शिक्षकों की कमी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: बछोड़िया स्कूल में हंगामा, अधिकारियों का घेराव; विरोध के बाद तत्काल अतिथि शिक्षक की नियुक्ति
रतलाम | संवाददाता: अर्जुन कुमावत, बछोड़िया
रतलाम जिले के ग्राम बछोड़िया स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी आखिरकार ग्रामीणों के गुस्से का कारण बन गई। पिछले करीब दो महीनों से विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। कई बार शिकायतें करने के बावजूद जब शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब ग्रामीणों, पालकों और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के सदस्यों ने एकजुट होकर विद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक अध्ययनरत बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया था। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्हें ग्रामीणों के तीखे सवालों और नाराजगी का सामना करना पड़ा। आखिरकार अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से एक अतिथि शिक्षक की व्यवस्था करने का निर्णय लिया, जिसके बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई।
दो महीने से शिक्षकों की कमी, बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा असर
ग्रामीणों के अनुसार शासकीय प्राथमिक विद्यालय बछोड़िया में पिछले दो महीनों से शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी। विद्यालय में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही थीं और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही थी।
पालकों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। समय बीतता गया और बच्चों की पढ़ाई लगातार पीछे होती चली गई।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के भविष्य की नींव होती है। ऐसे में शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाई बाधित होना बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में किया विरोध प्रदर्शन
बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने से नाराज ग्रामीण बुधवार को बड़ी संख्या में विद्यालय परिसर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन में पालक, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य शामिल हुए।
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की और तत्काल समाधान की मांग रखी।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारी

ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
इस दौरान संकुल प्रभारी कलम सिंह सिसौदिया, जन शिक्षक मोहन सिंह सोलंकी तथा राकेश जैन विद्यालय पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की।
हालांकि अधिकारियों के पहुंचते ही ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और लंबे समय से चली आ रही समस्या पर जवाब मांगा। मौके पर काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होती रही।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अब भी शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हुई तो वे शिक्षा विभाग के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।
अधिकारियों ने तत्काल की अतिथि शिक्षक की व्यवस्था
ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने तत्काल समाधान निकालने का प्रयास किया।
अधिकारियों ने मौके पर ही एक अतिथि शिक्षक की नियुक्ति करने का निर्णय लिया ताकि बच्चों की पढ़ाई दोबारा नियमित रूप से शुरू हो सके।
साथ ही अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जब तक नियमित शिक्षक की पदस्थापना नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था जारी रहेगी।
ग्रामीणों ने इसे फिलहाल राहत का कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वे स्थायी समाधान होने तक इस मामले पर नजर बनाए रखेंगे।
ट्रांसफर आदेश के बाद भी शिक्षक ने नहीं किया जॉइन
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया।
जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग द्वारा पहले एक शिक्षक का स्थानांतरण बछोड़िया विद्यालय में किया गया था, लेकिन संबंधित शिक्षक ने यहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
बताया गया कि शिक्षक ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इस विद्यालय में स्थानांतरण नहीं चाहते और उन्होंने स्थानांतरण आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय प्रक्रिया और कानूनी विवाद का सबसे बड़ा नुकसान बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि जब तक मामला अदालत में रहेगा, तब तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही कर देनी चाहिए थी।
BLO ड्यूटी के कारण भी प्रभावित हुई पढ़ाई
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में पदस्थ शिक्षक एवं प्रभारी कोमल कुमार उपाध्याय को मतदाता सूची (BLO) से जुड़े सरकारी कार्यों में लगा दिया गया था।
इसके कारण विद्यालय में नियमित पढ़ाई लगभग ठप हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पहले से ही विद्यालय में शिक्षकों की कमी थी, तब उपलब्ध शिक्षक को भी अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगा देना शिक्षा व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
उनका कहना है कि सरकारी कार्य अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्राथमिक शिक्षा को प्रभावित किए बिना वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
जनसहयोग से ग्रामीणों ने स्वयं रखा निजी शिक्षक
ग्रामीणों ने बताया कि जब विभाग की ओर से कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने स्वयं पहल करते हुए जनसहयोग से राशि एकत्रित की।
इसी राशि से बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए एक निजी शिक्षक की व्यवस्था की गई ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान कम से कम हो।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्य शिक्षा विभाग को करना चाहिए था, लेकिन मजबूरी में गांव के लोगों को स्वयं आगे आना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार नई योजनाओं की घोषणा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई विद्यालय अभी भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी तो सरकारी स्कूलों में लोगों का विश्वास कमजोर होगा।
ग्रामीणों ने मांग की कि जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में फिर ऐसी स्थिति बनी तो आंदोलन और अधिक व्यापक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि विद्यालय में स्थायी शिक्षक की शीघ्र नियुक्ति की जाए और भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।
बड़ी संख्या में ग्रामीण और पालक रहे मौजूद
विद्यालय परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और पालक उपस्थित रहे।
प्रदर्शन में बलराम देवड़ा, पहलाद कुमावत, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष पहलाद कुमावत, विजय दास बैरागी, बापूराम नायक, अर्जुन कुमावत सहित अनेक ग्रामीणों ने भाग लिया।
सभी ने एक स्वर में बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की और शिक्षा विभाग से स्थायी समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
ग्रामीणों को स्थायी समाधान का इंतजार
हालांकि विभाग द्वारा फिलहाल अतिथि शिक्षक की व्यवस्था कर दी गई है, लेकिन ग्रामीण इसे अस्थायी समाधान मान रहे हैं।
उनका कहना है कि विद्यालय में नियमित और स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति ही इस समस्या का वास्तविक समाधान है। यदि जल्द ही रिक्त पद नहीं भरे गए तो बच्चों की शिक्षा फिर प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल विभाग के आश्वासन के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा विभाग अपने वादे को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारता है।
