व्यावहारिक शिक्षण के साथ नैतिक संस्कारों की महती आवश्यकता
121 दिवसीय ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविर का पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न, शिविरार्थियों को किया सम्मानित
इंदौर। व्यावहारिक शिक्षण के साथ बच्चों में नैतिक संस्कारों का विकास होना आज के समय की महती आवश्यकता है। भौतिक शिक्षा व्यक्ति को आजीविका चलाने में सक्षम बना सकती है, लेकिन आत्मिक शांति और संतोष के लिए नैतिक एवं धार्मिक संस्कारों का होना जरूरी है। बच्चों में बचपन से ही नैतिक संस्कारों के बीजारोपण से उनमें अच्छे विचारों और सद्गुणों का विकास होता है, जिससे वे भविष्य में अच्छे नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासती डॉ. कुमुदलताजी म. सा. ने श्री महावीर जैन स्वाध्याय शाला, इंदौर द्वारा आयोजित 121 दिवसीय ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविर के पुरस्कार वितरण समारोह में व्यक्त किए। समारोह का आयोजन नरसिंह वाटिका, एरोड्रम रोड, इंदौर में किया गया। इस अवसर पर शिविर में भाग लेने वाले बच्चों को उनकी धार्मिक शिक्षा, अध्ययन और विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
महासती डॉ. कुमुदलताजी म. सा. ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। बच्चे आधुनिक और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो उनके भविष्य के लिए आवश्यक है, लेकिन केवल भौतिक शिक्षा ही जीवन को पूर्ण नहीं बनाती। व्यक्ति के जीवन में नैतिकता, अनुशासन, संयम, सेवा, करुणा और सदाचार जैसे गुणों का होना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के मन को संस्कारों की भूमि माना जा सकता है। बचपन में जो संस्कार दिए जाते हैं, उनका प्रभाव व्यक्ति के पूरे जीवन पर पड़ता है। यदि बच्चों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा के माध्यम से अच्छे संस्कार दिए जाएं तो उनमें जिम्मेदारी, अनुशासन और समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होती है।
उन्होंने धार्मिक शिक्षण शिविरों को इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति, धर्म और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। धार्मिक शिक्षा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को जीवन जीने की सही दिशा भी प्रदान करती है।

मंगलाचरण एवं सुमधुर गीत से हुआ समारोह का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर साम्राज्ञी महासती डॉ. महाप्रज्ञाजी म. सा. के मंगलाचरण एवं सुमधुर गीत से हुआ। उनके मंगलाचरण से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं और शिविरार्थियों ने धार्मिक भाव के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।
इसके बाद महासती डॉ. पदमकीर्तिजी म. सा. ने सुखविपाक सूत्र की व्याख्या की। उन्होंने धार्मिक शिक्षाओं और जीवन में उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर आत्मचिंतन, सदाचार और सकारात्मक जीवन दृष्टि का विकास करना है।
इस अवसर पर महासती डॉ. राजकीर्तिजी म. सा. ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ अच्छे आचरण और संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। संतों के मार्गदर्शन से शिविरार्थियों को धर्म और जीवन मूल्यों से संबंधित महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिला।
121 दिवसीय शिविर में बच्चों ने लिया उत्साह से भाग
श्री महावीर जैन स्वाध्याय शाला, इंदौर द्वारा आयोजित 121 दिवसीय ग्रीष्मकालीन धार्मिक शिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में बच्चों ने भाग लिया। शिविर के दौरान बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ विभिन्न धार्मिक सूत्रों, सिद्धांतों और संस्कारों का अध्ययन कराया गया।
शिविर का उद्देश्य बच्चों को धर्म एवं संस्कृति से जोड़ना तथा उनके भीतर अच्छे संस्कारों का विकास करना रहा। लंबे समय तक चले इस शिक्षण कार्यक्रम में बच्चों ने नियमित रूप से भाग लेकर अपनी रुचि और लगन का परिचय दिया।
शिविर में बच्चों को धार्मिक अध्ययन के साथ सामयिक, नवतत्व सहित विभिन्न विषयों का ज्ञान प्रदान किया गया। बच्चों को धार्मिक पाठों को समझने और उन्हें कंठस्थ करने के लिए भी प्रेरित किया गया। शिविर के दौरान बच्चों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के माध्यम से शिक्षकों तथा अभिभावकों का उत्साह बढ़ाया।
विशेष उपलब्धियों के लिए बच्चों को सम्मान
पुरस्कार वितरण समारोह में शिविर में भाग लेने वाले सभी शिविरार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के लिए उनकी उपलब्धियों के आधार पर विशेष पुरस्कार भी दिए गए।
विशेष रूप से सामयिक और नवतत्व कंठस्थ करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा मात्र 8 वर्ष की आयु में प्रतिक्रमण कंठस्थ करने वाले शिविरार्थी नक्ष मेहता को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। नक्ष मेहता की इस उपलब्धि की उपस्थितजनों ने सराहना की और उसे अन्य बच्चों के लिए प्रेरणादायक बताया।
आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार बच्चों की प्रतिभा और मेहनत को सम्मानित करने से उनमें धार्मिक अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ती है। पुरस्कार केवल उपलब्धि का सम्मान नहीं होते, बल्कि वे बच्चों को भविष्य में और बेहतर प्रयास करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।

शिविर के शिक्षकों का भी किया सम्मान
शिविर को सफल बनाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्चों को नियमित रूप से धार्मिक शिक्षा प्रदान करने और उन्हें विभिन्न विषयों का अध्ययन कराने वाली श्रीमती दक्षाजी पुंगलिया का भी स्वाध्याय शाला की ओर से सम्मान किया गया।
शिक्षिका के रूप में उनकी सेवाओं के लिए अंशुल मंडलिक, गर्वित बोड़ाना, राहुल तांतेड़, राकेश चोपड़ा, अखिलेश नाहर, अशोक भंडारी, नरेंद्र भंडारी, विश्वास कर्णावट, घनश्याम जैन और मयंक भटेवरा सहित अन्य सदस्यों ने उनका सम्मान किया।
आयोजकों ने कहा कि किसी भी शिक्षण शिविर की सफलता के पीछे शिक्षकों की मेहनत और समर्पण महत्वपूर्ण होता है। बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कार और अनुशासन की सीख देने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
मुख्य अतिथि का स्वागत
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं धार्मिक शिक्षण शिविर के पुरस्कारों के लाभार्थी श्री कीर्तिकुमारजी एवं श्रीमती मंजूजी झांझरिया (झांझरिया ज्वेलर्स) का स्वाध्याय शाला की ओर से स्वागत किया गया।
स्वागत करने वालों में स्वाध्याय शाला के अध्यक्ष गजेंद्र तांतेड़, महामंत्री अभिषेक नाहर, राजेंद्र छिंगावत, प्रकाश कोठारी, नगीन नारेलिया, गजेंद्र बोड़ाना, प्रकाश रंगावत, राजेश भंडारी, महावीर धाकड़, दक्षा पुंगलिया, हर्षा तांतेड़, भावना नाहर, मंजू भंडारी, मधु मंडलिक और आजाद नारेलिया सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल रहे।
समारोह में उपस्थित अतिथियों और समाजजनों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें आगे भी धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
धर्म और संस्कारों से जुड़ रहे बच्चे
121 दिवसीय धार्मिक शिक्षण शिविर के माध्यम से बच्चों को लंबे समय तक धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। इस प्रकार के शिविर बच्चों को मोबाइल और डिजिटल दुनिया से कुछ समय दूर रहकर अध्ययन, चिंतन और संस्कारों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
आयोजकों के अनुसार बच्चों में धार्मिक शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें अपने धर्म एवं संस्कृति की जानकारी देना शिविर का प्रमुख उद्देश्य रहा। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ शिविर की गतिविधियों में भाग लिया।
कार्यक्रम में मौजूद समाजजनों ने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यदि बच्चों में प्रारंभ से ही सत्य, अहिंसा, संयम, सेवा, सदाचार और अनुशासन जैसे गुण विकसित किए जाएं तो वे आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
समाजजनों की रही विशेष उपस्थिति
समारोह में रमेश भंडारी, विमल तांतेड़, प्रकाश भटेवरा, अभय झेलावत, हेमंत बोहरा और राजकुमार जैन सहित अनेक समाजजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक शिक्षण शिविर की गतिविधियों और बच्चों की उपलब्धियों की सराहना की।
कार्यक्रम का संचालन जिनेश्वर जैन ने किया। उन्होंने समारोह की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया। अंत में अशोक मंडलिक ने उपस्थित सभी अतिथियों, संतों, समाजजनों, शिक्षकों, शिविरार्थियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की जानकारी श्री महावीर जैन स्वाध्याय शाला के महामंत्री अभिषेक नाहर ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
धार्मिक शिक्षण शिविर के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह ने बच्चों की प्रतिभा के साथ-साथ संस्कारों की महत्ता को भी सामने रखा। समारोह में संतों के संदेश और बच्चों की उपलब्धियों ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक एवं धार्मिक संस्कारों का समन्वय ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन सकता है।
भवदीय
अभिषेक नाहर
महामंत्री
9826825180
श्री महावीर जैन स्वाध्याय शाला, इंदौर
