22 दिन बाद फिर आमने-सामने अमेरिका और ईरान, ट्रंप के बयान से बढ़ा युद्ध का खतरा
समझौते के बाद फिर बिगड़े हालात, मिडिल ईस्ट में बढ़ी चिंता
वॉशिंगटन/तेहरान। US और Iran के बीच कुछ समय पहले बनी शांति की उम्मीद एक बार फिर कमजोर होती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के सिर्फ 22 दिन बाद हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अब उन्हें ईरान के साथ किसी नए समझौते पर भरोसा नहीं है। दूसरी ओर ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। दोनों देशों के सख्त रुख के चलते मिडिल ईस्ट में फिर से सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।
ट्रंप ने Iran पर जताया अविश्वास
नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनके अनुसार ईरान के साथ हुआ समझौता अब प्रभावी नहीं रह गया है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर भरोसा नहीं करने की बात कही और आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान ईरान अलग रुख अपनाता है, जबकि सार्वजनिक तौर पर उसके बयान अलग होते हैं।
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट और मजबूत समझौता चाहता था। अमेरिका की मांग रही है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे, लेकिन दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक बड़ा कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य भी है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का परिवहन होता है।
अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में नौवहन पूरी तरह सुरक्षित रहे, जबकि ईरान अपने क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा हितों को लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लगातार मतभेद बने हुए हैं।
मिलिट्री गतिविधियां बढ़ने से चिंता बढ़ी
तनाव बढ़ने के बीच मिडिल ईस्ट क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज होने की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी नौसेना, लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों की सक्रियता को लेकर क्षेत्रीय देशों में चिंता बढ़ गई है।
दक्षिणी ईरान के कुछ क्षेत्रों और रणनीतिक ठिकानों को लेकर सामने आई खबरों के बाद हालात और गंभीर दिखाई देने लगे हैं। इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता पूरी तरह विफल हो चुका है।
Iran ने भी दी कड़ा जवाब देने की चेतावनी
ईरान ने अमेरिकी दबाव की नीति का विरोध किया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश अपनी संप्रभुता और अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।
ईरानी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका बातचीत के साथ-साथ दबाव और सैन्य शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की धमकी का जवाब दिया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम पर नहीं बनी सहमति
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका लंबे समय से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे अपने अधिकारों के तहत इसे जारी रखने का अधिकार है। यही मतभेद दोनों देशों के बीच बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
आर्थिक प्रतिबंधों से बढ़ा तनाव
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की नीति अपनाई है। प्रतिबंधों और व्यापारिक पाबंदियों के चलते दोनों देशों के संबंधों में और तनाव आया है।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान क्षेत्रीय गतिविधियों के जरिए अस्थिरता पैदा करता है, जबकि ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और अमेरिका पर हस्तक्षेप करने का आरोप लगाता है।
खाड़ी देशों पर भी बढ़ा दबाव
अमेरिका-ईरान तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ सकता है। बहरीन, कुवैत और अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है।
यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए भी यह चिंता का विषय बन सकता है।
क्या फिर शुरू होगा सैन्य संघर्ष?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान फिर से खुले संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं या बातचीत का कोई नया रास्ता निकलेगा।
दोनों देशों के बयानों से फिलहाल तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार प्रयास कर रहा है कि विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाए।
दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान पर
22 दिन पहले जिस समझौते से क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी थी, वह अब गंभीर संकट में दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता अविश्वास पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।
अब आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों देश कूटनीति का रास्ता अपनाते हैं या फिर मिडिल ईस्ट एक बार फिर लंबे संघर्ष की ओर बढ़ता है।
