उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज चातुर्मास लखनऊ की शुरुआत 19 जुलाई से आशियाना जैन मंदिर में होगी। ग्वालियर जैन समाज 2027 के चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट करेगा। जानिए मेडिटेशन गुरु की तपस्या, पदयात्रा, मंदिर निर्माण और धार्मिक योगदान की पूरी जानकारी।
उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज चातुर्मास लखनऊ: 19 जुलाई से शुरू होगा आध्यात्मिक महापर्व, ग्वालियर जैन समाज करेगा 2027 चातुर्मास का श्रीफल भेंट
रिपोर्ट: सचिन जैन | लखनऊ
लखनऊ। उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज चातुर्मास लखनऊ इस वर्ष जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर बनने जा रहा है। मेडिटेशन गुरु के रूप में देशभर में विख्यात उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज (ससंघ) का चातुर्मास आगामी 19 जुलाई से लखनऊ के आशियाना जैन मंदिर में विधिवत कलश स्थापना के साथ प्रारंभ होगा। चार माह तक चलने वाले इस चातुर्मास में धार्मिक प्रवचन, ध्यान साधना, अनुष्ठान, विधान और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।इस अवसर पर ग्वालियर जैन समाज भी लखनऊ पहुंचेगा और वर्ष 2027 के चातुर्मास के लिए गुरु श्री को श्रीफल भेंट कर अपनी भावनाएं व्यक्त करेगा तथा विशेष आशीर्वाद प्राप्त करेगा।
उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज चातुर्मास लखनऊ की होगी भव्य शुरुआत
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि 19 जुलाई को लखनऊ स्थित आशियाना जैन मंदिर में उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज (ससंघ) के पावन सान्निध्य में चातुर्मास का कलश स्थापना समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से श्रद्धालु, समाजजन और धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।गुरु श्री के चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, ध्यान, स्वाध्याय, भक्ति, विधान एवं आध्यात्मिक साधना के विविध कार्यक्रम होंगे।
ग्वालियर जैन समाज करेगा 2027 चातुर्मास का श्रीफल भेंट
चातुर्मास के शुभारंभ अवसर पर ग्वालियर जैन समाज का विशेष प्रतिनिधिमंडल भी लखनऊ पहुंचेगा। समाजजन वर्ष 2027 के चातुर्मास के लिए गुरु श्री को श्रीफल भेंट करेंगे तथा उनके पावन सान्निध्य में आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।समाज के अनुसार गुरु श्री के सान्निध्य में होने वाला प्रत्येक चातुर्मास आध्यात्मिक चेतना, अनुशासन और धर्म साधना का अनूठा संगम बन जाता है।
देश के कई राज्यों में कर चुके हैं वर्षायोग
उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज ने अपने संत जीवन में अब तक अनेक राज्यों में वर्षायोग सम्पन्न किए हैं।
- उत्तर प्रदेश – 10 वर्षायोग
- दिल्ली – 5 वर्षायोग
- मध्य प्रदेश – 7 वर्षायोग
- छत्तीसगढ़ – 2 वर्षायोग
- हरियाणा – 1 वर्षायोग
देश के विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रवचन, ध्यान शिविर और धार्मिक आयोजनों से लाखों श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं।
80 मंदिरों का जीर्णोद्धार और 47 नवीन जिन मंदिरों का निर्माण
उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज का धार्मिक एवं सामाजिक योगदान अत्यंत प्रेरणादायी रहा है।अब तक उनके मार्गदर्शन में—
- 80 मंदिरों का जीर्णोद्धार
- 55 पंचकल्याणक महोत्सव
- 380 वेदी प्रतिष्ठाएं
- 95 शिखरों का निर्माण
- 780 शिखर कलशारोहण
- 47 नवीन जिन मंदिर
- 13 चौबीसी मानस्तंभ एवं कीर्ति स्तंभ
- 187 संत भवन
- 59 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान
- 6 अस्पताल
- 7 जैन विद्यालय
- 3 भोजनशालाओं का संचालन
जैसे अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक कार्य सम्पन्न हो चुके हैं।
26 वर्षों में 90 हजार किलोमीटर की पदयात्रा
गुरु श्री ने अपने तपस्वी जीवन में लगभग 26 वर्षों के दौरान 90 हजार किलोमीटर की पदयात्रा की है।उन्होंने आजीवन अपने आहार-विहार में 80 प्रकार की वस्तुओं का त्याग किया हुआ है। इनमें दही, तेल तथा मीठी वस्तुएं प्रमुख हैं।विशेष बात यह है कि जब भी किसी मंदिर का जीर्णोद्धार प्रारंभ होता है, गुरु श्री एक नई वस्तु का त्याग करने का संकल्प लेते हैं और मंदिर का कार्य पूर्ण होने के बाद उस वस्तु का आजीवन त्याग बनाए रखते हैं।
दवाइयों का भी आजीवन त्याग
उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज ने आजीवन किसी भी प्रकार की दवा का सेवन न करने का संकल्प लिया है।श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गुरु श्री के मुखारविंद से निकले वचनों में सरस्वती का वास है तथा उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए हैं।
दिन में चार बार देते हैं धर्म और ध्यान का संदेश
गुरु श्री प्रतिदिन चार बार धर्मसभा एवं प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, ध्यान, आत्मकल्याण और जीवन मूल्यों का संदेश देते हैं।देशभर से हजारों श्रद्धालु नियमित रूप से उनके प्रवचनों से जुड़ते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
चातुर्मास का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। वर्षा ऋतु के चार महीनों में साधु-संत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्म प्रचार, स्वाध्याय, तप, साधना एवं समाज जागरण का कार्य करते हैं।लखनऊ में आयोजित होने वाला उपाध्याय श्री विहसंत सागर मुनिराज चातुर्मास श्रद्धालुओं के लिए धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन का विशेष अवसर माना जा रहा है।

