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UP Weather Update: यूपी के 29 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट, तराई-बुंदेलखंड में ज्यादा असर; 28 अगस्त से राहत के आसार

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Published On: 27 August 2026
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UP Weather Update: यूपी के 29 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट, तराई-बुंदेलखंड में ज्यादा असर; 28 अगस्त से राहत के आसार

वाराणसी में लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित, BHU अस्पताल परिसर में भरा पानी; अगले दो दिन कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर जोरदार असर दिखा रहा है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई और बुंदेलखंड तक कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान प्रदेश के 29 जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बन सकती है।

वाराणसी में बारिश का खासा असर देखने को मिला है। लगातार कई घंटों तक हुई बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अस्पताल परिसर में भी जलभराव की स्थिति सामने आई, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ स्थानों पर लोगों को मरीजों को सहारा देकर और कंधे पर बैठाकर पानी के बीच से ले जाते देखा गया।

वाराणसी में लगातार बारिश, कई इलाकों में जलभराव

पूर्वांचल के वाराणसी में मानसून की सक्रियता के कारण लगातार बारिश दर्ज की गई। करीब 15 घंटे तक बारिश जारी रहने से कई सड़कों और निचले इलाकों में पानी जमा हो गया। बारिश के कारण यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा और लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।

BHU अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी भरने की स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जलनिकासी प्रभावित होने के कारण अस्पताल आने-जाने वालों को पानी से होकर गुजरना पड़ा।

लगातार बारिश से शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। स्थानीय स्तर पर पानी निकालने और यातायात सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

यूपी के 29 जिलों के लिए यलो अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के 29 जिलों में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, तराई और बुंदेलखंड के कई हिस्सों में मानसून ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है।

यलो अलर्ट का अर्थ है कि लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे रास्तों के प्रभावित होने और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं।

गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले स्थानों, खेतों और पेड़ों के नीचे रुकने से बचने की सलाह दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

तराई क्षेत्र में दिख सकता है ज्यादा असर

प्रदेश के तराई क्षेत्र में अगले दो दिनों के दौरान मानसून का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के तराई जिलों में भारी बारिश होने पर नदियों और स्थानीय नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।

लगातार बारिश होने की स्थिति में खेतों में पानी भरने के साथ ग्रामीण संपर्क मार्ग भी प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत है।

तराई क्षेत्रों में पहले से अधिक नमी होने के कारण नई बारिश का पानी तेजी से जमा हो सकता है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

बुंदेलखंड में भी भारी बारिश की संभावना

आमतौर पर कम बारिश और जल संकट के लिए चर्चा में रहने वाले बुंदेलखंड में इस बार मानसून की सक्रियता लगातार दिखाई दे रही है। मौसम के मौजूदा सिस्टम के कारण बुंदेलखंड के कई जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

तेज बारिश से किसानों को कुछ फसलों में फायदा हो सकता है, लेकिन अत्यधिक वर्षा खेतों में जलभराव की समस्या भी पैदा कर सकती है। जिन इलाकों में नदी, नाले और छोटे बांध पहले से भरे हुए हैं, वहां अतिरिक्त पानी आने से स्थिति बदल सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों और कमजोर संरचनाओं को लेकर भी सतर्कता जरूरी है। लगातार बारिश के दौरान पुरानी या जर्जर इमारतों से दूरी बनाए रखना सुरक्षित माना जाता है।

बीते 24 घंटों में कई हिस्सों में बरसे बादल

पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हल्की से लेकर तेज बारिश दर्ज की गई है। पूर्वांचल में मानसून की गतिविधियां अधिक सक्रिय दिखाई दीं, जबकि मध्य और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी बारिश हुई।

बारिश के कारण तापमान में कुछ गिरावट आने से उमस और गर्मी से राहत मिली है, लेकिन लगातार वर्षा ने शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या बढ़ा दी है। सड़कों पर पानी जमा होने के कारण कई स्थानों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई।

ग्रामीण इलाकों में बारिश का असर खेती-किसानी पर भी दिखाई दे रहा है। धान सहित खरीफ की फसलों के लिए सामान्य बारिश लाभकारी मानी जाती है, लेकिन लगातार अत्यधिक पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है।

गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा

मानसून के दौरान केवल भारी बारिश ही नहीं, बल्कि आकाशीय बिजली भी बड़ा खतरा बन सकती है। मौसम खराब होने के दौरान खेतों में काम करने वाले किसानों और खुले क्षेत्रों में मौजूद लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

बिजली चमकने या गरज सुनाई देने पर सुरक्षित पक्के भवन में जाना बेहतर है। पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूरी रखनी चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के खुले तार या खंभे भी खतरा पैदा कर सकते हैं।

28 अगस्त से कमजोर पड़ सकता है मानसून

लगातार बारिश के बीच राहत की खबर यह है कि 28 अगस्त से उत्तर प्रदेश में मानसून की गतिविधियों में कुछ कमी आने के संकेत हैं। मौजूदा सक्रिय सिस्टम के कमजोर होने के साथ बारिश की तीव्रता कम हो सकती है।

हालांकि मानसून कमजोर पड़ने का मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण गरज-चमक के साथ बारिश भी हो सकती है।

प्रशासन और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाले नदी-नालों को पार करने से बचना चाहिए।

विशेष रूप से ग्रामीण और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी-नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि को लेकर सावधान रहना होगा। यात्रा करने वाले लोगों को भी निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

उत्तर प्रदेश में फिलहाल मानसून सक्रिय है और अगले दो दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकते हैं। तराई और बुंदेलखंड के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। वहीं 28 अगस्त से बारिश की तीव्रता में कमी आने पर लोगों को जलभराव और लगातार बारिश से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

नोट: मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है। जिलेवार अलर्ट और बारिश के पूर्वानुमान के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की नवीनतम आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दें।

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