West Bengal में ईद-उल-अजहा से पहले पशु वध पर सख्त नियम, फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य
West Bengal सरकार ने ईद-उल-अजहा 2026 से पहले राज्य में पशु वध को लेकर बड़े और सख्त नियम लागू किए हैं। नए आदेश के तहत अब पशु वध केवल निर्धारित और अधिकृत वधशालाओं में ही किया जा सकेगा। सार्वजनिक स्थानों या अवैध जगहों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह कदम पशु कल्याण, स्वच्छता और वध प्रक्रिया को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि राज्य में एक समान और सुरक्षित व्यवस्था लागू की जा सके।
पशु वध के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार अब किसी भी पशु का वध करने से पहले फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। बिना प्रमाण पत्र के किसी भी गाय, भैंस या अन्य पशु का वध नहीं किया जा सकेगा।
यह प्रमाण पत्र नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाएगा। दोनों अधिकारियों की सहमति के बाद ही पशु को वध के योग्य माना जाएगा।
किन परिस्थितियों में मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट?
नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं पशुओं को वध के लिए फिट माना जाएगा जो निम्न स्थितियों में हों:
- पशु की आयु 14 वर्ष से अधिक हो
- या वह अत्यधिक वृद्ध हो गया हो
- या उसे गंभीर चोट, विकृति या लाइलाज बीमारी हो
- और वह अब उत्पादक क्षमता में न हो
इन परिस्थितियों के आधार पर ही पशु को वध के लिए उपयुक्त माना जाएगा।
सार्वजनिक पशु वध पर पूर्ण रोक
नए आदेश के अनुसार अब किसी भी प्रकार का सार्वजनिक पशु वध प्रतिबंधित रहेगा। केवल नगर पालिका या स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित वधशालाओं में ही यह प्रक्रिया की जा सकेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम राज्य के पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू किया गया है।
नियम तोड़ने पर कड़ी सजा
नए नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को:
- 6 महीने तक की जेल
- या 1000 रुपये तक का जुर्माना
- या दोनों सजा एक साथ
दी जा सकती है। सरकार ने साफ किया है कि नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा, खासकर त्योहारों के दौरान।
शिकायत करने की सुविधा भी दी गई
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार के अनुसार इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना, स्वच्छता बनाए रखना और वध प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
इसके अलावा राज्य में अवैध और अनियंत्रित पशु वध पर रोक लगाना भी इस कदम का एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया है।
