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प्रधानमंत्री आवास का भरोसा देकर विधवा का मकान तुड़वाने का आरोप, योजना का लाभ नहीं मिलने से परिवार आर्थिक संकट में

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Published On: 22 August 2026

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प्रधानमंत्री आवास का भरोसा देकर विधवा का मकान तुड़वाने का आरोप, योजना का लाभ नहीं मिलने से परिवार आर्थिक संकट में

अनूपपुर जिला ब्यूरो — अभिषेक द्विवेदी

चोरभट्टी ग्राम पंचायत का मामला; महिला ने सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर लगाए आरोप, पूर्व में स्वीकृत आवासों की भौतिक जांच कराने की मांग

अनूपपुर/जैतहरी। अनूपपुर जिले की ग्राम पंचायत चोरभट्टी में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक विधवा महिला ने पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि उसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का भरोसा दिया गया था और इसी कथित आश्वासन पर उसने अपना पुराना कच्चा मकान तुड़वा दिया। इसके बाद परिवार की मदद और जमा पूंजी के सहारे नया मकान तैयार कराया, लेकिन अब तक योजना के तहत आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उसके सामने गंभीर आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।

महिला ने आरोप लगाया है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उससे कथित रूप से पैसों की मांग भी की गई थी। हालांकि महिला द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अभी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। महिला ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और पात्र पाए जाने पर योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

योजना का लाभ मिलने के भरोसे पर पुराना मकान गिराने का दावा

शिकायतकर्ता महिला के मुताबिक वह लंबे समय से अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रह रही थी। महिला का आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर पर उसे बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उसका नाम आने पर उसे आवास निर्माण के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

महिला के अनुसार ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की ओर से कथित रूप से दिए गए आश्वासन पर उसने भरोसा किया और अपना पुराना कच्चा मकान तुड़वा दिया। इसके बाद नए मकान का निर्माण शुरू किया गया।

महिला का कहना है कि यदि उसे पहले से यह जानकारी होती कि उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा, तो वह अपने पुराने मकान को गिराने जैसा बड़ा फैसला नहीं करती। अब पुराना मकान भी नहीं रहा और नए मकान के निर्माण में परिवार की जमा पूंजी खर्च हो चुकी है।

परिवार की जमा पूंजी से कराया नया मकान तैयार

महिला का कहना है कि पुराने मकान को गिराने के बाद परिवार के सामने नया आशियाना तैयार करने की मजबूरी थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद परिवार के एक सदस्य ने अपनी जमा पूंजी लगाकर मकान निर्माण में सहायता की।

परिवार ने इस उम्मीद में निर्माण कार्य कराया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि से निर्माण पर आए आर्थिक बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। महिला का आरोप है कि मकान तैयार होने के बावजूद उसे योजना की राशि प्राप्त नहीं हुई।

इस स्थिति के कारण परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। महिला का कहना है कि वह विधवा है और उसके दो छोटे बच्चे हैं, ऐसे में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ मकान निर्माण का खर्च उठाना उसके लिए बेहद मुश्किल हो रहा है।

योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे मांगने का आरोप

महिला ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए उससे कथित तौर पर पैसों की मांग की गई। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वह कथित मांग पूरी नहीं कर सकी।

महिला का दावा है कि इसके बाद उसे योजना का लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि इस आरोप की अभी किसी सक्षम जांच एजेंसी या प्रशासनिक अधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि महिला का नाम योजना की पात्रता सूची में था या नहीं, उसके आवेदन की वर्तमान स्थिति क्या है और आवास योजना का लाभ नहीं मिलने के पीछे वास्तविक प्रशासनिक कारण क्या रहे।

इन सभी सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

दो छोटे बच्चों के साथ बढ़ी महिला की परेशानी

महिला के अनुसार पति की अनुपस्थिति में दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी भी उसी पर है। परिवार पहले ही सीमित आर्थिक संसाधनों में गुजर-बसर कर रहा है। ऐसे में मकान निर्माण पर खर्च हुई राशि ने आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।

महिला का कहना है कि नए मकान में बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या भी सामने आ रही है। इससे बच्चों के साथ रहने में परेशानी हो रही है।

महिला ने प्रशासन से उसकी स्थिति को देखते हुए मामले की जांच करने और यदि वह योजना के लिए पात्र है तो नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

अपात्र लोगों को आवास देने का भी लगाया आरोप

शिकायतकर्ता महिला ने ग्राम पंचायत चोरभट्टी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्व में लाभान्वित किए गए हितग्राहियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

उसका आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में कुछ ऐसे लोगों को भी योजना का लाभ दिया गया है, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद थे। महिला का कहना है कि यदि प्रशासन पूर्व में स्वीकृत आवासों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

हालांकि महिला ने जिन कथित अपात्र हितग्राहियों का उल्लेख किया है, उनकी पात्रता अथवा अपात्रता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि योजना का लाभ निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार दिया गया या नहीं।

पूर्व में स्वीकृत आवासों की भौतिक जांच की मांग

महिला ने प्रशासन से केवल अपने मामले की जांच कराने की मांग नहीं की है, बल्कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत आवासों की भी भौतिक जांच कराने की मांग उठाई है।

उसका कहना है कि जांच में यह देखा जाना चाहिए कि जिन हितग्राहियों को योजना का लाभ दिया गया, वे निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते थे या नहीं। इसके अलावा योजना की राशि का उपयोग वास्तव में आवास निर्माण में हुआ या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

यदि प्रशासन इस मामले में जांच कराता है तो पंचायत स्तर पर योजना के क्रियान्वयन और महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और योजना का लाभ दिलाने की गुहार

पीड़ित महिला ने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उसने मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित उसके आवेदन, पात्रता, सूची में नाम और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाए।

महिला का कहना है कि यदि वह योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्र है तो उसे नियमानुसार आवास योजना का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही मकान तुड़वाने के लिए कथित रूप से दिए गए आश्वासन और पैसे मांगने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच हो।

मामले में निष्पक्ष प्रशासनिक जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महिला द्वारा लगाए गए आरोप सीधे तौर पर ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी योजना के क्रियान्वयन से जुड़े हुए हैं।

पंचायत पदाधिकारियों का पक्ष आना बाकी

महिला द्वारा ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक को लेकर लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायत और उसके बयान पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

खबर लिखे जाने तक संबंधित सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका था। इसलिए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

अब महिला और उसके परिवार की नजर प्रशासन पर है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि महिला प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र थी या नहीं, उसे लाभ क्यों नहीं मिला और पंचायत पदाधिकारियों पर लगाए गए अन्य आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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