ग्रामीण क्षेत्र आज भी विकास से कोसों दूर नाचे रोड ना जल व्यवस्था डिजिटल इंडिया के योग में पीछे आए हैं ग्रामीण क्षेत्र
ग्रामीणों का आरोप नेता झूठे जुमले बोलते हैं देश विकास कर रहा है
Silwani संवाददाता वैभव जैन मस्ताना,
नेताओं का एक जुमला है कि हमारा देश बहुत विकास कर रहा है लेकिन जमीनी स्थिति पर जाकर देखें तो वास्तव में आपको पता चल जाएगा देश कितना विकास कर रहा है खराब सदके टूटे हुए पल खंडित पड़ी इमारतें झूठ कागजों में सिर्फ अस्पताल चल रहे हैं झूठ कागजों में स्कूल कई गांव में चल रहे हैं आप हालत देख रहे हैं ना शुद्ध पेयजल की व्यवस्था केवल नाम मात्र की टंकी बन गई हैं लेकिन जल व्यवस्था नहीं हो सकी है रास्ते इतने खराब की चलना भी मुश्किल है
ना नालियों की व्यवस्था न रोड़ों की व्यवस्था सड़क के इतनी खराब हो चुकी हैं की आए दिन दुर्घटना का भय बना रहता है फिर भी लोग और नेता सत्ताधारी पार्टी एक जुमला रहती है कि हमारा देश बहुत विकास कर रहा है हो सकता है कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का विकास हो रहा हो लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्थिति जस की 10 बनी हुई है कई ग्रामीण क्षेत्रों में ना तो सड़क है ना ही पीने के लिएशुद्ध
जल व्यवस्था है ना ही स्वास्थ्य व्यवस्था है ना ही शिक्षा की व्यवस्था है फिर भी कहते हैं हमारा देश बहुत तरक्की कर रहा है विकास कर रहा है ऐसा नहीं है हकीकत में जाकर देखें तो आज भी पिछड़ा हुआ पिछड़ा पर आपको मध्य प्रदेश के अंदर में ही कई ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल जाएगा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि ग्रामीण भारत का विकास हो ना हो लेकिन हमारे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का विकास जरूर हो रहा है अगर कोई कुछ कहता भी है तो उसको मुंह बंद कर दिया जाता है
आज भी आप ग्रामीण क्षेत्र की हालत देखेंगे तो कीचड़ से दलदल में शनि हुई सड़क आपको मिल जाएगी जहां पर गाड़ी घोड़े तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है नाली नहीं होने से रोड़ों पर गंदा पानी बहता रहता है जिसके कारण आए दिन विवाद की स्थिति भी ग्रामीण क्षेत्रों में बनी रहती है निजीकरण और प्राइवेट कंपनियों से कराए गए कामों को आज भी आप देखेंगे तो आपको हालत खराब दिखेंगे चंद मीना में ही सड़क पुल सब टूट जाते हैं जहां तक की बिल्डिंग अभी गिर जाती हैं
फिर भी सरकार को निजीकरण प्राइवेट कंपनियों को ठेका देने में क्या फायदा है यह तो वही जाने इस पर जनता कुछ नहीं कह सकती लेकिन आप वास्तव में देखेंगे तो यह कंपनी है सिर्फ अपना निजी स्वार्थ फायदा देखते हैं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की समस्याएं नहीं समझती हैं उन्हें सिर्फ अपना लाभ दिखता है लोगों का यह आरोप है
