ग्वालियर में पर्युषण महापर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने किया पूजन, भगवान जिनेंद्र को समर्पित किए महाअर्घ्य
ग्वालियर। आत्म साधना वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज के तत्वावधान में पर्युषण महापर्व के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को पर्व के छठवें दिन दाना ओली स्थित दिगंबर बीस पंथी चंपाबाग जैन मंदिर में आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। इस दौरान जैन समाज के श्रद्धालुओं ने दश लक्षण पूजन में भगवान जिनेंद्र के समक्ष महाअर्घ्य समर्पित कर भक्ति भाव से पूजा-अर्चना की।
मंगलवार, 22 सितंबर को पर्युषण महापर्व के अंतर्गत उत्तम तप धर्म की पूजन एवं आराधना की जाएगी।
अभिषेक, शांतिधारा और संगीतमय पूजन
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के मार्गदर्शन में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ कलशों से भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया। इस दौरान भगवान के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
आचार्य श्री के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ भगवान जिनेंद्र की बृहद शांतिधारा की गई। इसके बाद दश लक्षण महामंडल पूजन में उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। जैन समाज की महिलाओं, पुरुषों और बालिकाओं ने संगीतमय भक्ति एवं नृत्य के साथ अष्टद्रव्य से पूजन-अर्चना की और भगवान जिनेंद्र के समक्ष महाअर्घ्य अर्पित किए।
ग्वालियर के 80 जैन मंदिरों में सुगंध दशमी की आराधना
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के छठवें दिन सुगंध दशमी के अवसर पर ग्वालियर शहर के लगभग 80 जैन मंदिरों को सजाया गया। जैन समाज के श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों में पहुंचे और भगवान जिनेंद्र के चरणों में नमन कर सुगंधित धूप अर्पित की।
सुगंध दशमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष धार्मिक वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और संयम एवं धार्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

संयम के बिना जीवन अधूरा: आचार्य श्री
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जब तक व्यक्ति त्याग और संयम को अपने जीवन का आदर्श नहीं बनाएगा तथा अपनी जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन नहीं करेगा, तब तक वह मोक्ष मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि उत्तम संयम का मार्ग कठिन अवश्य है, लेकिन यह मनुष्य के जीवन को सार्थक बनाने वाला मार्ग है।
आचार्य श्री ने संयम के महत्व को समझाते हुए कहा कि मनुष्य ही संयम धारण करने में सक्षम है। उन्होंने जीवन में संयम की तुलना ब्रेक वाली गाड़ी से करते हुए कहा कि संयम के बिना मनुष्य का जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी के समान हो जाता है। संयम को जीवन का श्रृंगार बताते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मसंयम, त्याग और धार्मिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त होता है, इसलिए इसका सदुपयोग आत्मसाधना और संयम के मार्ग पर चलकर करना चाहिए। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुने और धार्मिक आराधना में सहभागिता की।
