मध्यप्रदेश के 305 खराब पुल: प्रदेश में सड़क सुरक्षा पर बड़ा संकट
मध्यप्रदेश के 305 खराब पुल गंभीर खतरे की श्रेणी में, जिनमें 45 ब्रिज बहुत ही खराब स्थिति में पाए गए। सरकार ने मरम्मत अभियान तेज़ किया, 30 ब्रिज ठीक, 15 पर काम जारी।
मध्यप्रदेश के 305 खराब पुल वर्तमान में जनता की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। बरेली–पिपरिया रोड पर हाल ही में भारी ट्रैफिक के दबाव से एक पुल ढह गया, जिसमें एक राहगीर की मौत ने पूरे प्रशासन को झकझोर दिया। यह हादसा केवल एक संकेत था कि राज्य में कई पुल अपनी उम्र और संरचनात्मक कमजोरी के चलते भारी जोखिम पैदा कर रहे हैं।
प्रदेश में कुल 305 पुल खराब और बहुत खराब स्थिति में पाए गए हैं, जिनमें 253 एमपीआरडीसी (MPRDC) और 50 पीडब्ल्यूडी (PWD) के अधीन हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी ट्रैफिक और नियमित रखरखाव की कमी से स्थिति और खतरनाक स्तर तक पहुँच गई है।
45 पुल बहुत ही खराब स्थिति में — सबसे गंभीर श्रेणी
सरकारी सर्वे के अनुसार 45 पुल Very Poor Condition में हैं, जिनमें से 24 मेजर ब्रिज हैं। इनकी संरचना 45–50 साल पुरानी हो चुकी है और तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।
इनमें शामिल प्रमुख पुल:
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मकसूदनगढ़- बैरसिया पुल
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राहतगढ़-बेगमगंज-गैरतगंज मार्ग पुल
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बरेली-पिपरिया पुल
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नसरुल्लागंज-खातेगांव पुल
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हरई-जुन्नारदेव के दो ब्रिज
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बंदोल जंक्शन–सिखेड़ा के दो पुल
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बैहर (छत्तीसगढ़ बॉर्डर) ब्रिज
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रतलाम–थांडला पुल
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मनावर–लुन्हेरा पुल
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अलीराजपुर–कुक्षी–बड़वानी मार्ग के कई पुल
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पिपरिया–होशंगाबाद मार्ग पर पाँच पुल
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मंडी–खंडवा मार्ग के तीन पुल
उधर, डबरा शहर में एक घाटे हुए पुल की स्थिति इतनी खराब थी कि प्रशासन को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।
मरम्मत कार्य: 45 में से 30 पुलों का कार्य पूरा, 15 पर जारी
एमपीआरडीसी अधिकारियों के अनुसार:
- बहुत खराब 45 पुलों में से 30 की मरम्मत पूरी हो चुकी है।
- 15 पर काम तेज़ी से जारी है।
- बाकी खराब स्थिति वाले 260 पुलों पर भी मरम्मत शुरू हो चुकी है।
हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि मरम्मत से पहले स्ट्रक्चरल ऑडिट और लोड टेस्ट अनिवार्य है।
किन मार्गों पर सबसे अधिक जोखिम?
कई ऐसे हाई-ट्रैफिक मार्ग हैं जहाँ मध्यप्रदेश के 305 खराब पुल लोगों की जान के लिए जोखिम बन चुके हैं:
पिपरिया–होशंगाबाद मार्ग (सबसे अधिक खराब पुल)
इस मार्ग पर पाँच खराब पुल हैं और ट्रकों की भारी आवाजाही इसे और खतरनाक बनाती है।
अलीराजपुर–कुक्षी–बड़वानी मार्ग
चार पुल अत्यंत जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं।
हरदा–आशापुर मार्ग
दो पुल “Very Poor” श्रेणी में हैं।
राहतगढ़–खुरई–खिमलासा रोड
यहाँ दो पुल बेहद पुरानी संरचना पर बने होने के कारण खतरे में हैं।
सरकार की समीक्षा—हर 7 दिन में रिपोर्ट अनिवार्य
एमपीआरडीसी एमडी ने टीम को निर्देश दिए हैं कि:
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हर 7 दिन में प्रगति रिपोर्ट दी जाए।
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सभी पुलों की लाइव मॉनिटरिंग की जाए।
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दो दिनों बाद एमडी स्वयं समीक्षा करेंगे।
तकनीकी सलाहकार आर.के. मेहरा ने मंगलवार को विस्तृत समीक्षा की।
विशेषज्ञों की चेतावनी: हादसे बढ़ सकते हैं
इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि पुल गिरने की घटनाएँ मुख्य रूप से तीन कारणों से होती हैं:
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संरचना का बुजुर्ग हो जाना
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ओवरलोडेड ट्रैफिक
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रखरखाव की अनदेखी
यदि मरम्मत समय पर नहीं की गई तो बड़े हादसे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को चुनौती देंगे।
आम जनता को चेतावनी — जोखिम वाले मार्गों पर सावधानी
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भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग चुनना चाहिए
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रात के समय पुलों पर ओवरलोड ट्रकों का दबाव जोखिम बढ़ाता है
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नागरिकों को पुल के पास चेतावनी बोर्ड देखकर धीमी गति से गुजरना चाहिए
- https://morth.nic.in (सड़क परिवहन मंत्रालय)
- https://mprdc.gov.in (एमपीआरडीसी – ब्रिज स्थिति रिपोर्ट)
- https://newsdesk.in/mp-road-safety
- https://newsdesk.in/infrastructure-updates
Conclusion
मध्यप्रदेश के 305 खराब पुल राज्य में बढ़ते सड़क हादसों का बड़ा कारण बन सकते हैं यदि मरम्मत कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ। सरकार ने समीक्षा की गति बढ़ाई है, लेकिन विशेषज्ञों की चेतावनी बताती है कि तत्काल और व्यापक कार्यवाही अनिवार्य है।
