विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन मंजूरी पर हस्तक्षेप से किया इनकार, राज्यपाल के फैसले का इंतजार
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी का मामला; SIT की जांच पूरी, मंजूरी मिली तो चार्जशीट और नहीं मिली तो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होगी
नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी से जुड़े मामले में सोमवार, 31 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT अपनी जांच पूरी कर चुका है, लेकिन मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी का प्रश्न अभी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित है। राज्य सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि अभियोजन मंजूरी से संबंधित प्रस्ताव राज्यपाल के स्तर पर विचाराधीन है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अभियोजन मंजूरी के मामले में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेने का अवसर देने की बात कही। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आगे की कानूनी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि अभियोजन की मंजूरी दी जाती है या नहीं। SIT की जांच पूरी, रिपोर्ट सीलबंद
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि SIT की जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद रखी गई है क्योंकि अभियोजन मंजूरी का फैसला अभी लंबित है।
अदालत को यह भी बताया गया कि मंजूरी मिलते ही जांच एजेंसी सक्षम अदालत के समक्ष चार्जशीट पेश कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की स्थिति और मंजूरी के बाद आगे अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर भी सवाल किए।
राज्यपाल को फैसला लेने का मौका देना चाहिए: कोर्ट
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि राज्यपाल को इस मामले पर फैसला लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी इस बात पर जोर दिया कि जांच रिपोर्ट अंततः सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ही जानी है।
अदालत ने इस चरण पर अभियोजन मंजूरी के मुद्दे में हस्तक्षेप नहीं किया और मामले को सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद आगे बढ़ाने का संकेत दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य सरकार की सिफारिश राज्यपाल के समक्ष लंबित है।
मंजूरी नहीं मिली तो लगेगी क्लोजर रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी पूछा कि अगर मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं दी जाती है तो जांच एजेंसी का अगला कदम क्या होगा।
इसके जवाब में सरकार की ओर से बताया गया कि यदि अभियोजन की अनुमति मिलती है तो चार्जशीट दाखिल की जाएगी। वहीं अगर सक्षम प्राधिकारी अभियोजन की मंजूरी नहीं देता है तो जांच एजेंसी संबंधित अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश करेगी। इस जवाब के बाद अदालत ने फिलहाल मंजूरी पर निर्णय का इंतजार करने की बात कही।
विजय शाह की ओर से सार्वजनिक माफी का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने उनकी सार्वजनिक माफी का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा। उन्होंने कहा कि शाह ने विवादित टिप्पणी के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और अभियोजन मंजूरी पर विचार करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कोई निर्देश देने से परहेज किया और यह निर्णय सक्षम प्राधिकारी पर छोड़ दिया। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस स्तर पर यह नहीं बताएगी कि मंजूरी पर विचार करते समय किन पहलुओं को कितनी अहमियत दी जाए।
क्या है कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़ा मामला?
यह मामला मई 2025 में मध्यप्रदेश के महू में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए विजय शाह के बयान से जुड़ा है। शाह की टिप्पणी को कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में आपत्तिजनक माना गया था।
कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की उन अधिकारियों में शामिल थीं जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मीडिया ब्रीफिंग की थी। मंत्री की टिप्पणी सामने आने के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद खड़ा हो गया था।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर FIR के दिए थे निर्देश
मंत्री के बयान का मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंचा था। हाईकोर्ट ने मई 2025 में स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2025 को शाह को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था, लेकिन साथ ही उनकी टिप्पणी पर गंभीर नाराजगी भी व्यक्त की थी। शीर्ष अदालत ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए SIT गठित करने का निर्देश दिया था।
पहले भी अभियोजन मंजूरी में देरी पर सवाल उठा चुका है सुप्रीम कोर्ट
यह पहला मौका नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट के सामने अभियोजन मंजूरी की देरी का मामला आया है। मई 2026 में भी शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार से इस प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर सवाल किए थे।
बाद में भी अभियोजन की मंजूरी का मुद्दा लंबित रहा। अब SIT की जांच पूरी होने के बाद मामले की आगे की दिशा मुख्य रूप से सक्षम प्राधिकारी के फैसले पर निर्भर है।
मंजूरी मिली तो आगे बढ़ेगा मुकदमा
मौजूदा स्थिति में इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अभियोजन की मंजूरी है। यदि राज्यपाल स्तर से मंजूरी मिलती है तो SIT अपनी जांच के आधार पर सक्षम न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर सकेगी और उसके बाद मामले की नियमित न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इसके विपरीत अगर अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलती है तो जांच एजेंसी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करेगी। ऐसे में मामला किस दिशा में जाएगा, यह सक्षम अदालत के निर्णय और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं मंजूरी देने या इस संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। अदालत ने राज्यपाल के स्तर पर लंबित निर्णय का इंतजार करने का रुख अपनाया है। इसलिए इस मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम अभियोजन की मंजूरी पर होने वाला फैसला होगा।इस खबर का अगला अपडेट अभियोजन मंजूरी पर राज्यपाल के फैसले के बाद महत्वपूर्ण होगा।
