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“H-1B वीजा बदलाव 2025: ट्रंप के नए फैसले से भारत और भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर बड़ा असर”

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Published On: 20 September 2025
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H-1B वीजा बदलाव: ट्रंप के फैसले से भारत पर बड़ा असर, जानिए पूरा सच


ट्रंप का नया H-1B आदेश: क्या बदल गया?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर 2025 को H-1B वीजा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया। अब H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ताओं को $1 लाख (लगभग ₹83 लाख) शुल्क देना होगा। इसका उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा और केवल सबसे कुशल विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाना बताया गया है।

नोट: यह नियम मुख्य रूप से नए आवेदकों पर लागू होगा, लेकिन मौजूदा वीजा धारक भी विदेश से पुनः वीज़ा स्टैम्पिंग कराने पर इसका भुगतान करेंगे।


भारतीयों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

  • H-1B वीजा धारकों में भारत की हिस्सेदारी 70% से अधिक है।
  • 2024 में भारत को 2 लाख से अधिक H-1B वीजा मिले थे।
  • नए शुल्क मॉडल से मध्यम स्तर के इंजीनियरों के लिए खर्च उनकी सालाना आय का लगभग 80% हो जाएगा।
  • छात्रों और रिसर्चरों के लिए भी अमेरिका का रास्ता कठिन हो जाएगा।

अनुमान: यदि 60,000 भारतीय सीधे प्रभावित हों, तो सालाना भार $6 बिलियन (₹53,000 करोड़) तक हो सकता है।


अमेरिकी टेक और भारतीय IT कंपनियों पर प्रभाव

इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL जैसी कंपनियां H-1B वीज़ा पर अमेरिका में प्रोजेक्ट चलाती रही हैं।
लेकिन $1 लाख शुल्क मॉडल के बाद:

  • कंपनियों को अमेरिका में कर्मचारी भेजना महंगा होगा।
  • काम वापस भारत, कनाडा या मैक्सिको जैसे देशों में शिफ्ट हो सकता है।
  • Amazon, Microsoft और Meta जैसी कंपनियों ने 2025 की पहली छमाही में हजारों H-1B वीज़ा स्वीकृत किए थे।

कानूनी विवाद और आलोचना

  • इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस ने इतना बड़ा शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दी है।
  • पूर्व बाइडन प्रशासन के सलाहकार अजय भूटोरिया का कहना है कि इससे अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
  • यह कदम अमेरिका में छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को भी प्रभावित कर सकता है।

ट्रंप प्रशासन का तर्क

  • H-1B वीज़ा सिस्टम का दुरुपयोग रोकना।
  • कंपनियों को अमेरिकी ग्रेजुएट्स को ट्रेन करने के लिए मजबूर करना।
  • विदेशी कर्मचारियों को सस्ते में काम पर रखने की प्रवृत्ति रोकना।

नया नियम: H-1B वीजा अधिकतम 6 साल के लिए मान्य रहेगा और केवल उच्च वेतन वाले विशेषज्ञ ही स्पॉन्सर होंगे।


भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर

  • टैरिफ और व्यापार विवादों के बीच यह कदम कूटनीतिक तनाव बढ़ा सकता है।
  • लाखों भारतीय IT प्रोफेशनल प्रभावित होंगे।
  • टेक्नोलॉजी सहयोग और साझेदारी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

भविष्य में क्या होने की संभावना है?

  • वार्षिक 85,000 H-1B कोटा (65,000 सामान्य, 20,000 उच्च डिग्री) पर यह शुल्क लागू होगा।
  • नई कंपनियां और स्नातक पीछे हट सकते हैं।
  • अमेरिका केवल उच्च वेतन वाले विशेषज्ञों को स्पॉन्सर करेगा।
  • ग्लोबल टैलेंट अमेरिका आने से कतराएगा, जिससे नौकरियां ऑफशोर स्थानों पर शिफ्ट हो सकती हैं।
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