श्री टोडरमल दिगम्बर जैन सिद्धान्त महाविद्यालय का 50वाँ स्थापना दिवस समारोह सानन्द सम्पन्न
नितिन जैन, जबलपुर की रिपोर्ट
जयपुर, 24 जुलाई। पण्डित टोडरमल सर्वोदय ट्रस्ट, जयपुर एवं श्री कुन्दकुन्द कहान दिगम्बर जैन तीर्थ सुरक्षा ट्रस्ट, मुम्बई द्वारा संचालित श्री टोडरमल दिगम्बर जैन सिद्धान्त महाविद्यालय, जयपुर का 50वाँ स्थापना दिवस समारोह आज पण्डित टोडरमल स्मारक भवन में उत्साह एवं गौरवपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। अनेक विद्वानों, महाविद्यालय के स्नातकों, अध्यापकों, स्थानीय अतिथियों एवं वर्तमान विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर 50वें स्थापना दिवस का उद्घाटन, मंगलगान एवं स्वस्तिक-निर्माण के साथ हुआ। तत्पश्चात धर्मध्वजा के साथ सभी अतिथि एवं विद्यार्थी पंक्तिबद्ध होकर प्रवचन मण्डप पहुँचे, जहाँ मंगलाचरण के साथ उद्घाटन सभा प्रारम्भ हुई। समारोह की अध्यक्षता पण्डित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सुशील कुमार गोदिका ने की। मंच पर प्राचार्य डॉ. शांतिकुमार पाटील, ट्रस्टी, डॉ. शुद्धात्मप्रकाश भारिल्ल (जयपुर), पण्डित बिपिन शास्त्री (मुम्बई), श्री सौरभजी गोदिका, डॉ. श्रेयांशजी शास्त्री, जयपुर, डॉ. राकेश शास्त्री (नागपुर), श्रीमान अखिलजी, श्रीमान अश्वनीजी, श्रीमान हीराचंदजी वैद, जयपुर तथा अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन उपप्राचार्य पण्डित जिनकुमार शास्त्री ने किया। विद्यार्थियों ने महाविद्यालय की गौरवगाथा पर ओजस्वी वक्तव्य, संस्कृत एवं अंग्रेज़ी भाषण, भावपूर्ण काव्य-पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ तथा चित्र-भेंट के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रत्येक प्रस्तुति में महाविद्यालय के प्रति श्रद्धा, गुरुओं के प्रति कृतज्ञता तथा जैनदर्शन के प्रति समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। उपस्थित जनसमुदाय ने विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं आत्मविश्वास की मुक्तकण्ठ से सराहना की।
समारोह में महाविद्यालय के प्रेरणास्रोत, तत्त्ववेत्ता डॉ. हुकमचन्द भारिल्ल का विशेष वीडियो संदेश प्रदर्शित किया गया, उन्होंने महाविद्यालय निर्माण का इतिहास पर प्रकाश ड़ालते हुए इसे जैन तत्त्वज्ञान के संरक्षण, अध्ययन एवं प्रचार-प्रसार का अद्वितीय केन्द्र बताते हुए विद्यार्थियों से तत्त्वज्ञानमय जीवन जीने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर डॉ. शुद्धात्मप्रकाश भारिल्ल (जयपुर), डॉ. राकेश शास्त्री (नागपुर), डॉ. शांतिकुमार पाटील (जयपुर) एवं पण्डित बिपिन शास्त्री (मुम्बई) ने अपने उद्बोधनों में कहा कि महाविद्यालय ने पिछले पाँच दशकों में केवल विद्यार्थियों को शिक्षित ही नहीं किया, बल्कि ऐसे तत्त्वनिष्ठ विद्वानों का निर्माण किया है, जो आज देश-विदेश में जैनदर्शन, वीतराग-विज्ञान एवं तत्त्वज्ञान के प्रभावी संवाहक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि जैनसिद्धान्त, संस्कार, साधना और चरित्र-निर्माण की सुदृढ़ परम्परा का जीवंत केन्द्र है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शांतिकुमार पाटील ने छात्रों को शुभकामनायें देते हुए कहा कि सच्ची धर्म सामग्री, देशना लब्धि है, इसलिए जिनवाणी पढ़ें ही नहीं, ह्रदय से लगायें।
डॉ. शुद्धात्मप्रकाश भारिल्ल (जयपुर) ने महाविद्यालय के भविष्य की दृढ़ता पर प्रकाश ड़ालते हुए कहा कि “महाविद्यालय की तरफ किसी ने आँख दिखाई तो उसे हमारी लाश से गुजरना होगा।”
पण्डित बिपिन शास्त्री (मुम्बई) ने अपने उद्बोधन में “हमें सच्चे आत्मार्थी बनना है” ऐसा कहते हुए प्रतिवर्ष महाविद्यालय के छात्रों को पूज्य गुरुदेवश्री की साधनाभूमि सोनगढ़ ले जाने का ऐलान किया।

सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री टोडरमल दिगम्बर जैन सिद्धान्त महाविद्यालय ने पाँच दशकों से तत्त्वज्ञान का जो अलख जगाया है, वह आने वाली पीढ़ियों का भी पथ आलोकित करता रहेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन को साधना के रूप में अपनाने तथा तत्त्वज्ञान के प्रति समर्पित जीवन जीने का आह्वान किया। साथ ही समाज के सभी वर्गों से महाविद्यालय की इस गौरवशाली ज्ञान-परम्परा को और अधिक समृद्ध बनाने में सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।
समारोह का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि महाविद्यालय भविष्य में भी जैनदर्शन एवं तत्त्वज्ञान के मर्मज्ञ विद्वानों का निर्माण कर समाज के आध्यात्मिक उत्थान में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। आत्मानुभूति और तत्त्वप्रचार के प्रति समर्पण से ओत-प्रोत यह 50वाँ स्थापना दिवस समारोह उपस्थित सभी जनों के लिए प्रेरणा, गौरव और नवसंकल्प का अविस्मरणीय पर्व बन गया।
