को प्रातः 6 बजे इसका शुभारंभ किया गया।
दीप प्रज्वलन और शुभारंभ समारोह
शिविर का शुभारंभ भगवान श्री परशुराम जी की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर योग प्रशिक्षिका सुश्री प्रीति काँठेड, डॉ. अनिल दुबे, श्रीमती वंदना दुबे, कृष्णचंद्र पुरोहित और डॉ. अग्निवेश पांडे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में स्वस्तिवाचन कवि सुंदरलाल जोशी द्वारा किया गया, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार हुआ।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में डॉ. जे.सी. चावड़ा, विजय व्यास और राजेश तिवारी भी उपस्थित रहे।
योग का उद्देश्य और समाज में महत्व
इस सात दिवसीय योग शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करना है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।
आयोजकों ने बताया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित बनाती है।
निःशुल्क प्रशिक्षण और भागीदारी
इस शिविर की विशेषता यह है कि इसमें सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क योग प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लोग इस शिविर में शामिल हो रहे हैं।
योग का प्रशिक्षण सुश्री प्रीति काँठेड और श्रीमती कीर्ति शर्मा द्वारा दिया जा रहा है। इनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया जा रहा है।
योग सत्र की गतिविधियाँ
शिविर में प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के योग अभ्यास कराए गए, जिनमें शामिल हैं—
सूक्ष्म व्यायाम
गायत्री मंत्र के सस्वर उच्चारण के साथ सैंडीलज, चालन क्रिया, गर्दन, कंधे, हाथ, कटि, जंघा और पैरों के सूक्ष्म व्यायाम कराए गए। इनका उद्देश्य शरीर को लचीला बनाना और रक्त संचार को बेहतर करना है।
खड़े होकर किए जाने वाले आसन
ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे योगासनों का अभ्यास कराया गया, जिनका महत्व शरीर की मुद्रा सुधारने और संतुलन बनाए रखने में बताया गया।
बैठकर किए जाने वाले आसन
वज्रासन, भद्रासन, मंडुकासन और शलभासन का अभ्यास कराया गया। इन आसनों से पाचन तंत्र मजबूत होता है और मानसिक शांति मिलती है।
पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसन
उत्तानपादासन, ऊर्ध्वकटि आसन, पादचक्र आसन, अर्धहलासन और पवनमुक्तासन का अभ्यास कराया गया। ये आसन रीढ़ की हड्डी और पेट संबंधी समस्याओं के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
पेट के बल किए जाने वाले आसन
भुजंगासन और मकरासन का अभ्यास कराया गया, जिससे शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ता है।
प्राणायाम और ध्यान अभ्यास
शिविर में कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। इनका उद्देश्य श्वसन प्रणाली को मजबूत करना और मानसिक तनाव को कम करना है।
इसके अलावा “ओम” के उच्चारण के साथ ध्यान अभ्यास भी कराया गया, जिससे प्रतिभागियों को मानसिक शांति और एकाग्रता प्राप्त हुई।

हास्य योग और मनोरंजनात्मक अभ्यास
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण हास्य योग रहा, जिसे खेल प्रशिक्षक कृष्णचंद्र पुरोहित के मार्गदर्शन में कराया गया। संगीत की मधुर धुनों के साथ प्रतिभागियों ने ताली बजाकर और हंसी के माध्यम से तनाव मुक्ति का अनुभव किया।
हास्य योग को मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
आयोजकों का संदेश
शिविर संयोजक डॉ. अनिल दुबे और श्रीमती वंदना दुबे ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस योग शिविर का लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि यह शिविर केवल व्यायाम का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेष अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में उपस्थित विशेष अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे योग शिविर समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा है और इसे जीवन का हिस्सा बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
समाज में योग की बढ़ती भूमिका
आज के समय में योग केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक संतुलन का भी माध्यम बन चुका है।
इस तरह के निःशुल्क योग शिविर समाज के हर वर्ग को जोड़ते हैं और स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक सोच विकसित करते हैं।
निष्कर्ष
सप्त दिवसीय निःशुल्क योग शिविर का शुभारंभ इंदौर में एक महत्वपूर्ण सामाजिक और स्वास्थ्य आधारित पहल के रूप में देखा जा रहा है।
परशुराम जयंती के पावन अवसर पर शुरू हुआ यह शिविर न केवल स्वास्थ्य सुधार का माध्यम है, बल्कि समाज में एकता, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब समाज, संगठन और स्वास्थ्य संस्थान मिलकर कार्य करते हैं, तो एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
