ग्लूकोमा जागरूकता वॉक इंदौर में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह पर आयोजित हुई, जिसमें 100 से अधिक नेत्र चिकित्सकों और समाजसेवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय ने नियमित नेत्र जांच और ग्लूकोमा से बचाव के लिए जागरूकता का संदेश दिया।
ग्लूकोमा जागरूकता वॉक इंदौर: 100 से अधिक चिकित्सकों और समाजसेवियों की भागीदारी
ग्लूकोमा जागरूकता वॉक इंदौर में विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अवसर पर एक भव्य और प्रेरणादायक आयोजन देखने को मिला। इंदौर डिविजनल ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी (IDOS) द्वारा आयोजित इस विशेष जागरूकता रैली में 100 से अधिक नेत्र चिकित्सकों, पीजी छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह वॉक रविवार सुबह यशवंत क्लब से छप्पन दुकान तक निकाली गई। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में ग्लूकोमा जैसी गंभीर नेत्र बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना था, ताकि लोग समय रहते अपनी आंखों की जांच करवा सकें और स्थायी अंधत्व से बच सकें।
विश्व ग्लूकोमा सप्ताह का महत्व
हर वर्ष विश्वभर में World Glaucoma Week मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को ग्लूकोमा बीमारी के बारे में जागरूक करना है।
ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया या कांचबिंद भी कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंख की नस यानी ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि इस बीमारी के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण इसे डॉक्टर अक्सर “Silent Thief of Vision” कहते हैं।
मुख्य अतिथि कैलाश विजयवर्गीय का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैलाश विजयवर्गीय ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ग्लूकोमा जैसी बीमारी के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि समय पर जांच न होने पर यह बीमारी स्थायी अंधत्व का कारण बन सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से नेत्र परीक्षण करवाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि समाज में स्वास्थ्य जागरूकता के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन बेहद जरूरी है, ताकि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग बनें।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख डॉक्टर
इस अवसर पर IDOS के कई वरिष्ठ डॉक्टर और पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
- डॉ. अमित पोरवाल – अध्यक्ष
- डॉ. कविता पोरवाल – उपाध्यक्ष
- डॉ. सुमीत अग्रवाल – सचिव
- डॉ. राजेन्द्र अग्रवाल – वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ
- डॉ. यू.एस. तिवारी
- डॉ. आदित्य अग्रवाल
साथ ही रोटरी क्लब सेंट्रल के अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र दिल्लीवाल तथा समाजसेवी पुरुषोत्तम वाघमारे भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
डॉक्टरों की चेतावनी – साइलेंट चोर ऑफ विज़न
डॉक्टरों ने बताया कि ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंख के अंदर दबाव बढ़ने के कारण ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है।समय रहते इलाज न होने पर यह स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकता है।चिंताजनक बात यह है कि कई मामलों में मरीज को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता और जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में ग्लूकोमा होने का खतरा अधिक होता है।
इनमें शामिल हैं:
- 40 वर्ष से अधिक आयु के लोग
- जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास है
- मधुमेह के मरीज
- उच्च रक्तचाप वाले लोग
- जिनकी आंखों का नंबर अधिक है
ऐसे लोगों को विशेष रूप से नियमित नेत्र जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
नियमित नेत्र जांच क्यों जरूरी
नेत्र विशेषज्ञों ने बताया कि ग्लूकोमा का समय पर पता लगाने का सबसे प्रभावी तरीका नियमित आंखों की जांच है।यदि बीमारी का प्रारंभिक चरण में पता चल जाए तो दवाओं, लेजर या सर्जरी की मदद से दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है।इसलिए लोगों को कम से कम साल में एक बार आंखों की जांच जरूर करवानी चाहिए।
रंगपंचमी के साथ कार्यक्रम का समापन
ग्लूकोमा जागरूकता वॉक के समापन के बाद प्रतिभागियों ने रंगपंचमी के अवसर पर हर्बल रंगों के साथ उत्साहपूर्वक रंगोत्सव मनाया।कार्यक्रम में सभी के लिए स्वादिष्ट नाश्ते की भी व्यवस्था की गई थी।पूरा माहौल स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और उत्साह से भरपूर रहा।
समाज में जागरूकता का संदेश
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में यह संदेश देना था कि यदि ग्लूकोमा की समय पर जांच और उपचार किया जाए तो दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है।IDOS के डॉक्टरों ने आम नागरिकों से अपील की कि वे नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवाएं और अपने परिवार व समाज में भी नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाएं।
