H-1B वीजा बदलाव: ट्रंप के फैसले से भारत पर बड़ा असर, जानिए पूरा सच
ट्रंप का नया H-1B आदेश: क्या बदल गया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर 2025 को H-1B वीजा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया। अब H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ताओं को $1 लाख (लगभग ₹83 लाख) शुल्क देना होगा। इसका उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा और केवल सबसे कुशल विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका लाना बताया गया है।
नोट: यह नियम मुख्य रूप से नए आवेदकों पर लागू होगा, लेकिन मौजूदा वीजा धारक भी विदेश से पुनः वीज़ा स्टैम्पिंग कराने पर इसका भुगतान करेंगे।
भारतीयों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
- H-1B वीजा धारकों में भारत की हिस्सेदारी 70% से अधिक है।
- 2024 में भारत को 2 लाख से अधिक H-1B वीजा मिले थे।
- नए शुल्क मॉडल से मध्यम स्तर के इंजीनियरों के लिए खर्च उनकी सालाना आय का लगभग 80% हो जाएगा।
- छात्रों और रिसर्चरों के लिए भी अमेरिका का रास्ता कठिन हो जाएगा।
अनुमान: यदि 60,000 भारतीय सीधे प्रभावित हों, तो सालाना भार $6 बिलियन (₹53,000 करोड़) तक हो सकता है।
अमेरिकी टेक और भारतीय IT कंपनियों पर प्रभाव
इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL जैसी कंपनियां H-1B वीज़ा पर अमेरिका में प्रोजेक्ट चलाती रही हैं।
लेकिन $1 लाख शुल्क मॉडल के बाद:
- कंपनियों को अमेरिका में कर्मचारी भेजना महंगा होगा।
- काम वापस भारत, कनाडा या मैक्सिको जैसे देशों में शिफ्ट हो सकता है।
- Amazon, Microsoft और Meta जैसी कंपनियों ने 2025 की पहली छमाही में हजारों H-1B वीज़ा स्वीकृत किए थे।
कानूनी विवाद और आलोचना
- इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस ने इतना बड़ा शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं दी है।
- पूर्व बाइडन प्रशासन के सलाहकार अजय भूटोरिया का कहना है कि इससे अमेरिकी टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
- यह कदम अमेरिका में छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को भी प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क
- H-1B वीज़ा सिस्टम का दुरुपयोग रोकना।
- कंपनियों को अमेरिकी ग्रेजुएट्स को ट्रेन करने के लिए मजबूर करना।
- विदेशी कर्मचारियों को सस्ते में काम पर रखने की प्रवृत्ति रोकना।
नया नियम: H-1B वीजा अधिकतम 6 साल के लिए मान्य रहेगा और केवल उच्च वेतन वाले विशेषज्ञ ही स्पॉन्सर होंगे।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर
- टैरिफ और व्यापार विवादों के बीच यह कदम कूटनीतिक तनाव बढ़ा सकता है।
- लाखों भारतीय IT प्रोफेशनल प्रभावित होंगे।
- टेक्नोलॉजी सहयोग और साझेदारी पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भविष्य में क्या होने की संभावना है?
- वार्षिक 85,000 H-1B कोटा (65,000 सामान्य, 20,000 उच्च डिग्री) पर यह शुल्क लागू होगा।
- नई कंपनियां और स्नातक पीछे हट सकते हैं।
- अमेरिका केवल उच्च वेतन वाले विशेषज्ञों को स्पॉन्सर करेगा।
- ग्लोबल टैलेंट अमेरिका आने से कतराएगा, जिससे नौकरियां ऑफशोर स्थानों पर शिफ्ट हो सकती हैं।
