LPG Supply: खाड़ी देशों से सप्लाई पर असर के बीच अमेरिका से बढ़ी भारत की LPG खरीद, LNG में भी बढ़ा भरोसा
LPG Supply India: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर पैदा हुई चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सप्लाई के नए विकल्पों पर जोर बढ़ा दिया है। खाड़ी देशों से LPG और LNG की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच अमेरिका भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक सप्लायर के रूप में उभर रहा है। इससे भारत को गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल रही है, लेकिन लंबी दूरी की सप्लाई के कारण लागत भी बढ़ रही है।
अमेरिका से LPG खरीद में बढ़ोतरी
रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई में हाल के दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाली LPG की मात्रा प्रभावित होने के बाद भारत ने अमेरिका से आयात बढ़ाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 6.2 लाख टन LPG खरीदी, जबकि जुलाई में यह मात्रा करीब 8.9 लाख टन बताई गई थी।
पश्चिम एशिया में तनाव का असर ऊर्जा कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। खाड़ी देशों से भारत तक LPG पहुंचाने के लिए समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में समुद्री परिवहन में किसी भी तरह की बाधा या जोखिम बढ़ने पर जहाजों की आवाजाही और माल की लागत प्रभावित होती है।
भारत अपनी घरेलू जरूरतों के लिए LPG का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अलग-अलग देशों से सप्लाई सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है।
खाड़ी देशों से LPG सप्लाई में कमी
अगस्त में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत को करीब 1.4 लाख टन LPG मिली, जबकि कतर से लगभग 60 हजार टन की सप्लाई हुई। वहीं, जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में सऊदी अरब से भारत को LPG की आपूर्ति नहीं हुई।
खाड़ी क्षेत्र लंबे समय से भारत के लिए LPG का प्रमुख स्रोत रहा है। सऊदी अरब, कतर और UAE जैसे देश भारतीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन देशों से सप्लाई में कमी आने पर भारत को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
अमेरिका से बढ़ा आयात इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत को घरेलू बाजार में LPG की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
LNG के लिए भी अमेरिका पर बढ़ा भरोसा
LPG के अलावा भारत ने LNG यानी Liquefied Natural Gas की खरीद में भी अपने सप्लाई स्रोतों में बदलाव किया है। कतर भारत के सबसे बड़े LNG सप्लायरों में से एक रहा है, लेकिन पश्चिम एशिया में परिस्थितियां बदलने के साथ भारत ने अमेरिका से LNG आयात बढ़ाया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका से LNG की आपूर्ति जुलाई में करीब 7.2 लाख टन थी, जो अगस्त में बढ़कर लगभग 7.5 लाख टन हो गई। इसके मुकाबले कतर से आने वाली LNG की मात्रा में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है।
आंकड़ों के मुताबिक, पहले कतर एक महीने में भारत को करीब 12 लाख टन तक LNG की आपूर्ति करता रहा है। ऐसे में अमेरिकी LNG की बढ़ती हिस्सेदारी भारत की बदलती ऊर्जा रणनीति को दर्शाती है।
सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए बढ़ रही लागत
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका से गैस खरीद बढ़ना केवल खाड़ी देशों को बदलने की रणनीति नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सप्लाई को सुरक्षित बनाए रखना है।
पश्चिम एशिया से सप्लाई प्रभावित होने पर भारत को दूसरे स्रोतों से गैस खरीदनी पड़ रही है। अमेरिका से आने वाली LNG और LPG को भारत तक पहुंचने में अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। इससे जहाजों की माल ढुलाई लागत बढ़ जाती है।
इसके अलावा, समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिम के कारण इंश्योरेंस प्रीमियम भी बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें ऊंची रहने पर आयात का कुल खर्च और बढ़ जाता है।
यानी भारत फिलहाल ऊर्जा की नियमित उपलब्धता बनाए रखने के लिए अधिक कीमत चुकाने की स्थिति में है। सरकार और तेल कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर कम से कम पड़े।
आम लोगों के लिए LPG क्यों महत्वपूर्ण?
भारत में LPG का इस्तेमाल करोड़ों परिवार खाना पकाने के लिए करते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत और आयात लागत का सीधा संबंध घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता और कीमतों से है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने का पूरा असर तुरंत उपभोक्ताओं पर पड़े, यह जरूरी नहीं है। सरकार और तेल विपणन कंपनियां कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग कदम उठा सकती हैं। सब्सिडी और घरेलू मूल्य निर्धारण नीति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फिलहाल भारत की प्राथमिकता घरेलू बाजार में LPG की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है।
कच्चे तेल के लिए रूस पर निर्भरता जारी
गैस के मामले में अमेरिका की भूमिका बढ़ी है, लेकिन कच्चे तेल की खरीद के मामले में रूस अभी भी भारत का प्रमुख सप्लायर बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत ने रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा।
इसके अलावा वेनेजुएला से भी अगस्त में करीब 3.83 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भारत पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
इससे स्पष्ट होता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।
भारत की रणनीति: सप्लाई में विविधता
भारत के बदलते आयात पैटर्न से संकेत मिलता है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर देश अब सप्लाई में विविधता पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। LPG और LNG के लिए अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि कच्चे तेल के मामले में रूस महत्वपूर्ण बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता के बीच यह रणनीति भारत को संभावित सप्लाई संकट से बचाने में मदद कर सकती है। हालांकि, अलग-अलग देशों से लंबी दूरी पर ऊर्जा उत्पाद मंगाने से लागत बढ़ने की चुनौती बनी रहेगी।
आने वाले महीनों में भारत की ऊर्जा नीति का मुख्य फोकस सप्लाई की सुरक्षा, आयात स्रोतों में विविधता और कीमतों को नियंत्रित रखने पर रहने की संभावना है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो अमेरिका समेत अन्य देशों से LPG और LNG की खरीद भारत के ऊर्जा आयात में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
