BRICS Summit 2026: सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, PM मोदी से होगी अहम द्विपक्षीय बैठक
18वें BRICS सम्मेलन में शामिल होने नई दिल्ली आए चीनी राष्ट्रपति
BRICS Summit 2026: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंच रहे हैं। करीब सात वर्षों बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक है। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब 2020 के सीमा विवाद के बाद भारत और चीन अपने संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को शी जिनपिंग की भारत यात्रा की पुष्टि की थी। मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर चीनी राष्ट्रपति 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।
करीब 400 लोगों का प्रतिनिधिमंडल
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार शी जिनपिंग के साथ चीन का करीब 400 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है। यह वर्ष 2019 में शी के साथ भारत आए प्रतिनिधिमंडल की तुलना में काफी बड़ा बताया जा रहा है। उस समय उनके साथ आने वाले अधिकारियों की संख्या 200 से कम थी।
बड़े प्रतिनिधिमंडल को दोनों देशों के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर बातचीत की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। BRICS सम्मेलन के साथ भारत-चीन द्विपक्षीय वार्ता भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
शाम 5:45 बजे होगी मोदी-शी मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक शाम 5:45 बजे भारत मंडपम में प्रस्तावित है।
कार्यक्रम के अनुसार शी जिनपिंग दोपहर करीब 12:30 बजे दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे होटल जाएंगे। इसके बाद लगभग 2 बजे भारत मंडपम पहुंचने का कार्यक्रम है।
दोपहर करीब 2:30 बजे BRICS सम्मेलन शुरू होगा। शाम 5 बजे BRICS नेताओं की फैमिली फोटो होगी, जबकि 5:30 बजे नेताओं के पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी है। रात 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विश्व नेताओं के लिए डिनर आयोजित किया जाएगा।
मोदी की कई नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इनमें इथियोपिया, मलेशिया, अबू धाबी और वियतनाम के नेताओं के साथ मुलाकातें शामिल हैं।
हालांकि, सबसे अधिक ध्यान मोदी और शी जिनपिंग की बैठक पर रहेगा। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और पिछले कुछ वर्षों के तनाव को देखते हुए इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
2020 के बाद संबंधों को सामान्य करने की कोशिश
भारत और चीन के रिश्तों में वर्ष 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद बड़ा तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहा।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य विकास के लिए जरूरी है। हाल के समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा को इसी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।
SCO के बाद BRICS में आमने-सामने होंगे दोनों नेता
हाल ही में बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई थी।
अब नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इस बैठक में दोनों देशों के संबंधों की आगे की दिशा पर चर्चा हो सकती है।
चीन ने बातचीत और सहयोग पर दिया जोर
भारत में चीन के राजदूत शू फीहोंग ने दोनों नेताओं की बैठक की तैयारियों की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं।
राजदूत ने कहा कि कजान और तियानजिन में दोनों नेताओं की मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा वर्ष होगा, जब मोदी और शी एक-दूसरे से मिल रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ काम करने, बातचीत बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है।
मतभेदों को सही तरीके से संभालने पर जोर
चीनी पक्ष ने भारत-चीन संबंधों में मौजूद मतभेदों को उचित तरीके से संभालने पर भी जोर दिया है। बीजिंग की ओर से दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी और एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार के रूप में आगे बढ़ने की बात कही गई है।
ऐसे में मोदी-शी बैठक में केवल मौजूदा विवादों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में संवाद और सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सीमा, व्यापार और सहयोग पर हो सकती है चर्चा
मोदी और शी की बैठक में भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता का मुद्दा प्रमुख हो सकता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग, राजनयिक संवाद और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श की संभावना है।
भारत की ओर से सीमा क्षेत्रों में शांति को द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण शर्त माना जाता रहा है। इसलिए बैठक के दौरान सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के रुख पर विशेष नजर रहेगी।
BRICS में वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं के अलावा सहयोगी और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान BRICS देशों के बीच सहयोग मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। आर्थिक सहयोग, बहुपक्षीय व्यवस्था और वैश्विक दक्षिण की भूमिका जैसे मुद्दे भी एजेंडे में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
दुनिया की नजर मोदी-शी बैठक पर
सात साल बाद शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2020 के बाद भारत-चीन संबंधों में आए तनाव के बीच दोनों नेताओं की यह मुलाकात भविष्य के रिश्तों की दिशा के संकेत दे सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोदी और शी की बैठक से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और संवाद को नई गति मिलेगी। बैठक के दौरान सामने आने वाले संदेश और उसके बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयानों से भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
