—Advertisement—

MP विजय शाह मामले में बढ़ा सियासी और कानूनी विवाद, कांग्रेस ने सरकार को घेरा; राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजर

Author Picture
Published On: 27 August 2026
MP
— मंत्री विजय शाह को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी और कानूनी विवाद बढ़ गया

—Advertisement—

MP विजय शाह मामले में बढ़ा सियासी और कानूनी विवाद, कांग्रेस ने सरकार को घेरा; राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजर

भोपाल। MP में मंत्री विजय शाह को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के मुद्दे पर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है, जबकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल को पत्र भेजकर मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने की अपील की है।

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार मंत्री विजय शाह को बचाने की कोशिश कर रही है और इस पूरे मामले में संवैधानिक तथा न्यायिक व्यवस्था की गरिमा से समझौता किया जा रहा है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि क्या किसी मंत्री या सत्ता में बैठे व्यक्ति के लिए कानून की अलग व्यवस्था हो सकती है।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

MP कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा कि विजय शाह से जुड़े मामले में संवैधानिक और न्यायिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप कार्रवाई नहीं करती है, तो ऐसी स्थिति में पूरी सरकार को बर्खास्त करने पर विचार होना चाहिए।

पटवारी ने प्रधानमंत्री से भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के सामने बताना चाहिए कि वह मंत्री विजय शाह से जुड़े मामले में राज्य सरकार के निर्णय से सहमत हैं या नहीं।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं है। भारतीय सेना का सम्मान देश के करोड़ों नागरिकों के राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है।

उमंग सिंघार ने राज्यपाल से मांगी कार्रवाई

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को लेकर सरकार का रुख निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने और अभियोजन की अनुमति देने की मांग की है।

सिंघार ने सवाल उठाया कि यदि जांच एजेंसी की ओर से अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है, तो सरकार की ओर से इसे रोका क्यों जा रहा है। उनका कहना है कि मंत्री पद किसी व्यक्ति को कानून से अलग नहीं करता।

कांग्रेस का आरोप है कि विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पार्टी का कहना है कि इस टिप्पणी से एक महिला सैन्य अधिकारी की गरिमा के साथ-साथ भारतीय सेना के सम्मान को भी ठेस पहुंची।

कानूनी मोर्चे पर भी बढ़ी हलचल

मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ कानूनी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने विजय शाह के खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना याचिका की तैयारी शुरू कर दी है। वह इस मामले से जुड़े मूल प्रकरण में पहले ही सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप कर चुके हैं।

अधिवक्ता का कहना है कि न्यायिक आदेशों के बावजूद यदि सरकार मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी से संबंधित कार्रवाई रोकती है, तो यह गंभीर कानूनी सवाल पैदा करता है। उनके मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को ‘कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड’ का दर्जा प्राप्त है।

उनका तर्क है कि अदालत के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी होने पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है और इसके लिए संबंधित सक्षम अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

अनुच्छेद 14 का भी हवाला

वरिष्ठ अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन स्वीकृति की व्यवस्था किसी व्यक्ति को कानून से बचाने के लिए सुरक्षा कवच नहीं बन सकती। उनका कहना है कि यदि राजनीतिक दबाव के कारण अभियोजन की अनुमति से जुड़ा फैसला टाला जाता है, तो यह समानता के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ हो सकता है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियोजन स्वीकृति के मामले में सरकार को निष्पक्ष और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लेना चाहिए।

अधिवक्ता के अनुसार, मंत्री भी लोक सेवक के दायरे में आते हैं। यदि मंत्रिपरिषद का निर्णय पक्षपातपूर्ण पाया जाता है, तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

BNSS की धारा 218 पर भी चर्चा

विजय शाह मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 218 का भी उल्लेख किया गया है। कानूनी पक्ष से यह तर्क दिया जा रहा है कि अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मामलों में निर्धारित समयसीमा और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

हालांकि, इस प्रावधान की व्याख्या और इसका मौजूदा मामले पर सीधा प्रभाव अदालत के अंतिम निर्णय और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए इस संबंध में अंतिम स्थिति न्यायिक कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।

विवेक तन्खा ने कैबिनेट के अधिकार पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी सरकार के निर्णय पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि विजय शाह के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने या नहीं देने का फैसला केवल कैबिनेट के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं माना जा सकता।

तन्खा ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की मंशा और न्यायिक प्रक्रिया को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि अब राज्यपाल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

31 अगस्त की सुनवाई पर नजर

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से कैबिनेट के फैसले को राज्यपाल के पास भेजे जाने की संभावना है। इसके बाद अवकाश के कारण कुछ दिनों का अंतर रहेगा और 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई प्रस्तावित है।

बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से मंत्री विजय शाह के वकील को भी मामले में हुई कार्रवाई और सरकार के फैसले की जानकारी दी जाएगी, ताकि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सरकार अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके।

फिलहाल विजय शाह प्रकरण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और कानूनी बहस का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस लगातार सरकार पर मंत्री को संरक्षण देने का आरोप लगा रही है, जबकि कानूनी पक्ष से अभियोजन मंजूरी और न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब पूरे मामले में राज्यपाल के संभावित निर्णय और 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार का फैसला किस दिशा में जाता है और विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है या नहीं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp