US-Iran तनाव बढ़ा, रेड सी तक पहुंची जंग की आंच; बाब अल-मंडेब बंद होने का खतरा
मिडिल ईस्ट संकट का असर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर पड़ने की आशंका
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में US-Iran के बीच बढ़ता तनाव अब केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका असर रेड सी क्षेत्र तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने यमन के हूती समूह से कहा है कि यदि अमेरिका उसके पावर नेटवर्क और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला करता है, तो वह रेड सी के अहम समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद करने की दिशा में कदम उठा सकता है।
बाब अल-मंडेब स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। एशिया और यूरोप के बीच होने वाले बड़े पैमाने के व्यापार के लिए यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यह मार्ग प्रभावित होता है तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बाब अल-मंडेब बंद होने से व्यापार पर पड़ेगा असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रेड सी का यह प्रमुख समुद्री रास्ता बाधित होता है तो तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। जहाजों के संचालन में देरी के साथ-साथ परिवहन लागत और बीमा प्रीमियम में भी भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
बाब अल-मंडेब और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोनों ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। यदि इन दोनों मार्गों पर किसी तरह का संकट पैदा होता है तो दुनिया भर के बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
Iran की धमकी के बाद बढ़े कच्चे तेल के दाम
ईरान की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड के भाव में भी उछाल आया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे तौर पर ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है, क्योंकि इस क्षेत्र से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति होती है।
हूती समूह की चेतावनी से बढ़ी चिंता
यमन के हूती नेता सैयद अब्दुल-मलिक अल हूती ने अमेरिका और इजरायल पर निशाना साधते हुए कहा है कि दोनों देश क्षेत्र में तनाव और संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल अंतरराष्ट्रीय समझौतों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का सम्मान नहीं करते।
हूती नेता ने सऊदी अरब पर भी आरोप लगाए और कहा कि वह अमेरिका, इजरायल और ब्रिटेन के साथ मिलकर मुस्लिम समुदाय को कमजोर करने का काम कर रहा है।
हालांकि, इन बयानों पर संबंधित देशों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं और क्षेत्रीय हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोल्फाघरी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है और होर्मुज क्षेत्र में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।
वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। व्यापारिक विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई पर असर डाल सकता है।
रेड सी और होर्मुज जैसे समुद्री रास्ते वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इन मार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होगी और इसका असर दुनिया के कई देशों तक पहुंच सकता है।
दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर
फिलहाल अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र में तनाव कम करने और किसी बड़े संघर्ष को रोकने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होगी।
