108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा में ध्वजारोहण व भूमि पूजन संपन्न। 1 से 5 जनवरी 2026 तक होने वाले इस महायज्ञ में कलश यात्रा, प्रवचन और संस्कार कार्यक्रम आयोजित होंगे।
प्रस्तावना
108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा को लेकर नगर में आध्यात्मिक वातावरण बन चुका है। इसी क्रम में भारत कॉमर्स विद्यालय परिसर में ध्वजारोहण एवं भूमि पूजन का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन आगामी 1 से 5 जनवरी 2026 तक होने वाले महायज्ञ की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना।
ध्वजारोहण व भूमि पूजन कार्यक्रम
भारत कॉमर्स विद्यालय के यज्ञशाला परिसर में आज विधि-विधान से ध्वजारोहण और भूमि पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर उज्जैन जोन के समन्वयक ने 108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा के पूरे पांच दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा विस्तार से प्रस्तुत की।

108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा का स्वरूप
इस महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार है। शांतिकुंज हरिद्वार से पधारी टोली द्वारा प्रतिदिन यज्ञ, आरती और प्रवचन किए जाएंगे।
1 जनवरी: भव्य कलश यात्रा
कार्यक्रम का शुभारंभ 1 जनवरी 2026 को भव्य कलश यात्रा से होगा। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए यज्ञशाला परिसर पहुंचेगी। कलश यात्रा के समापन पर सामूहिक आरती और आध्यात्मिक मार्गदर्शन होगा।

यज्ञ एवं प्रवचन का दैनिक कार्यक्रम
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प्रातः 8:00 बजे: 108 कुंडी गायत्री महायज्ञ
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सायं 7:00 बजे: प्रवचन एवं सत्संग
इन पांच दिनों तक नगर सहित आसपास के ग्रामों से श्रद्धालु यज्ञ में सहभागिता करेंगे।
नि:शुल्क संस्कार आयोजन
108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा के अंतर्गत कई संस्कार नि:शुल्क संपन्न कराए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
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नामकरण संस्कार
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विद्यारंभ संस्कार
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मुंडन संस्कार
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यज्ञोपवीत संस्कार
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गुरु दीक्षा
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विवाह संस्कार

प्रदर्शनी व साहित्य स्टॉल
कार्यक्रम स्थल पर परम पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीय माताजी की जन्म शताब्दी पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही गुरुदेव द्वारा रचित साहित्य का विशेष स्टॉल भी रहेगा।
108 ग्रामों की सहभागिता
इस महायज्ञ की विशेषता यह है कि नागदा नगर सहित आसपास के 108 ग्रामों के श्रद्धालु इसमें भाग लेंगे। यह आयोजन परम वंदनीय माताजी श्री माटी भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी को समर्पित रहेगा।
सामाजिक व आध्यात्मिक महत्व
108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने का माध्यम है। भूमि पूजन में उपस्थित यजमानों ने तन-मन-धन से सहयोग का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
नागदा में आयोजित 108 कुंडी गायत्री महायज्ञ नागदा आने वाले समय में आध्यात्मिक चेतना का बड़ा केंद्र बनेगा। यह आयोजन न केवल नगर बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा और गौरव का विषय है।
