अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% आयात शुल्क का भारतीय निर्यात पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है, लेकिन मोदी सरकार की रणनीति ने इस झटके को बड़े स्तर पर संभाल लिया। इसका सकारात्मक प्रभाव GDP Growth के रिकॉर्ड आंकड़ों में साफ दिखा है।
टैरिफ से कितना बड़ा नुकसान हुआ?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, लेकिन 50% टैरिफ लगने से एक्सपोर्ट में भारी गिरावट देखी गई।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार—
- मई में अमेरिका को भारत का निर्यात 8.83 अरब डॉलर था
- जो अक्टूबर में घटकर 6.31 अरब डॉलर रह गया
- यानी सिर्फ 5 महीनों में 28.5% की गिरावट
ट्रंप ने 2 अप्रैल को पहले 10% टैरिफ लगाया, फिर 7 अगस्त को इसे 25% किया और 27 अगस्त को बढ़ाकर 50% कर दिया—इसके बाद गिरावट और तेज हो गई।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि—
- चीन पर अमेरिकी टैरिफ 30%
- जापान पर सिर्फ 15%
- जबकि भारत पर सबसे ज्यादा 50% लगाया गया।
स्मार्टफोन, पेट्रोलियम और फार्मा जैसे टैरिफ-फ्री सेक्टर भी इससे अछूते नहीं रहे और इनमें 25.8% की कमी दर्ज की गई।
निर्यात घटा, लेकिन GDP क्यों नहीं गिरी?
भारी नुकसान के बावजूद भारत की दूसरी तिमाही की GDP Growth 8.2% रही—जो उम्मीद से कहीं बेहतर और लगातार दूसरी बार मजबूत प्रदर्शन है।
सवाल यह है कि इतना बड़ा टैरिफ झटका झेलने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से कैसे बढ़ी?
इसका जवाब है भारत की सफल रणनीति—Diversification Strategy
सितंबर में जब अमेरिका को निर्यात 11.9% गिरा, उसी महीने भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ गया।
कैसे?

उदाहरण—जेम्स & ज्वेलरी सेक्टर
- अमेरिका को निर्यात 76% गिरा
- लेकिन UAE, हांगकांग और बेल्जियम को निर्यात बढ़ा
- नतीजा—कुल निर्यात सिर्फ 1.5% ही कम हुआ
यही रणनीति बाकी सेक्टर्स ने भी अपनाई।
ऑटो पार्ट्स के लिए जर्मनी और थाईलैंड जैसे बाजारों से बड़ी मांग मिली।
मोदी सरकार के त्वरित कदम जो गेम-चेंजर साबित हुए
सरकार ने अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए—
- नए बाजारों में निर्यात को बढ़ावा
- निवेश आकर्षित करने के लिए सुधार
- GST सुधारों से घरेलू मांग में वृद्धि
- मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को मजबूत समर्थन
इन सभी उपायों का सामूहिक परिणाम रहा कि—
- घरेलू मांग बढ़ी
- निवेश में तेजी आई
- और अर्थव्यवस्था की गति टैरिफ झटके के बावजूद मजबूत बनी रही
