US-Iran युद्ध में समझौते के चलते, वैश्विक स्तर पर आसमान छू रही क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। लेकिन इसका कोई खास असर देश में LPG और पेट्रोल – डीजल के दामों पर देखने को नहीं मिला है। बता दें कि अभी तक 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमतों में कोई कमी नहीं हुई है। हालांकि 19 किलो वाले सिलेंडर के रेट्स में हल्की-फुल्की गिरावट देखने को मिली है। इससे कई रेस्टोरेंट मालिकों और ढाबा चला रहे लोगों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन आम जनता पर इसका कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला है।
19 किलो के सिलेंडर की कीमतों में 183.50 की गिरावट:
19 किलो का सिलेंडर ज्यादातर ढाबों और रेस्टोरेंट्स में उपयोग किए जाते हैं। ऐसे में इसकी कीमतों में कमी होने से ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन घरेलू सिलेंडरों पर किसी प्रकार की कोई गिरावट का ऐलान नहीं किया गया है। जिससे आम जनता ने एलपीजी की खपत में कमी करना शुरू कर दी है।
LPG की कम हुई खपत
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की हालिया रिपोर्ट ने ये दावा किया है कि ईरान और US के बीच हुए युद्ध के चलते जो एलपीजी की कीमतें बढ़ी थीं उसके बाद से ही देश में एलपीजी की खपत में कमी दर्ज की गई है। 2026 के शुरुआती 6 महीने यानी जनवरी से अभी तक में एलपीजी की खपत में कुल 8% की गिरावट देखने को मिली है।
ये आंकड़ा ऊपर से देखने पर कम नजर आता है, चलिए हम इसे अंकों में देखते हैं। भारत ने जनवरी से जून 2026 के बीच लगभग 14.7 मिलियन टन LPG की खपत की, जबकि पिछले साल इसी समय अवधि में यह खपत 15.9 मिलियन टन थी। इससे पता चलता है कि एलपीजी का इस्तेमाल कम हो गया है।
महंगाई के चलते आम आदमी ने भी एलपीजी पर आश्रित रहना छोड़कर दूसरे विकल्पों पर स्विच कर दिया है जैसे आजकल कई गृहिणियों ने एलपीजी की जगह इलेक्ट्रिक इंडक्शन को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।
