जयपुर में 1 नवंबर को 3.5 फीट ऊँची और 1,400 किग्रा वजनी ब्रॉज़ प्रतिमा का भव्य अनावरण
– श्री महावीर स्वामी के नाम समर्पित नई स्टेशन प्रतिमा योजना की शुरुआत
जयपुर/इंदौर – राजधानी जयपुर में श्री महावीर जी रेल्वे स्टेशन पर स्थापित की जाने वाली, “जीओ और जीने दो” का दिव्य संदेश देने वाली 1,400 किग्रा वज़न की 3.5 फीट ऊँची ब्रॉज़ मेटल की प्रतिमा का शनिवार 01 नवंबर को भव्य समारोह में अनावरण किया गया। प्रस्तावित स्थान है भट्टारक जी की नसिया (जयपुर) जहाँ श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ ने भाग लिया।
यह प्रतिमा मुख्य रूप से दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी के तत्वावधान में तैयार की गई है, और इसे भारत सरकार व रेल मंत्रालय की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत भेजा जाएगा।
अनावरण समारोह का विवरण
दोपहर 12:15 बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में पं. प्रकाश जैन द्वारा मंगलाचरण एवं मंगलाष्टक का सामूहिक उच्चारण हुआ। इस अवसर पर समाज श्रेष्ठी गजेन्द्र बड़जात्या, प्रवीण बड़जात्या, विकास बड़जात्या, प्रिया बड़जात्या, मेंक का बड़जात्या (वैशाली नगर, कामां परिवार) ने प्रतिमा का अनावरण किया।
अतिथियों में रेल्वे एक्सईएन अनिल जैन (ललितपुर), प्रमुख वास्तुविद् राज कुमार कोठ्यारी, नरेन्द्र जैन गंगापुर, नितेश मीणा, ईश्वर पंडित सहित निर्माण-शिल्पकार एवं समिति के पूर्व अध्यक्ष एन के सेठी, जस्टिस एन के जैन, संयुक्त मंत्री उमरावमल संघी, पी के जैन, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. कमल सोगानी, हेमन्त सोगानी, अनिल दीवान, सुरेश सबलावत, रुपिन काला, डॉ. पदम कुमार जैन, समाज के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।
संयोजक नरेन्द्र जैन गंगापुर ने प्रतिमा स्थापना से लेकर निर्माण तक की पूरी जानकारी दी। कोषाध्यक्ष विवेक काला ने बताया कि टीले से मिली मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की मूंगा वर्णी प्रतिमा के अनुरूप यह ब्रॉज़ मेटल की प्रतिमा तैयार की गई है। इसके निर्माण में लगभग तीन माह का समय लगा।
अद्वितीय प्रतिमा की विशेषताएँ
– यह प्रतिमा ब्रॉज़ मेटल से निर्मित है, वज़न लगभग 1,400 किग्रा है।
– ऊँचाई लगभग 3.5 फीट (42 इंच) है।
– इसे जमीन से 22.5 फीट ऊँची छतरी पर स्थापित किया जाएगा, जो कि श्री महावीर जी रेल्वे स्टेशन पर देखने वालों को आकर्षित करेगी।
– इस अनावरण के बाद प्रतिमा भट्टारक जी की नसिया, चित्रकूट कालोनी कवर का बाग से होते हुए गंगापुर सिटी मार्ग से श्री महावीर जी के लिए रवाना हुई।
श्रद्धालुओं का हुजूम, उत्सव-वातावरण
अनावरण के समय साधर्मी बंधुओं ने दोपहर 2:15 बजे तक प्रतिमा का अवलोकन कर अपने आप को सौभाग्यशाली समझा। कार्यक्रम संयोजक उमरावमल संघी तथा पी के जैन ने सभी आगंतुकों तथा सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की भव्यता, भक्तों की सहभागिता एवं जयकारों की गूँज ने आयोजन को यादगार बनाया। इसके साथ यह संदेश भी गया कि यह प्रतिमा सिर्फ शिल्प नहीं, बल्कि धर्म-संस्कृति का प्रतीक है।
आगे की योजना और महत्व
समिति के अनुसार, अनावरण के बाद इस प्रतिमा को जल्द ही श्री महावीर जी रेल्वे स्टेशन पर सार्वजनिक रूप से स्थापित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित स्थान पर यह प्रतिमा “जीओ और जीने दो” के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी।
यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक समरसता, भारतीय शिल्प कौशल तथा सांस्कृतिक धरोहर को भी सामने लाता है। इस प्रकार यह परियोजना जयपुर में धार्मिक-शिल्प-संस्कृति का संगम है।
निष्कर्ष
जयपुर की भट्टारक जी की नसिया में आयोजित इस अनावरण समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक मान्यताओं एवं आधुनिक-योजनाओं के मिलन से किस प्रकार नया उत्सव-वातावरण तैयार हो सकता है। 1,400 किग्रा वज़नी, 3.5 फीट ऊँची ब्रॉज़ प्रतिमा का यह अनावरण, अनेक जनों की श्रद्धा, भक्ति और सहभागिता का प्रमाण है।
आगे जब इस प्रतिमा को श्री महावीर जी रेल्वे स्टेशन पर स्थापित किया जाएगा, तब यह स्थल न सिर्फ यात्रीगण के लिए आस्था-केंद्र बनेगा बल्कि दर्शनार्थियों के लिए एक प्रेरणा-स्थल भी।


