प्रकाशनार्थ
श्री राजस्थान Jain संघ, पुणे में 150 वर्षीतप पारणा महोत्सव का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन
पुणे (निप्र)। सोमवार पेठ स्थित श्री आदिनाथ भगवान के दिव्य सान्निध्य में श्री राजस्थानी Jain संघ के तत्वावधान में 150 वर्षीतप आराधकों के पारणा के उपलक्ष्य में पंचाह्निका महोत्सव का भव्य, धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है। यह पांच दिवसीय महोत्सव 17 अप्रैल से 21 अप्रैल तक विविध धार्मिक कार्यक्रमों, महापूजन, प्रवचन, स्वामिवात्सल्य एवं पारणा महोत्सव के साथ श्रद्धा, भक्ति और तपस्या के अद्भुत वातावरण में संपन्न होगा।
यह आयोजन जैन समाज की तप, संयम और साधना की परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, तपस्वी एवं धर्मप्रेमी जन सहभागिता कर रहे हैं।
पंचाह्निका महोत्सव का विस्तृत आयोजन
संघ द्वारा जानकारी दी गई कि इस पंचाह्निका महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातःकालीन एवं सांध्यकालीन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें विशेष रूप से महापूजन, आरती, प्रवचन, तपस्वियों का अनुमोदन, स्वामिवात्सल्य एवं विविध धार्मिक अनुष्ठान शामिल रहेंगे।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 150 वर्षीतप आराधकों का पारणा महोत्सव है, जो जैन धर्म की कठिनतम साधनाओं में से एक वर्षीतप की पूर्णता का प्रतीक है। इस अवसर पर संपूर्ण वातावरण धर्ममय, शांत एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहेगा।
गुरु भगवंतों एवं साधु-साध्वी भगवंतों का पावन सान्निध्य
इस भव्य आयोजन में अनेक परम पूज्य गुरु भगवंतों एवं साधु-साध्वी मंडल का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा।
पंजाब केसरी श्री विजय वल्लभ सूरीश्वरजी समुदाय के परम पूज्य श्रुत भास्कर गच्छाधिपति आचार्य श्री धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी म.सा., गणिवर्य श्री धर्मराज विजयजी म.सा., मुनि श्री ऋषभचंद्र विजयजी म.सा., मुनि श्री धर्मकीर्ति विजयजी म.सा., विश्वेन्द्र विजयजी म.सा., मुनि श्री धर्मबोधी विजयजी म.सा., मुनि श्री महाभद्र विजयजी म.सा., मुनि श्री अक्षयरत्न विजयजी म.सा., मुनि श्री तत्वदर्शन विजयजी म.सा., मुनि श्री मनमोहन विजयजी म.सा. सहित अनेक साधु भगवंतों की पावन उपस्थिति रहेगी।
इसके अतिरिक्त साध्वी श्री नयप्रज्ञा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा तथा आगमोद्वारक सागर समुदायवर्ती परम पूज्य आचार्य श्री नरदेवसागर सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्ती परम पूज्या हेमप्रियदर्शना श्रीजी म.सा. की शिष्या-महाशिष्या मुक्तिदर्शना श्रीजी म.सा. सहित विशाल साधु-साध्वी मंडल की उपस्थिति भी इस आयोजन को अत्यंत पावन बनाएगी।
वर्षीतप आराधकों की तपस्या और साधना
इस महोत्सव में भाग लेने वाले वर्षीतप आराधक अपने कठोर तप, संयम और आत्मशुद्धि की साधना के माध्यम से जैन धर्म की महान परंपरा का पालन कर रहे हैं। इनमें हेमदर्शना श्रीजी म.सा., मल्लीदर्शना श्रीजी म.सा., गोयमदर्शना श्रीजी म.सा. सहित अनेक तपस्वी आराधक सम्मिलित हैं।
इनकी वर्षभर की साधना केवल उपवास तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मसंयम, मनोविजय और कर्मक्षय की दिशा में एक गहन आध्यात्मिक यात्रा रही है, जो इस पारणा महोत्सव के साथ पूर्णता को प्राप्त करेगी।
पारणा महोत्सव के प्रमुख लाभार्थी परिवार
इस भव्य आयोजन के विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों एवं पारणा महोत्सव के लाभार्थी अनेक श्रद्धालु परिवार रहे हैं, जिनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक है।
इनमें प्रमुख रूप से—
- अ. सौ. सज्जनबाई पूनमचंद कोठारी (बिशनगढ़)
- स्व. मेथीबाई भीकमचंदजी परमार (परमार ज्वेलर्स, सेवाड़ी)
- अ. सौ. लिलाबाई सरेमलजी वरदीचंदजी चोपड़ा (बाली)
- ताराबेन विजयराजजी प्रेमचंदजी सोनीगरा (रानी स्टेशन)
- उषा सुरेश पुनमिया एवं ललिता जितेन्द्र पुनमिया (डब्बावाला/सादड़ी)
- शिल्पा व विजयराज केशरीमलजी सोनैया परिवार
- स्व. धनीबाई लालचंदजी नागोत्रा सोलंकी (नोवी)
- संतोष गणेश छाजेड़ एवं स्व. पानीबाई छाजेड़ (दुठारिया)
- स्व. विरोबाई जवानमलजी ढेलडिया बोहरा (भवरानी)
- संघवी स्व. सरेमलजी भानमलजी केवलसा मुथा परिवार (जोयला)
- ललितराजजी पटणी (घाणेराव)
- फैंसीबाई घेवरचंदजी सिसोदिया राणावत (आलपा)
- संघवी वर्षाबेन दिलीपजी मर्लेचा (खिमेल)
- लीलाबाई पारसमलजी मियाचंदजी पालरेचा (पालड़ी जोड़)
- भंवरीबाई पारसमलजी मेहता (बुसी) सहित अन्य अनेक लाभार्थी परिवार।
इन सभी परिवारों द्वारा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का लाभ लेकर समाज में धर्म प्रभावना बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
संघ के पदाधिकारी एवं आयोजन समिति
श्री संघ के पदाधिकारियों एवं आयोजन समिति द्वारा पूरे महोत्सव की व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित एवं अनुशासित ढंग से की जा रही है।
पदाधिकारियों में बाबूलाल सोलंकी, तेजराज सोलंकी, प्रकाश बाफना, राजेंद्र सोलंकी, निर्मल परमार, सोहनराज रांका, विजयराज पोरवाल, उगम मेहता, रमेश छाजेड़ शामिल हैं।
समिति सदस्यों में मंगेश पालरेचा, प्रवीण चोपड़ा, रमेश सोलंकी, अशोक परमार, भरत राठौड़ एवं ललित परमार आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सभी कार्यकर्ता मिलकर इस महोत्सव को सफल एवं ऐतिहासिक बनाने में जुटे हुए हैं।
आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेश
यह पंचाह्निका महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जैन धर्म की गहरी तपस्या परंपरा, संयम और आत्मकल्याण का जीवंत उदाहरण है। वर्षीतप आराधकों का यह पारणा इस बात का प्रतीक है कि कठोर साधना, आत्मविश्वास और गुरु कृपा से किसी भी आध्यात्मिक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
इस प्रकार के आयोजन समाज में धर्म, एकता, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को संस्कारों से जोड़ते हैं।
निष्कर्ष
श्री राजस्थान जैन संघ, पुणे द्वारा आयोजित यह 150 वर्षीतप पारणा महोत्सव एक ऐतिहासिक, धार्मिक एवं अत्यंत पुण्यदायी आयोजन सिद्ध हो रहा है। यह महोत्सव न केवल तपस्वियों के साधना जीवन का उत्सव है, बल्कि संपूर्ण जैन समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय भी है।
आगामी दिनों में यह आयोजन जैन धर्म की तप, त्याग और संयम की परंपरा को और अधिक सशक्त करेगा तथा समाज में आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश फैलाएगा।
