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US-Iran युद्ध के चलते भारत में विमान किराया बढ़ा, कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द

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Published On: 3 March 2026
US-Iran War Causes Surge in Airfare in India, Several International Flights Canceled
— US-Iran War Causes Surge in Airfare in India, Several International Flights Canceled

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US-Iran युद्ध का भारत पर असर: विमान किराया बढ़ा और उड़ानें रद्द

मिडिल ईस्ट में US-Iran के बीच जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया के एयर ट्रैफिक पर दिख रहा है। इस विवाद ने भारत में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर गंभीर प्रभाव डाला है। कई प्रमुख रूट्स के लिए टिकट की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं, जबकि कुछ उड़ानें पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं। यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है।

लंदन-मुंबई रूट पर उछाल

भारत और यूरोप के बीच प्रमुख रूट्स जैसे लंदन–मुंबई की उड़ानें काफी महंगी हो गई हैं। यूरोपियन एयरलाइंस की डायरेक्ट फ्लाइट का इकोनॉमी क्लास का किराया अब 2.9 लाख रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, बिजनेस क्लास का किराया 9 लाख रुपये तक हो गया है, जो सामान्य यात्रियों के लिए बेहद भारी है। सामान्य परिस्थितियों में इस रूट का इकोनॉमी किराया लगभग 20,000 से 40,000 रुपये और बिजनेस क्लास का 1.2 लाख से 2.5 लाख रुपये होता था।

इस वृद्धि का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते पारंपरिक गल्फ रूट्स का अवरुद्ध होना और एयरलाइंस को लंबा मार्ग अपनाना पड़ना है। इसके कारण ईंधन की खपत बढ़ गई और ऑपरेशनल लागत बढ़ने से टिकटों की कीमतों में तेजी आई।

दूसरे अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर प्रभाव

लंदन-मुंबई ही नहीं, बल्कि अन्य लंबी दूरी के रूट्स पर भी महंगाई देखने को मिली है। उदाहरण के लिए:

  • हैदराबाद से लंदन के लिए एक तरफ का किराया 65,000 से 90,000 रुपये के बीच पहुंच गया है।
  • हैदराबाद से न्यूयॉर्क की फ्लाइट का किराया अब 1.5 लाख रुपये तक हो गया है।
  • जर्मनी जाने वाली फ्लाइटों के किराए में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।

इन रूट्स पर किराए में इतनी भारी वृद्धि यात्रियों के बजट पर गंभीर असर डाल रही है और कई यात्रियों को अपनी योजना बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

एयरलाइंस की प्रतिक्रिया और कारण

एयरलाइंस ने इस स्थिति के कारण स्पष्ट किए हैं। उनका कहना है कि युद्ध के कारण गल्फ क्षेत्र की हवाई सीमाओं से होकर उड़ानें संचालित नहीं हो पा रही हैं। इसके चलते विमान को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जो ईंधन और समय की दृष्टि से महंगा है।

इसके अलावा, मांग और आपूर्ति का असंतुलन भी किराए बढ़ने का बड़ा कारण है। युद्ध की वजह से लगभग 700 फ्लाइट रोजाना रद्द हो रही हैं। इस कारण टिकट की उपलब्धता कम हो गई है और मूल्य में वृद्धि हुई है।

भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर

भारत में एयर इंडिया, इंडिगो और अन्य एयरलाइंस ने भी अपने किराए में वृद्धि की है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि अगर संभव हो तो अंतरराष्ट्रीय यात्रा फिलहाल टालें। कई ट्रैवल एजेंट्स ने बताया कि गल्फ क्षेत्र से होकर जाने वाली यात्रा असुरक्षित और महंगी हो गई है।

कोलकाता एयरपोर्ट के अधिकारियों ने जानकारी दी कि गल्फ बेस्ड एयरलाइंस ने हाल ही में दो दिनों में 20 उड़ानों को रद्द करने की घोषणा की है। यात्रियों को यह चेतावनी दी गई है कि यदि यात्रा अनिवार्य नहीं है तो फिलहाल इसे टालें।

यात्रियों की परेशानियां और सुझाव

विमान किराए में इतनी भारी वृद्धि और उड़ानों की रद्दीकरण से यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। कई लोग जिनकी यात्रा यूरोप, अमेरिका या मिडिल ईस्ट के लिए बुक थी, उन्हें अपनी योजना बदलनी पड़ रही है।

ट्रैवल एजेंट्स और एयरलाइंस की सलाह है कि यात्रियों को वर्तमान परिस्थितियों में:

  1. गैर-जरूरी अंतरराष्ट्रीय यात्रा टालने की सोचनी चाहिए।
  2. टिकट बुकिंग से पहले रूट और एयरलाइन की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
  3. यदि यात्रा अनिवार्य है, तो अतिरिक्त खर्च और समय की तैयारी रखें।
मिडिल ईस्ट युद्ध और वैश्विक परिवहन

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के हवाई परिवहन नेटवर्क को प्रभावित किया है। गल्फ क्षेत्र से होकर जाने वाली अधिकांश अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप हवाई मार्ग लंबा हो गया, ईंधन खर्च बढ़ा और किराए में उछाल आया।

विश्व व्यापारी और कारोबारी वर्ग भी इस स्थिति से प्रभावित हुए हैं। लॉजिस्टिक्स और कार्गो की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय हवाई माल की डिलीवरी में देरी होने लगी है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

यात्रियों के लिए बढ़ा हुआ किराया और उड़ानों की कमी एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। आम लोग, छात्र और व्यवसायी इस वृद्धि से प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, छुट्टियों और त्योहारी सीजन में यात्रा की योजना बनाने वाले लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकार और एयरलाइन कंपनियां यात्रियों को सलाह दे रही हैं कि वे यात्रा की योजना बनाते समय वर्तमान अंतरराष्ट्रीय तनाव को ध्यान में रखें। यात्रा को टालने या वैकल्पिक मार्ग चुनने से आर्थिक और व्यक्तिगत सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकती हैं।

निष्कर्ष

अमेरिका-ईरान युद्ध ने भारत में विमान किराए को बढ़ा दिया है और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द कर दिया है। लंबी दूरी की उड़ानों पर यह असर सबसे अधिक है। एयरलाइंस की बढ़ी हुई लागत, ईंधन की खपत, लंबा मार्ग और मांग-आपूर्ति का असंतुलन इस वृद्धि का मुख्य कारण है।

यात्रियों को सुरक्षित और किफायती यात्रा के लिए वैकल्पिक रूट, यात्रा स्थगन और समय की योजना पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान परिस्थितियों में सावधानी और योजना ही सुरक्षित और आर्थिक यात्रा का मार्ग है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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