ग्रामीणों ने पकड़ा चोर, पुलिस ने लिया खुलासे का श्रेय!
ठोकनबैड़ा चोरी में ग्रामीणों ने राहुल सावनेर को शिवना के पास पकड़ा, चोरी की पेटियां बरामद कर पुलिस को सौंपा; पुलिस प्रेस नोट में CCTV और मुखबिर के जरिए गिरफ्तारी का दावा
भीकनगांव। ठोकनबैड़ा में घर से दो पेटियां आभूषण और नकदी समेत चोरी होने के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर प्रकरण का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार मामले में आरोपी राहुल सावनेर तथा चोरी का माल खरीदने वाले प्रणव सोनी को गिरफ्तार किया गया है और करीब 2.40 लाख रुपये के आभूषण बरामद किए गए हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ग्रामीणों के दावे पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही उन्होंने चोरी के आरोपी को तलाश कर पकड़ लिया था और चोरी की पेटियां भी बरामद कर आरोपी को पुलिस के हवाले किया। दूसरी ओर, पुलिस के प्रेस नोट में आरोपी की गिरफ्तारी का श्रेय सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना को दिया गया है। इसी अंतर को लेकर अब पुलिस की कार्रवाई और प्रेस नोट में दर्ज घटनाक्रम पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने शुरू की चोर की तलाश
ग्रामीणों के मुताबिक ठोकनबैड़ा में चोरी की जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने स्वयं आरोपी की तलाश शुरू कर दी थी। इसी दौरान राहुल सावनेर के शिवना के पास होने की जानकारी मिली। ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर राहुल को पकड़ लिया।
ग्रामीणों का दावा है कि आरोपी से पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर खेत से चोरी की गई दो पेटियां और नकदी बरामद की गई। इसके बाद ग्रामीण आरोपी को पेटियां सिर पर रखवाकर शिवना तक लेकर आए। वहां से पिकअप वाहन के माध्यम से आरोपी और बरामद सामान को भीकनगांव लाया गया।
ग्रामीणों के अनुसार इस पूरी कार्रवाई के दौरान उनका उद्देश्य चोरी का सामान बरामद कर आरोपी को पुलिस के हवाले करना था।
ज्वेलर्स तक भी ग्रामीण ही लेकर पहुंचे
ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ में राहुल सावनेर ने चांदी के आभूषण झिरन्या रोड स्थित एक ज्वेलर्स को लगभग 97 हजार रुपये में बेचने की बात बताई। इसके बाद ग्रामीण आरोपी को लेकर संबंधित दुकान पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि शाम करीब 7.30 बजे ग्रामीण आरोपी को लेकर ज्वेलर्स की दुकान पर पहुंचे। यहां लगभग आधे घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। इसके बाद रात करीब 8.10 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर थाने ले गई।
ग्रामीणों के अनुसार इसके करीब एक घंटे बाद रात लगभग 9.15 बजे एफआईआर दर्ज की गई।
यहीं से पुलिस की कार्रवाई और ग्रामीणों के बताए घटनाक्रम में अंतर का मुद्दा सामने आता है।

एफआईआर में अज्ञात आरोपी, जबकि ग्रामीणों का दावा—आरोपी पुलिस के सामने
ग्रामीणों का कहना है कि जब राहुल सावनेर को पुलिस के सामने लाया जा चुका था और चोरी का सामान भी बरामद हो चुका था, तब एफआईआर में चोरी ‘अज्ञात आरोपी’ द्वारा किए जाने का उल्लेख क्यों किया गया?
ग्रामीणों का यह भी दावा है कि आरोपी को पुलिस के हवाले किए जाने से पहले ही उसकी पहचान सामने आ चुकी थी। ऐसे में एफआईआर में आरोपी को अज्ञात बताए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, इस संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष अलग है और पुलिस ने अपने प्रेस नोट में आरोपी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना से जोड़ते हुए बताया है।
प्रेस नोट में CCTV और मुखबिर से गिरफ्तारी का दावा
पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर राहुल सावनेर तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस ने मामले में चोरी का माल खरीदने वाले प्रणव सोनी की गिरफ्तारी और आभूषणों की बरामदगी की जानकारी भी दी है।
यहीं ग्रामीणों के दावे और पुलिस के आधिकारिक विवरण के बीच सबसे बड़ा अंतर सामने आता है।
ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी को उन्होंने स्वयं पकड़कर पुलिस को सौंपा था, जबकि पुलिस के प्रेस नोट में गिरफ्तारी की कार्रवाई का श्रेय पुलिस की जांच, सीसीटीवी और मुखबिर तंत्र को दिया गया है।
यदि ग्रामीणों का दावा सही है तो सवाल उठता है कि पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट में ग्रामीणों की भूमिका का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
आरोपी के न्यायालय में पेश होने के दावे पर भी सवाल
मामले में पुलिस के प्रेस नोट को लेकर एक और सवाल सामने आया है। प्रेस नोट में आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने की बात बताई गई है।
वहीं, जब आरक्षक अर्पित सिंह चौहान से आरोपी को न्यायालय में पेश करने का वीडियो मांगा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि आरोपियों को कल पेश करेंगे।
इस विरोधाभास ने मामले को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रेस नोट में न्यायालय में पेश किए जाने की जानकारी दर्ज थी, तो आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने का वीडियो मांगने पर अगले दिन पेश करने की बात क्यों कही गई?
इस बिंदु पर पुलिस की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।

घटनाक्रम के वीडियो होने का ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों और फरियादी के पास पूरे घटनाक्रम से संबंधित वीडियो होने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि आरोपी को पकड़े जाने, चोरी की पेटियां बरामद होने और उसे ग्रामीणों द्वारा पुलिस तक ले जाने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुए हैं।
यदि इन वीडियो की पुष्टि होती है और इनमें घटनाक्रम ग्रामीणों के दावे के अनुरूप दिखाई देता है, तो पुलिस प्रेस नोट में दर्ज गिरफ्तारी की कहानी पर सवाल और गंभीर हो सकते हैं।
हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उनकी पूरी परिस्थितियों की जांच आवश्यक है। इसलिए किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य मानने के बजाय पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी है।
थाना प्रभारी बोले—‘प्रेस नोट में सब लिखा है’
मामले को लेकर थाना प्रभारी बलराम राठौर से जब आरोपी को पकड़े जाने के घटनाक्रम और ग्रामीणों के दावे के संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि आरोपी को कब पकड़ा गया, इसकी जानकारी पुलिस के प्रेस नोट में स्पष्ट रूप से दी गई है।
थाना प्रभारी ने कहा, “मैं एक-एक मिनट का घटनाक्रम नहीं बता पाऊंगा। ग्रामीण क्या कहते हैं, इससे मुझे कोई मतलब नहीं।”
थाना प्रभारी के इस बयान के बाद ग्रामीणों द्वारा बताए गए घटनाक्रम और पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट के बीच अंतर को लेकर सवाल और गहरा गए हैं।
अब उठ रहे हैं ये सवाल
पूरे मामले में मुख्य सवाल यही है कि यदि ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा और चोरी की पेटियां भी बरामद कर पुलिस के हवाले कीं, तो पुलिस के प्रेस नोट में ग्रामीणों की भूमिका का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
दूसरा सवाल एफआईआर को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार आरोपी की पहचान और मौजूदगी पुलिस के सामने आ चुकी थी, फिर एफआईआर में आरोपी को अज्ञात क्यों बताया गया?
तीसरा सवाल प्रेस नोट में न्यायालय में पेश किए जाने की जानकारी और बाद में आरोपी को अगले दिन पेश किए जाने की बात के बीच दिखाई दे रहे अंतर को लेकर है।
इन सवालों का स्पष्ट जवाब पुलिस की ओर से सामने आना आवश्यक है, ताकि मामले में किसी तरह का भ्रम न रहे और पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा पूरा सच
ठोकनबैड़ा चोरी प्रकरण में पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी और चोरी का माल बरामद करने का दावा किया गया है। यह निश्चित रूप से जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्रवाई है। लेकिन गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पुलिस के प्रेस नोट में दर्ज विवरण को लेकर उठ रहे सवालों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों के पास मौजूद बताए जा रहे वीडियो, एफआईआर में दर्ज विवरण, पुलिस प्रेस नोट तथा आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अब देखने वाली बात यह है कि पुलिस और ग्रामीणों द्वारा बताए जा रहे घटनाक्रम में अंतर का वास्तविक कारण क्या है और इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई की आधिकारिक समयरेखा क्या रही।
नागरिकों की ओर से भी यही अपेक्षा है कि चोरी जैसे गंभीर मामले में पुलिस कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी रहे और वास्तविक घटनाक्रम तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर सामने आए।
