Vijay Shah vs Sofia Qureshi Case: मंत्री विजय शाह को बड़ी राहत, राज्यपाल ने अभियोजन मंजूरी न देने के कैबिनेट प्रस्ताव पर लगाई मुहर
Vijay Shah vs Sofia Qureshi Case: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच पूरी होने के बाद अभियोजन चलाने की मंजूरी का मुद्दा राज्यपाल के पास पहुंचा था। अब राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मध्य प्रदेश कैबिनेट के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी।
इस फैसले के बाद विजय शाह के खिलाफ इस मामले में आगे अभियोजन चलाने की राह फिलहाल रुक गई है। हालांकि, मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन रहा है और अदालत ने हालिया सुनवाई में राज्यपाल को निर्णय लेने का अवसर देने की बात कही थी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
Vijay Shah से जुड़े इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए गठित SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है। अभियोजन चलाने की मंजूरी से संबंधित प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा गया है और इस पर जल्द निर्णय होने की उम्मीद है।
अदालत को बताया गया कि मंजूरी मिलने के बाद ही मामले में आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर अभियोजन मंजूरी के मामले में हस्तक्षेप करने के बजाय संबंधित प्राधिकारी को निर्णय लेने का अवसर दिया।
राज्यपाल के फैसले पर टिकी थीं निगाहें
SIT की जांच पूरी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी दी जाएगी या नहीं। 25 अगस्त को मध्य प्रदेश कैबिनेट ने अभियोजन की मंजूरी नहीं देने का फैसला किया था। इसके बाद प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा गया।
31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भी राज्य सरकार ने बताया था कि मामला राज्यपाल के स्तर पर लंबित है। अदालत ने राज्यपाल को इस विषय पर फैसला लेने का समय देने की बात कही थी।
इसके बाद सोमवार देर रात राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने कैबिनेट के प्रस्ताव पर सहमति दे दी। इस तरह विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति नहीं देने का रास्ता साफ हो गया।
अगर अभियोजन की मंजूरी मिलती तो क्या होता?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी जानना चाहा था कि अभियोजन की मंजूरी मिलने या नहीं मिलने की स्थिति में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी।
सरकार की ओर से बताया गया था कि यदि अभियोजन की मंजूरी मिलती है तो जांच के आधार पर चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। वहीं मंजूरी नहीं मिलने की स्थिति में मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की संभावना होगी।
अब राज्यपाल की ओर से कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया इसी निर्णय के आधार पर आगे बढ़ेगी।
Vijay Shah ने क्या कहा था?
यह पूरा विवाद मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुआ था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित सैन्य कार्रवाई की जानकारी मीडिया को दी थी। इसके बाद 11 मई 2025 को महू में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। विपक्षी दलों ने मंत्री के बयान को भारतीय सेना और महिला सैन्य अधिकारी का अपमान बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी।
विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी। बाद में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई और मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 14 मई 2025 को विजय शाह की टिप्पणी का स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद इंदौर जिले के मानपुर थाने में मामला दर्ज किया गया। हाई कोर्ट ने जांच की निगरानी भी की थी।
इसके बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 19 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी और मामले की जांच के लिए तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की SIT गठित करने का निर्देश दिया। शाह को जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा गया था।
अब आगे क्या होगा?
SIT की जांच पूरी हो चुकी है और अभियोजन मंजूरी का मुद्दा राज्य सरकार तथा राज्यपाल के स्तर तक पहुंचा। अब राज्यपाल की ओर से कैबिनेट के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद विजय शाह को इस मामले में फिलहाल राहत मिली है।
हालांकि, पूरे मामले की कानूनी स्थिति और आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी रहेगी, क्योंकि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक बयानों, सेना से जुड़े संवेदनशील मामलों और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर बहस तेज कर दी है।
