विश्व सर्प दिवस पर छात्राओं को किया गया जागरूक, सर्पदंश से बचाव और वैज्ञानिक जानकारी देकर दूर की गई भ्रांतियां
राजेंद्रग्राम कन्या शिक्षा परिसर में हुआ विशेष जागरूकता कार्यक्रम, 400 छात्राओं और शिक्षकों ने लिया हिस्सा
जिला ब्यूरो चीफ: राजेश कुमार चौधरी
राजेंद्रग्राम।
विश्व सर्प दिवस के अवसर पर लोगों को सर्पों के प्रति जागरूक करने और सर्पदंश से बचाव के उपायों की जानकारी देने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रणाम नर्मदा युवा संघ (PRNYUS) द्वारा माता शबरी शासकीय शिक्षा परिसर, राजेंद्रग्राम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं और शिक्षकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में सर्पों को लेकर फैली गलत धारणाओं और अंधविश्वासों को समाप्त करना, सर्पों के वास्तविक महत्व को समझाना तथा सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में सही प्राथमिक उपचार की जानकारी उपलब्ध कराना था।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने छात्राओं को बताया कि सर्प प्रकृति के महत्वपूर्ण जीव हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में लोग अक्सर सर्पों को लेकर डर और भ्रम का शिकार हो जाते हैं, जिसके कारण कई बार मानव और वन्यजीव दोनों को नुकसान पहुंचता है।
400 छात्राओं और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग
माता शबरी शासकीय शिक्षा परिसर, राजेंद्रग्राम में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में लगभग 400 छात्राओं सहित विद्यालय के सभी शिक्षक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ विशेषज्ञों की बातों को सुना और सर्पों से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। छात्राओं को बताया गया कि सर्पों की पहचान कैसे की जाती है, कौन से सर्प विषैले होते हैं और कौन से विषहीन।
विशेषज्ञों ने बताया कि हर सर्प जहरीला नहीं होता, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग अक्सर सभी सर्पों को खतरनाक समझ लेते हैं। उन्होंने कहा कि सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से सर्पों से होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सर्पों से जुड़े अंधविश्वासों को वैज्ञानिक तरीके से किया गया दूर
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने सर्पों से जुड़े कई पारंपरिक भ्रम और अंधविश्वासों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कई ऐसी बातें समाज में प्रचलित हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
छात्राओं को समझाया गया कि सर्पों के प्रति डर के बजाय उनके व्यवहार को समझना जरूरी है। सर्प आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते, बल्कि वे खतरा महसूस होने पर अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया देते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि सर्प पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी जीव हैं। वे चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, जिससे कृषि और जैव विविधता को लाभ मिलता है।
उन्होंने समाज से अपील की कि सर्पों को मारने के बजाय उन्हें सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर जंगल या सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाना चाहिए।
सर्पदंश की स्थिति में सही प्राथमिक उपचार की दी गई जानकारी
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग सर्पदंश की स्थिति में अपनाए जाने वाले प्राथमिक उपचार की जानकारी देना रहा।
विशेषज्ञों ने छात्राओं और शिक्षकों को बताया कि यदि किसी व्यक्ति को सर्प काट ले तो घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बताया कि पीड़ित व्यक्ति को शांत रखना चाहिए और जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या गलत घरेलू उपचार में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो सकती है।
छात्राओं को बताया गया कि जागरूकता और सही समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से सर्पदंश के मामलों में जीवन बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों और छात्राओं के बीच हुआ संवाद सत्र
कार्यक्रम की सबसे खास बात विशेषज्ञों, शिक्षकों और छात्राओं के बीच आयोजित प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र रहा।
इस दौरान छात्राओं ने सर्पों से जुड़े कई सवाल पूछे और विशेषज्ञों ने सरल भाषा में उनके जवाब दिए। छात्राओं ने सर्पों की पहचान, उनके व्यवहार, विषैले सर्पों की विशेषताओं और सर्पदंश से बचाव जैसे विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं।
विशेषज्ञों ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जागरूकता फैलाने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि विद्यार्थी सही जानकारी प्राप्त कर उसे अपने परिवार और समाज तक पहुंचाएं तो कई गलत धारणाओं को समाप्त किया जा सकता है।
PPT प्रस्तुति के माध्यम से समझाया गया सर्पों का महत्व
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा पावरपॉइंट प्रस्तुति (PPT) के माध्यम से सर्पों के जीवन, उनके व्यवहार और पर्यावरण में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रस्तुति के माध्यम से छात्राओं को बताया गया कि सर्प केवल वन्य जीव नहीं हैं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने में प्रत्येक जीव की अपनी भूमिका होती है। इसलिए वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी है।
जीवित सर्प का किया गया सुरक्षित प्रदर्शन
कार्यक्रम के अंत में सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किए गए एक जीवित सर्प का प्रदर्शन (डेमो) किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने छात्राओं को सर्प के व्यवहार और उसकी गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।
डेमो के माध्यम से बताया गया कि यदि घर, खेत या आसपास के क्षेत्र में कोई सर्प दिखाई दे तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय प्रशिक्षित सर्पमित्र या वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
छात्राओं को यह भी समझाया गया कि सर्प से सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है। बिना जानकारी के सर्प को पकड़ने या उसके साथ छेड़छाड़ करने से खतरा बढ़ सकता है।
सर्प संरक्षण और जैव विविधता पर दिया गया संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने प्रकृति और जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी आवश्यकता है। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता जरूरी है और सर्प भी इसी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सभी वक्ताओं ने समाज से अपील की कि वे अंधविश्वासों से दूर रहें और किसी भी वन्यजीव के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रत्येक जीव का संरक्षण करना मानव की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर प्रणाम नर्मदा युवा संघ (PRNYUS) के अध्यक्ष डॉ. विकास चंदेल, अनूपपुर जिले के वन्य जीव संरक्षक एवं सर्प प्रहरी श्री शशिधर अग्रवाल, सर्प विशेषज्ञ श्री भास्कर कुमार वर्मे, सर्पमित्र श्री माखन सिंह धुर्वे, सर्प मित्र छोटे लाल यादव, महेंद्र यादव, देवराज डीके सहित विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक मनोज कुमार धुर्वे एवं अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया।
ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा आयोजन
विश्व सर्प दिवस के अवसर पर आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम छात्राओं और शिक्षकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से जहां लोगों को सर्पों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी मिली, वहीं सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में सही कदम उठाने की जानकारी भी प्राप्त हुई।
विद्यालय परिवार, छात्राओं और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी से यह कार्यक्रम सफल और यादगार बना।
आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया जा सके।
