Yashwant Holkar तृतीय की गद्दी संभालने का भव्य समारोह
इंदौर शहर के राजवाड़ा, इंदौर स्थित मल्हारी मार्तंड मंदिर में गुरुवार को एक बार फिर होलकर राजवंश की समृद्ध और शाही परंपरा निभाई गई। राजसी वैभव और भव्यता का यह आयोजन न केवल परिवार की विरासत को दर्शाता है, बल्कि आज भी भारतीय शाही संस्कृति में होलकर राजवंश की पहचान को मजबूत करता है।
राजसी माहौल में हुई नई गद्दी की घोषणा
मल्हारी मार्तंड मंदिर में आयोजित समारोह में सरदार, दीवान, राजगुरु और ठिकानदारों की उपस्थिति रही। दरबार सजा और नए उत्तराधिकारी Yashwant होलकर तृतीय की घोषणा की गई।
होलकर राजवंश की उत्तराधिकारी महारानी उषा देवी की इच्छानुसार, उनके छोटे भाई शिवाजीराव होलकर द्वितीय (रिचर्ड होलकर) के पुत्र को उत्तराधिकारी के रूप में घोषित किया गया। यह परंपरा यह दर्शाती है कि होलकर परिवार अपनी विरासत और परंपराओं को आज भी संभालकर चला रहा है।
पगड़ी, तलवार और ‘बहादुर’ का तमगा
यशवंतराव होलकर तृतीय को शाही सम्मान देने के लिए उन्हें पगड़ी पहनाई गई। साथ ही यशवंतराव होलकर (द्वितीय) की तलवार उन्हें भेंट की गई और उन्हें ‘बहादुर’ का तमगा भी प्रदान किया गया। इस प्रकार सूबेदार मल्हारराव होलकर द्वारा स्थापित होलकर राजवंश को 16वां उत्तराधिकारी मिला।
ग्रहशांति और श्रीराम नवमी पूजन
नई गद्दी संभालने के बाद यशवंतराव ने सबसे पहले कुलदेवता मल्हारी मार्तंड के दर्शन किए और अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को पान-सुपारी भेंट की। उसके बाद उनके पिता शिवाजीराव ने उन्हें आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया और तलवार भेंट की।
यह परंपरा 4 जुलाई 1962 से चली आ रही है, जब यशवंतराव होलकर (द्वितीय) ने अपनी पहली पत्नी संयोगिताराजे की पुत्री उषाराजे को उत्तराधिकारी बनाया था।
समारोह का आयोजन और मुख्य अतिथि
समारोह की अध्यक्षता होलकर राजवंश के राजगुरु डॉ. विजय विश्वनाथ राजोपाध्याय ने की। उन्होंने ग्रहशांति और श्रीराम नवमी का पूजन कर पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक रूप दिया।
पूर्व इंदौर रियासत के सरदारों का दरबार भी लगाया गया। समारोह में होलकर परिवार के प्रमुख सदस्य और उनके दामाद परिवार, सरदार फणसे, मल्हारराव होलकर के मामा परिवार से बार्गल, दीवान पलशीकर, सरदार फडनीस और अन्य दरबारी उपस्थित रहे।
Yashwant का संदेश: सेवा और धार्मिक कार्य
यशवंतराव होलकर तृतीय ने कहा, “मेरी आदरणीय बुआ, उषा देवी द्वारा मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी जाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। आधुनिक युग के साथ परिवार की औपचारिक भूमिका भी विकसित हुई है। इस दिशा में मैं विरासत संरक्षण, हथकरघा पुनरुत्थान और पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर के परोपकारी सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगा।”
Yashwant Holkar तृतीय का परिचय
यशवंतराव होलकर द्वितीय की तीन पत्नियां थीं: संयोगिताराजे, मार्गरेट लावर और युफेमिया वाट। संयोगिताराजे की पुत्री उषाराजे को पहले उत्तराधिकारी बनाया गया था। युफेमिया वाट के पुत्र रिचर्ड (शिवाजीराव द्वितीय) को वर्तमान उत्तराधिकारी घोषित किया गया।
शिवाजीराव का विवाह पद्मश्री से अलंकृत शालिनी देवी (सैली) से हुआ और इनके पुत्र यशवंतराव होलकर तृतीय वर्तमान में महेश्वर और मुंबई में रहते हैं।
होलकर राजवंश का शासक इतिहास
- सूबेदार मल्हारराव होलकर: 1731-1766
- मालेराव होलकर: 1766-1767
- अहिल्याबाई होलकर: 1767-1795
- तुकोजीराव होलकर: 1795-1797
- काशीराव होलकर: 1797-1799
- यशवंतराव होलकर (प्रथम): 1799-1811
- मल्हारराव होलकर (द्वितीय): 1811-1833
- मार्तंडराव होलकर: 1833-1834
- हरिराव होलकर: 1834-1843
- खंडेराव होलकर: 1843-1844
- तुकोजीराव होलकर (द्वितीय): 1844-1856
- शिवाजीराव होलकर: 1856-1903
- तुकोजीराव होलकर (तृतीय): 1903-1926
- यशवंतराव होलकर (द्वितीय): 1926-1948
- महारानी उषाराजे होलकर: 1962
होलकर परिवार की परंपराएं आज भी जीवित
होलकर परिवार आज भी कई परंपराओं को निभा रहा है:
- राजवाड़े पर होली का शासकीय दहन
- दशहरे के दिन शमी पूजन
- गणेश चतुर्थी पर मूर्ति को पालकी में लाना
- हरिराव होलकर की छत्री में गणेश मूर्ति का विसर्जन
- महेश्वर में प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग पूजन
- गुड़ी पड़वा और चंपा षष्ठी के पर्वों का आयोजन
- नवरात्र में मल्हारी मार्तंड का तली भंडारा
समारोह की झलकियां
- सुबह 8:30 बजे रस्में शुरू होकर 1:30 बजे तक चलीं
- कुलदेवता मल्हारी मार्तंड के दर्शन और अहिल्याबाई का नमन
- राजगुरु द्वारा पगड़ी पहनाना
- शिवाजीराव होलकर (द्वितीय) द्वारा तलवार भेंट
- सरदार फणसे द्वारा राजसी वस्त्र भेंट
- यशवंतराव को ‘बहादुर’ की उपाधि
निष्कर्ष
यह भव्य समारोह न केवल होलकर परिवार की परंपरा और विरासत को दर्शाता है, बल्कि यह भारतीय शाही संस्कृति की जीवंतता का प्रमाण भी है। यशवंतराव होलकर तृतीय की गद्दी संभालना केवल एक औपचारिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सेवा, धार्मिक कार्य और सांस्कृतिक संरक्षण की एक निरंतर जिम्मेदारी भी है।
होलकर परिवार आज भी अपने सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कर्तव्यों को निभाते हुए महाराजाओं की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम कर रहा है।
