चीन की रेयर अर्थ ताकत से अमेरिका परेशान, हथियारों से लेकर टेक्नोलॉजी तक बढ़ी चिंता
अमेरिका और चीन के बीच रेयर अर्थ को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक और रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन खनिजों की अहम भूमिका होने के कारण इन पर नियंत्रण अब सिर्फ कारोबारी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है। चीन रेयर अर्थ की माइनिंग के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण में भी दुनिया के सबसे मजबूत देशों में शामिल है। दूसरी ओर, अमेरिका लंबे समय तक अपनी जरूरत के लिए चीन से आने वाली सप्लाई पर काफी हद तक निर्भर रहा है।
अप्रैल 2025 में चीन ने कुछ रेयर अर्थ तत्वों और उनसे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण बढ़ाया था। इसके बाद अमेरिका की टेक्नोलॉजी और डिफेंस इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि चीन अगर रेयर अर्थ की सप्लाई कम या बंद कर दे तो अमेरिकी लड़ाकू विमान या दूसरे हथियार तुरंत काम करना बंद कर देंगे। असली चिंता लंबे समय तक चलने वाली सप्लाई बाधा को लेकर है, जिसका असर नए हथियारों के निर्माण और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ सकता है।
क्या होते हैं रेयर अर्थ?
रेयर अर्थ 17 अलग-अलग खनिज तत्वों का समूह है। नाम के विपरीत इनमें से कई तत्व पृथ्वी की ऊपरी परत में पूरी तरह दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन इन्हें आर्थिक रूप से उपयोगी मात्रा में निकालना, अलग करना और शुद्ध करना काफी जटिल प्रक्रिया है।
इन तत्वों की खासियत यह है कि इनका इस्तेमाल बेहद ताकतवर मैग्नेट, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कई आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में किया जाता है। इलेक्ट्रिक मोटर से लेकर मोबाइल फोन, कंप्यूटर, पवन ऊर्जा उपकरण और रक्षा प्रणालियों तक इनका इस्तेमाल देखने को मिलता है।
खास तौर पर कुछ रेयर अर्थ तत्वों से बनने वाले स्थायी मैग्नेट बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका आकार छोटा होने के बावजूद ये काफी शक्तिशाली होते हैं। इसी वजह से इन्हें आधुनिक मशीनों और सैन्य उपकरणों में इस्तेमाल किया जाता है।
हथियारों में क्यों जरूरी हैं रेयर अर्थ?
रेयर अर्थ की अहमियत सिर्फ स्मार्टफोन या इलेक्ट्रॉनिक सामान तक सीमित नहीं है। आधुनिक रक्षा तकनीक में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। विशेष प्रकार के मैग्नेट का इस्तेमाल लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन, रडार और पनडुब्बियों जैसी प्रणालियों में किया जाता है।
रक्षा उपकरणों में छोटे आकार, कम वजन और ज्यादा क्षमता वाले सिस्टम की जरूरत होती है। शक्तिशाली रेयर अर्थ मैग्नेट इस जरूरत को पूरा करने में मदद करते हैं। इलेक्ट्रिक मोटर, सेंसर, एक्ट्यूएटर और दूसरी प्रणालियों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
यही कारण है कि किसी देश के लिए रेयर अर्थ की सप्लाई सिर्फ औद्योगिक उत्पादन का सवाल नहीं है। लंबे समय तक इन खनिजों या उनसे बने जरूरी कंपोनेंट की कमी होने पर रक्षा उपकरणों के उत्पादन की गति प्रभावित हो सकती है।
चीन की पकड़ इतनी मजबूत क्यों है?
रेयर अर्थ के क्षेत्र में चीन की ताकत केवल खनन तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती इसकी प्रोसेसिंग क्षमता है। जमीन से खनिज निकालने के बाद उन्हें उपयोगी बनाने के लिए कई चरणों से गुजरना पड़ता है। इनमें खनिजों को अलग करना, शुद्ध करना और आगे मैग्नेट या दूसरे जरूरी उत्पाद तैयार करना शामिल है।
इन प्रक्रियाओं में चीन ने लंबे समय से बड़े पैमाने पर निवेश किया है। परिणामस्वरूप वैश्विक रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में चीन की हिस्सेदारी बेहद मजबूत हो गई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दुनिया की करीब 90 प्रतिशत रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता चीन के पास बताई जाती है। वहीं 2019 से 2022 के बीच अमेरिका में आयात हुए रेयर अर्थ का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा चीन से आया था। यही निर्भरता अमेरिका के लिए रणनीतिक चिंता का कारण बनी हुई है।
अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
अमेरिका में भी रेयर अर्थ का उत्पादन होता है। कैलिफोर्निया स्थित माउंटेन पास माइन इसका प्रमुख उदाहरण है। लेकिन सिर्फ खनिज निकालना पर्याप्त नहीं है। खनन के बाद रेयर अर्थ को अलग-अलग तत्वों में विभाजित करना, शुद्ध करना और फिर उन्हें औद्योगिक इस्तेमाल के लिए तैयार करना जरूरी होता है।
यहीं अमेरिका को सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। चीन ने खनन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण की पूरी सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ बनाई है।
अगर चीन से आने वाली सप्लाई लंबे समय तक बाधित होती है तो अमेरिका को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ेगी। इससे लागत बढ़ सकती है और कुछ उत्पादों के निर्माण में अतिरिक्त समय लग सकता है।
क्या चीन सप्लाई रोककर अमेरिका के हथियार बंद कर सकता है?
यह दावा करना सही नहीं होगा कि चीन रेयर अर्थ की सप्लाई रोकते ही अमेरिका के सभी फाइटर जेट, मिसाइल या ड्रोन काम करना बंद कर देंगे। मौजूदा सैन्य उपकरणों पर इसका तत्काल प्रभाव इस तरह नहीं पड़ता।
असल समस्या नई प्रणालियों के उत्पादन और मौजूदा रक्षा उद्योग की सप्लाई चेन से जुड़ी है। अगर जरूरी कच्चे माल और कंपोनेंट लंबे समय तक उपलब्ध नहीं होते हैं तो हथियारों के उत्पादन की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में कंपनियों को वैकल्पिक सप्लायर तैयार करने, नए मैटेरियल विकसित करने और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव करने के लिए समय और पैसा खर्च करना पड़ सकता है।
अमेरिका ने शुरू की निर्भरता घटाने की कोशिश
चीन पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका पिछले कुछ वर्षों से अपनी घरेलू रेयर अर्थ सप्लाई चेन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने 2020 से घरेलू रेयर अर्थ सप्लाई चेन विकसित करने के लिए 439 मिलियन डॉलर से ज्यादा की मदद दी है।
अमेरिका का लक्ष्य केवल अपनी जमीन से रेयर अर्थ निकालना नहीं है। वह माइनिंग से लेकर प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और मैग्नेट निर्माण तक पूरी सप्लाई चेन को विकसित करना चाहता है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता के कारण अमेरिकी उद्योग और रक्षा उत्पादन प्रभावित न हो।
दूसरे देशों की ओर भी नजर
अमेरिका के लिए एक और रास्ता दूसरे देशों से रेयर अर्थ की सप्लाई बढ़ाना है। इसके लिए अलग-अलग देशों के साथ सहयोग और नई सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, किसी नई सप्लाई चेन को तैयार करना आसान नहीं है। नई खदान खोलने में वर्षों लग सकते हैं और प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है। इसके अलावा पर्यावरणीय नियम और तकनीकी चुनौतियां भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।
इसलिए चीन पर निर्भरता कम करना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है।
टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी असर
रेयर अर्थ की समस्या सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, अक्षय ऊर्जा और कई हाई-टेक उद्योग भी इन खनिजों पर निर्भर हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली मोटरों में शक्तिशाली मैग्नेट की जरूरत पड़ सकती है। इसी तरह पवन टर्बाइन, औद्योगिक रोबोट और कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में भी रेयर अर्थ आधारित सामग्री उपयोगी होती है।
इसलिए सप्लाई में लंबे समय तक बाधा आने पर इसका असर कई उद्योगों पर एक साथ पड़ सकता है।
चीन के लिए भी यह आसान हथियार नहीं
रेयर अर्थ पर चीन की मजबूत पकड़ निश्चित रूप से उसे रणनीतिक बढ़त देती है, लेकिन इसका इस्तेमाल पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं है। अगर सप्लाई को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है तो इससे दूसरे देश वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की कोशिश और तेज कर सकते हैं।
अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले से ही अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने पर काम कर रहे हैं। लंबे समय में इससे चीन की मौजूदा बाजार हिस्सेदारी को चुनौती मिल सकती है।
इसके अलावा वैश्विक उद्योगों के लिए भी अचानक सप्लाई रोकना महंगा साबित हो सकता है। इसलिए रेयर अर्थ का मुद्दा आने वाले समय में आर्थिक दबाव, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।
आने वाले समय में क्या बदलेगा?
अमेरिका-चीन के बीच रेयर अर्थ की प्रतिस्पर्धा अब केवल खनिजों की उपलब्धता का सवाल नहीं है। यह आधुनिक तकनीक, रक्षा उत्पादन और वैश्विक सप्लाई चेन पर नियंत्रण की लड़ाई भी बन चुकी है।
चीन के पास माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण की मजबूत क्षमता है, जबकि अमेरिका अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने और वैकल्पिक सप्लायर तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
अगर चीन से सप्लाई सामान्य रहती है तो तत्काल कोई बड़ा संकट पैदा होना जरूरी नहीं है। लेकिन लंबे समय तक निर्यात नियंत्रण या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में अमेरिकी रक्षा और टेक्नोलॉजी उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अब अपनी निर्भरता कम करना और ऐसी सप्लाई चेन तैयार करना है, जिसमें किसी एक देश के फैसले से पूरी औद्योगिक या रक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। आने वाले वर्षों में रेयर अर्थ इसी वजह से अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक अहम मोर्चा बना रह सकता है।
