महिला सम्मान समारोह में नारी शक्ति का अभिनंदन, अपर्णा यादव रहीं मुख्य अतिथि
वर्षायोग के अंतर्गत आयोजित समारोह में समाजसेवा और धार्मिक कार्यों में सक्रिय महिलाओं का सम्मान; सामाजिक संस्थाओं और मंदिर समितियों में महिला भागीदारी बढ़ाने का आह्वान
समारोह में उन महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया, जो समाजसेवा के साथ साधु-संतों के आगमन, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों में समर्पित भाव से सेवाएं देती रही हैं। कार्यक्रम के माध्यम से नारी शक्ति के सम्मान के साथ महिलाओं को सामाजिक संस्थाओं में अधिक नेतृत्व और निर्णयकारी भूमिका देने का संदेश भी दिया गया।
समाजसेवा में सक्रिय महिलाओं का किया सम्मान
महिला सम्मान समारोह के दौरान समाज और धार्मिक गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का अभिनंदन किया गया। इनमें चित्रा जैन, अनंत बाई जी, रमा जैन, उषा जैन, माया जैन, अनीता जैन और नीलिमा जैन शामिल रहीं।
आयोजकों के अनुसार सम्मानित महिलाओं ने विभिन्न अवसरों पर धार्मिक आयोजनों, साधु-संतों की सेवा और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है। समारोह में उनके सेवा और समर्पण को समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
महिलाओं के सम्मान के दौरान उपस्थित समाजजनों ने उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसी महिलाओं को प्रोत्साहित करना भी रहा, जो बिना किसी अपेक्षा के समाज और धार्मिक गतिविधियों में निरंतर सहयोग करती हैं।
अपर्णा यादव ने लिया उपाध्याय श्री का आशीर्वाद
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने महिला सम्मान समारोह के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि समाज के विकास में महिलाओं के योगदान को पहचान और सम्मान मिलना आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम समाज में महिलाओं के कार्यों को सामने लाने और अन्य महिलाओं को भी सामाजिक गतिविधियों में आगे आने के लिए प्रेरित करते हैं।
अपर्णा यादव ने सम्मान प्राप्त करने वाली सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक और धार्मिक योगदान की प्रशंसा की।
घर से कारोबार तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं महिलाएं
अपने संबोधन में अपर्णा यादव ने वर्तमान समय में महिलाओं की बदलती और विस्तृत भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, कार्यालय, शिक्षा, सामाजिक सेवा और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार और कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर समाज के विकास में भागीदारी कर रही हैं। महिला सशक्तीकरण के लिए उन्हें अवसर, सम्मान और नेतृत्व प्रदान करना आवश्यक है।
उन्होंने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में जैन समाज के योगदान की भी सराहना की और कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।
महिला सशक्तीकरण में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण
समारोह में इस बात पर जोर दिया गया कि महिला सशक्तीकरण केवल सरकारी योजनाओं या नीतियों तक सीमित विषय नहीं है। परिवार और सामाजिक संस्थाओं को भी महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने होंगे।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सेवा और नेतृत्व के क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलने से सामाजिक संस्थाओं को भी उनके अनुभव और दृष्टिकोण का लाभ मिल सकता है।
कार्यक्रम में महिला सम्मान को केवल प्रतीकात्मक आयोजन तक सीमित न रखते हुए महिलाओं की वास्तविक सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।
सामाजिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान

कार्यक्रम में आदीश कुमार जैन ने महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी के विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की दिशा में कदम उठाए गए हैं, उसी तरह सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं में भी महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने मंदिर समितियों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में महिलाओं को नेतृत्व के अवसर देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि महिलाएं लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाती आई हैं, इसलिए उन्हें संस्थाओं की निर्णय प्रक्रिया में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने समाज के पदाधिकारियों से महिलाओं को जिम्मेदारियां सौंपने और नई पीढ़ी की महिलाओं को सामाजिक नेतृत्व के लिए तैयार करने का आह्वान किया।
वर्षायोग में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला
नगर में चल रहे वर्षायोग के अंतर्गत पूज्य उपाध्याय श्री विहसंत सागर महाराज के सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में धर्म आराधना के साथ समाज को शिक्षा, सेवा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाली गतिविधियों को भी शामिल किया जा रहा है। महिला सम्मान समारोह भी इसी श्रृंखला का हिस्सा रहा।
आयोजकों के अनुसार धार्मिक आयोजन व्यक्ति को आध्यात्मिक दिशा देने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बन सकते हैं। इसी उद्देश्य से वर्षायोग के दौरान विभिन्न सामाजिक विषयों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
साधु-संतों की सेवा में महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान

कार्यक्रम में समाज की महिलाओं द्वारा साधु-संतों के आगमन और धार्मिक आयोजनों में किए जाने वाले सेवा कार्यों की भी चर्चा हुई।
आयोजकों ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं में महिलाएं लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती रही हैं। भोजन व्यवस्था से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों, स्वागत, सामाजिक समन्वय और अन्य व्यवस्थाओं तक उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है।
इसी सेवा और समर्पण को सम्मान देने के उद्देश्य से चयनित महिलाओं का सार्वजनिक रूप से अभिनंदन किया गया।
डॉ. सविता जैन ने किया कार्यक्रम का संचालन
महिला सम्मान समारोह का संचालन डॉ. सविता जैन ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध रूप से संचालित करते हुए सम्मानित महिलाओं के योगदान का उल्लेख किया।
समारोह में अध्यक्ष चंद्रप्रकाश जैन, अजय जैन, नलिन राज, रितेश जैन, बंटी जैन और अखिलेश जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान समाजजनों ने महिला सशक्तीकरण और महिलाओं की सामाजिक भागीदारी को लेकर अपने विचार साझा किए।
नारी सम्मान के साथ नेतृत्व का दिया संदेश
महिला सम्मान समारोह ने नारी शक्ति के अभिनंदन के साथ एक व्यापक सामाजिक संदेश भी दिया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं का सम्मान तभी सार्थक होगा, जब उन्हें परिवार, समाज और संस्थाओं में निर्णय लेने और नेतृत्व करने के पर्याप्त अवसर भी मिलें।
समारोह के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में महिलाओं के योगदान को पहचान देने के साथ नई पीढ़ी की महिलाओं को भी आगे आने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजन का समापन नारी शक्ति के सम्मान, सामाजिक सहभागिता और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के संदेश के साथ हुआ। उपस्थित समाजजनों ने सम्मानित महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी समाजसेवा और धार्मिक गतिविधियों में इसी तरह सक्रिय योगदान देने की अपेक्षा व्यक्त की।
