रतलाम में फर्जी नारकोटिक्स टीआई बनकर ठगी का आरोप, सपना ठाकुर गिरफ्तार
दैनिक स्वराज वाणी | रतलाम। रतलाम के एक प्रॉपर्टी ब्रोकर ने सपना ठाकुर नाम की महिला पर खुद को नारकोटिक्स विभाग की टीआई बताकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता रुपेश चरपोट के अनुसार, महिला ने उन्हें रुपये वापस दिलाने का भरोसा देकर संपर्क किया था। बाद में कथित तौर पर पुलिस अधिकारी होने का डर दिखाकर उनसे धन और संपत्ति ली गई। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने सपना ठाकुर को गिरफ्तार किया है। उसे दोबारा अदालत में पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। आरोपों की जांच जारी है।
रुपये वापस दिलाने के बहाने संपर्क का आरोप
तेजा नगर के प्रॉपर्टी ब्रोकर रुपेश चरपोट ने पुलिस को बताया कि सपना ठाकुर ने खुद को मंदसौर के नारकोटिक्स विभाग की टीआई बताया था। चरपोट के मुताबिक, उनका विजय लोढ़ा से रुपये के लेनदेन को लेकर मामला था। महिला ने कथित रूप से यह भरोसा दिलाया कि वह रुपये वापस दिलाने में मदद करेगी। इसी सिलसिले में उसने एफआईआर की प्रति व्हाट्सऐप पर मंगवाई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद महिला ने अपनी कथित सरकारी पहचान का इस्तेमाल कर उन पर दबाव बनाना शुरू किया।
शिकायत में बताई गई इस पहचान की सत्यता जांच का विषय है। फिलहाल सपना ठाकुर को नारकोटिक्स विभाग की अधिकारी बताने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। पुलिस मामले में यह पता लगा रही है कि उसने शिकायतकर्ता से किस तरह संपर्क किया और धन तथा संपत्ति का लेनदेन किन परिस्थितियों में हुआ।
मकान, प्लॉट और जेवर लेने की भी शिकायत
एक अन्य प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि शुरुआत में उनसे 11 लाख रुपये लिए गए। बाद में मामला केवल नकद रकम तक सीमित नहीं रहा; मकान, प्लॉट और जेवर लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन संपत्तियों का मूल्यांकन, स्वामित्व संबंधी कागजात और लेनदेन का क्रम जांच में अहम होंगे। अभी इन आरोपों को अदालत में सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मामले में कुल कथित नुकसान की राशि को लेकर प्रकाशित खबरों में अंतर है। दिए गए समाचार में 4.45 करोड़ रुपये का उल्लेख है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में 4.75 करोड़ रुपये लिखे गए हैं। इसलिए अंतिम राशि पुलिस की एफआईआर, जब्ती दस्तावेजों या आधिकारिक बयान से स्पष्ट करना जरूरी होगा। फिलहाल इसे करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले के रूप में प्रस्तुत करना अधिक सटीक है।
एनकाउंटर की धमकी देने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने और रुपये देने से इनकार किया, तो सपना ठाकुर ने उन्हें एनकाउंटर की धमकी दी। रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि सबूत मिटाने के लिए उनका मोबाइल फोन फॉर्मेट कराया गया। धमकी कब और किस माध्यम से दी गई तथा फोन में मौजूद जानकारी का क्या हुआ, इन बातों की पुष्टि जांच से होगी।
किसी अधिकारी के पद का दावा करके दबाव बनाने का आरोप इस मामले का गंभीर पहलू है। जांच में कॉल रिकॉर्ड, संदेश, बैंक लेनदेन और संपत्ति के दस्तावेजों से शिकायतकर्ता के बयान की पुष्टि की जा सकती है। साथ ही आरोपी महिला का पक्ष भी मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
गिरफ्तारी के बाद जांच पर नजर
पुलिस ने सपना ठाकुर को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उसे फिर अदालत में पेश किया गया। हालांकि, पुलिस रिमांड, बरामद रकम और संपत्ति से जुड़ी कार्रवाई का पूरा आधिकारिक विवरण अभी उपलब्ध नहीं है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं, इस बारे में भी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इस घटना ने पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराने और आर्थिक लाभ लेने के कथित तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोपों, दस्तावेजों और आरोपी के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। प्रकाशन से पहले कुल रकम की पुष्टि पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड से करना आवश्यक है, क्योंकि उपलब्ध रिपोर्टों में 4.45 करोड़ और 4.75 करोड़ रुपये, दोनों आंकड़े दिए गए हैं।
