राम मंदिर का पहला CEO कौन होगा? सर्च कमेटी ने ट्रस्ट को सौंपी रिपोर्ट, 2 सितंबर को नाम पर लग सकती है मुहर
हजारों आवेदनों की जांच और इंटरव्यू के बाद पूरी हुई चयन प्रक्रिया, रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अगुवाई वाली कमेटी ने ट्रस्ट को सौंपी अपनी सिफारिश
अयोध्या, 1 सितंबर 2026। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर के प्रबंधन के लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सीईओ के चयन के लिए गठित सर्च कमेटी ने अपनी रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में नए सीईओ के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
राम मंदिर जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के बेहतर और व्यवस्थित प्रबंधन के लिए ट्रस्ट लंबे समय से एक योग्य सीईओ की तलाश में था। इसके लिए व्यापक स्तर पर आवेदन मंगाए गए और कई चरणों की चयन प्रक्रिया पूरी की गई। सर्च कमेटी ने पात्र उम्मीदवारों की योग्यता और अनुभव का मूल्यांकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी महाराज ने बैठक के बाद चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी बैठक में सीईओ के नाम को लेकर अंतिम निर्णय हो सकता है।
बड़े मंदिर के कुशल प्रबंधन के लिए CEO की तलाश
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने राम मंदिर परिसर के संचालन और प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर की प्रशासनिक व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं और विभिन्न व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की गई।
इसी उद्देश्य से ट्रस्ट ने सीईओ के चयन के लिए स्वतंत्र सर्च कमेटी बनाने का फैसला किया था।
महंत गोविंद देवगिरी महाराज के मुताबिक, ट्रस्ट ने इस महत्वपूर्ण पद के लिए योग्य व्यक्ति खोजने में मार्गदर्शन के लिए विशेषज्ञों से सहयोग मांगा था। इसके बाद चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सर्च कमेटी को दी गई।
सर्च कमेटी ने ट्रस्ट को सौंपी रिपोर्ट
सीईओ चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद सर्च कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। अब रिपोर्ट पर ट्रस्ट के स्तर पर विचार किया जाएगा।
ट्रस्ट पदाधिकारियों द्वारा रिपोर्ट का अध्ययन किए जाने के बाद न्यास मंडल की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। महंत गोविंद देवगिरी ने उम्मीद जताई है कि 2 सितंबर को होने वाली बैठक में सीईओ के नाम की घोषणा संभव है।
हालांकि, अंतिम नाम की आधिकारिक घोषणा ट्रस्ट के निर्णय के बाद ही होगी। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सीईओ पद के लिए अंतिम सूची में किन उम्मीदवारों को जगह मिली है।
हजारों लोगों ने दिखाई CEO पद में दिलचस्पी
राम मंदिर के सीईओ पद को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। रिपोर्ट में चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के दौरान हजारों आवेदनों और गूगल फॉर्म प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।
सर्च कमेटी ने सबसे पहले आवेदन करने वाले लोगों की पात्रता और अनुभव की जांच की। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों से अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए गूगल फॉर्म का इस्तेमाल किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में उम्मीदवारों को कई स्तरों पर छांटा गया। आखिर में सीमित संख्या में उम्मीदवारों को प्रत्यक्ष साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।
इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, प्रबंधन अनुभव और इतने बड़े धार्मिक परिसर के संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालने की योग्यता का आकलन किए जाने की बात सामने आई है।
रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली ने किया सर्च कमेटी का नेतृत्व
सीईओ चयन के लिए बनाई गई सर्च कमेटी का नेतृत्व रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली ने किया। उन्होंने चयन प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सीईओ जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए निष्पक्षता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल था।
उनके अनुसार, सर्च कमेटी के गठन की सूचना मिलने के बाद सबसे पहले बैठक कर चयन के लिए आवश्यक मानक निर्धारित किए गए। इन मानकों के आधार पर प्राप्त आवेदनों की जांच की गई।
इसके बाद पात्र उम्मीदवारों की सूची को अलग-अलग चरणों में छोटा किया गया। उम्मीदवारों से जानकारी लेने के लिए गूगल फॉर्म तैयार किया गया और प्राप्त जवाबों का मूल्यांकन किया गया।
ग्रेड A, B और C में किया गया उम्मीदवारों का मूल्यांकन
सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों के मूल्यांकन के लिए उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में रखा। जानकारी के अनुसार, उम्मीदवारों को ग्रेड A, ग्रेड B और ग्रेड C जैसी श्रेणियों में बांटकर उनकी योग्यता का विश्लेषण किया गया।
इसके बाद सबसे योग्य उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना गया। प्रत्यक्ष इंटरव्यू और अन्य मूल्यांकन प्रक्रियाओं के बाद अंतिम नामों की सूची तैयार की गई।
कमेटी ने अपनी पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट अब ट्रस्ट को सौंप दी है। अंतिम निर्णय लेने का अधिकार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास रहेगा।
2 सितंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
सीईओ चयन प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें 2 सितंबर को प्रस्तावित बैठक पर हैं। इसी बैठक में सर्च कमेटी की सिफारिशों पर विस्तार से विचार होने की संभावना है।
यदि ट्रस्ट के सदस्यों के बीच किसी एक नाम पर सहमति बनती है तो राम मंदिर के पहले सीईओ के नाम की घोषणा की जा सकती है।
यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले वर्षों में अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। मंदिर के साथ पूरे क्षेत्र में पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है।
CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
राम मंदिर के पहले सीईओ के सामने प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हो सकती हैं। मंदिर परिसर में रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुचारू दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों के बीच तालमेल और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं का संचालन प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है।
इसके अलावा बड़े धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं की संभावित मौजूदगी को देखते हुए व्यवस्थाओं की पहले से योजना तैयार करना भी महत्वपूर्ण होगा।
मंदिर परिसर से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में भी सीईओ की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
तीन प्रमुख संतों के नाम को लेकर भी चर्चा
इस बीच ट्रस्ट की व्यवस्था से जुड़े तीन प्रमुख संतों के नाम की भी चर्चा है। इनमें शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ और युगपुरुष स्वामी परमानंद शामिल बताए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, नियमित ट्रस्टी होने के कारण इन्हें संबंधित समिति में पदेन सदस्य बनाए जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। यदि इस व्यवस्था पर सहमति बनती है तो अलग से सदस्य चयन की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय अभी बाकी है और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
राम मंदिर के पहले CEO के नाम का इंतजार
सर्च कमेटी द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के साथ राम मंदिर के पहले सीईओ के चयन की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। हजारों आवेदनों की जांच, कई चरणों की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के बाद तैयार की गई रिपोर्ट पर अब ट्रस्ट फैसला करेगा।
2 सितंबर की बैठक इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि बैठक में अंतिम नाम पर सहमति बन जाती है तो राम मंदिर के इतिहास में पहली बार सीईओ के रूप में पेशेवर प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति के नाम की घोषणा हो सकती है।
