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WhatsApp Username Feature: नंबर छिपाकर चैटिंग का नया दौर, लेकिन सरकार ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

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Published On: 1 July 2026
WhatsApp Username Feature: नंबर छिपाकर चैटिंग का नया दौर, लेकिन सरकार ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

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WhatsApp Username Feature: नंबर छिपाकर चैटिंग का नया दौर, लेकिन सरकार ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

WhatsApp ने हाल ही में अपना एक नया और चर्चित फीचर—Username system—लॉन्च किया है, जिसके जरिए अब यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए भी दूसरों से चैट कर सकेंगे। यह बदलाव मैसेजिंग ऐप की दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक WhatsApp पूरी तरह मोबाइल नंबर आधारित प्लेटफॉर्म रहा है।

कंपनी का कहना है कि इस फीचर का मुख्य उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को और मजबूत करना है, ताकि लोग अनजान व्यक्तियों से बातचीत करते समय अपना निजी नंबर साझा करने को मजबूर न हों। हालांकि, इस सुविधा के साथ ही साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी सामने आने लगी हैं और भारत सरकार ने इस पर नजर रखना शुरू कर दिया है।

क्या है WhatsApp का नया Username फीचर?

इस नए फीचर के तहत अब हर यूजर एक यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। यह यूजरनेम ही उसकी पहचान का नया माध्यम होगा, ठीक उसी तरह जैसे Telegram या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर होता है।

अब तक WhatsApp पर किसी नए व्यक्ति से चैट शुरू करने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत होती थी। लेकिन इस फीचर के बाद कोई भी व्यक्ति सिर्फ यूजरनेम के जरिए बातचीत शुरू कर सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यूजर का मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को दिखाई नहीं देगा।

कंपनी के अनुसार यह बदलाव उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी होगा जो अनजान लोगों, बिजनेस कॉन्टैक्ट्स या ऑनलाइन नेटवर्किंग के दौरान अपनी निजी जानकारी साझा नहीं करना चाहते।

प्राइवेसी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

WhatsApp का यह फीचर सीधे तौर पर प्राइवेसी को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। आज के समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा लीक, स्पैम कॉल्स और अनचाहे मैसेज की समस्या लगातार बढ़ रही है।

ऐसे में यूजरनेम आधारित सिस्टम यूजर्स को एक अतिरिक्त सुरक्षा परत देता है। अब किसी को अपना नंबर देने की जरूरत नहीं होगी, जिससे व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की संभावना काफी कम हो सकती है।

कंपनी का दावा है कि यह फीचर यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल और सेफ्टी प्रदान करेगा।

सरकार की चिंता: साइबर फ्रॉड का बढ़ सकता है खतरा

जहां एक ओर यह फीचर प्राइवेसी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने इस पर सतर्क रुख अपनाया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस नए फीचर के सुरक्षा और गोपनीयता पहलुओं की जांच करने की तैयारी कर रही है।

सरकार की मुख्य चिंता यह है कि यदि पहचान छिपाना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए लोगों को ठगना और भी सरल हो सकता है। फर्जी यूजरनेम बनाकर किसी भी व्यक्ति की पहचान की नकल की जा सकती है, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी संभव है।

यदि जांच में किसी प्रकार की गंभीर खामी सामने आती है, तो WhatsApp की पेरेंट कंपनी Meta को नोटिस भी भेजा जा सकता है।

फर्जी पहचान और स्कैम का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यूजरनेम सिस्टम में सबसे बड़ा खतरा “इम्पर्सोनेशन” यानी किसी और की पहचान बनकर धोखा देना हो सकता है।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी कंपनी, सरकारी अधिकारी या सेलिब्रिटी जैसा नाम लेकर यूजरनेम बना सकता है और लोगों को भ्रमित कर सकता है। इससे फिशिंग, ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी जैसे मामलों में वृद्धि होने की आशंका है।

पहले भी Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ।

WhatsApp के सुरक्षा उपाय

इन चिंताओं को देखते हुए WhatsApp ने कुछ सुरक्षा उपायों की भी घोषणा की है:

  • हर यूजरनेम यूनिक होगा, यानी दो लोग एक जैसा नाम नहीं रख सकेंगे
  • कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न हो सके
  • कोई पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी उपलब्ध नहीं होगी
  • यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा जब वह पहले से ज्ञात हो

इन उपायों का उद्देश्य प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखना और दुरुपयोग रोकना है।

Telegram जैसा सिस्टम लेकिन अलग मॉडल

WhatsApp का यह फीचर काफी हद तक Telegram जैसा जरूर है, लेकिन कंपनी इसे अधिक नियंत्रित और सुरक्षित मॉडल के रूप में पेश कर रही है।

Telegram में किसी भी यूजर को आसानी से सर्च किया जा सकता है, जबकि WhatsApp में ऐसा पब्लिक सर्च सिस्टम नहीं होगा। इसका मतलब है कि यूजरनेम मिलने के बाद भी संपर्क सीमित रहेगा।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस नए फीचर को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

एक वर्ग इसे प्राइवेसी के लिए क्रांतिकारी कदम मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे संभावित खतरे के रूप में देख रहा है। कई लोगों का कहना है कि पहचान छिपाने की सुविधा से स्कैमर्स को नया मौका मिल सकता है।

खासतौर पर यह चिंता जताई जा रही है कि नकली यूजरनेम बनाकर लोगों को आसानी से धोखा दिया जा सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी नई तकनीक तभी सुरक्षित होती है जब उसके साथ मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम जुड़ा हो।

उनका मानना है कि केवल यूनिक यूजरनेम रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहचान सत्यापन (verification) और रिपोर्टिंग सिस्टम को भी मजबूत करना जरूरी होगा।

डिजिटल कम्युनिकेशन में बड़ा बदलाव

WhatsApp का यह नया फीचर डिजिटल कम्युनिकेशन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे न केवल प्राइवेसी का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ऑनलाइन बातचीत का तरीका भी बदल सकता है।

बिजनेस, नेटवर्किंग और सोशल इंटरैक्शन में यह फीचर काफी उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े हुए हैं।

निष्कर्ष

WhatsApp का यूजरनेम फीचर एक ओर जहां डिजिटल प्राइवेसी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है, वहीं दूसरी ओर यह साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां भी लेकर आया है।

सरकार की निगरानी और संभावित जांच यह तय करेगी कि यह फीचर कितना सुरक्षित साबित होता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि WhatsApp अपने यूजर्स को प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों के बीच कैसे संतुलन प्रदान करता है।

यदि सही तरीके से लागू किया गया, तो यह फीचर मैसेजिंग की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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