व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में India-US ट्रेड डील का अपडेट
US और India के बीच जारी व्यापारिक सौदे (Trade Deal) पर व्हाइट हाउस ने अपनी फैक्ट शीट में हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इस बदलाव में दाल का उल्लेख हटाया गया और भारत की अमेरिकी उत्पादों की खरीद के लिए शब्दावली में बदलाव किया गया। पहले इसे “प्रतिबद्ध (Committed)” बताया गया था, अब इसे “इरादा रखता है (Intends)” के रूप में बदल दिया गया है।
कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने इस बदलाव को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि दाल को 9 फरवरी को जारी नई फैक्ट शीट में चुपचाप शामिल किया गया, जो कि 6 फरवरी 2026 के भारत-अमेरिका जॉइंट स्टेटमेंट का हिस्सा नहीं था।
फैक्ट शीट में क्या-क्या बदलाव किए गए
White House द्वारा मंगलवार को जारी की गई फैक्ट शीट में समझौते की प्रमुख शर्तों का उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि भारत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करेगा या समाप्त करेगा। इनमें प्रमुख उत्पाद हैं:
- ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स
- रेड सोरघम
- ट्री नट्स
- कुछ दालें
- सोयाबीन तेल
- वाइन और स्पिरिट्स
इसके अलावा भारत ने ऊर्जा, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और अन्य क्षेत्रों में $500 बिलियन से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने का इरादा जताया है।
फैक्ट शीट में यह भी बताया गया कि भारत ने दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में अमेरिका पर सबसे अधिक शुल्क लगाए हैं। कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत तक और कुछ वाहनों पर 100 प्रतिशत से अधिक शुल्क लागू हैं। इसके साथ ही, भारत का इतिहास अत्यधिक संरक्षणवादी नीतियों और गैर-शुल्क बाधाओं का रहा है, जिससे अमेरिका के कई निर्यात भारत में प्रतिबंधित रहे।
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दोनों देशों के बीच लाभकारी समझौते का उद्देश्य
White House के दस्तावेज के अनुसार, अमेरिका और भारत आने वाले हफ्तों में इस ढांचे को शीघ्र लागू करने की योजना बना रहे हैं। इसका उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों और व्यापारियों के लिए लाभ सुनिश्चित करना है। इसके लिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर काम किया जा रहा है।
इसमें भारत उन गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करेगा, जो प्राथमिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही उत्पत्ति नियमों पर भी बातचीत होगी ताकि दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिले।
कांग्रेस की आलोचना और सरकार का जवाब
White House फैक्ट शीट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने कहा कि यह डील किसानों और आम लोगों से छुपाई गई थी। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच की फैक्ट शीट में दाल का उल्लेख किया गया था, लेकिन यह जॉइंट स्टेटमेंट का हिस्सा नहीं था।
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इस ट्रेड डील में किसानों और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा कि कोई भी ऐसा उत्पाद, जो भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचा सकता हो, उसे इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, पोल्ट्री, डेयरी, केला, खट्टे फल, हरी मटर, छोले, मूंग, और तिलहन पर कोई भी भारतीय टैरिफ रियायत नहीं दी गई।
India के उद्योग और व्यापार पर प्रभाव
इस समझौते में प्रमुख बात यह है कि अमेरिका और भारत दोनों ही अपने-अपने व्यापारिक लाभ को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। भारत का उद्देश्य यह है कि घरेलू किसानों और उद्योगों को नुकसान न पहुंचे, जबकि अमेरिका चाहता है कि उसके उत्पादों की बिक्री बढ़े और व्यापार संतुलन बना रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच यह डील लंबे समय तक दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, बशर्ते इसे सही तरीके से लागू किया जाए।
निष्कर्ष
India -US ट्रेड डील और उसके लिए जारी फैक्ट शीट में बदलाव ने राजनीतिक और व्यापारिक दोनों ही स्तर पर बहस को बढ़ा दिया है। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसानों और संवेदनशील सेक्टर के हितों की सुरक्षा की जाएगी। वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दल इसे जनता से छुपाए गए मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।
फैक्ट शीट के अनुसार, आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच यह डील पूरी तरह लागू की जाएगी और अमेरिकी उत्पादों के आयात में वृद्धि के साथ-साथ भारत के लिए भी व्यापारिक लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।
