UP लखनऊ अग्निकांड: रिहायशी नक्शे पर बना कॉम्प्लेक्स बना मौत का जाल, 15 की मौत के बाद बड़ा खुलासा
UP की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सोमवार दोपहर तीन मंजिला इमारत में लगी आग ने भयावह रूप ले लिया, जिसमें अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जिस इमारत में आग लगी, वहां एक कोचिंग सेंटर भी संचालित हो रहा था और हादसे के समय बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। आग लगने के बाद कई लोग बाहर निकलने में सफल नहीं हो सके और इमारत के अंदर ही फंस गए।
रिहायशी नक्शे पर चल रहा था अवैध कॉम्प्लेक्स
प्रारंभिक जांच में इस अग्निकांड को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका नक्शा मूल रूप से रिहायशी भवन के रूप में स्वीकृत था। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के रिकॉर्ड और नगर निगम के हाउस टैक्स दस्तावेजों के अनुसार इसे केवल आवासीय उपयोग के लिए मंजूरी दी गई थी।
लेकिन समय के साथ भवन मालिकों ने नियमों की अनदेखी करते हुए इसे कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बदल दिया। जांच में सामने आया है कि इमारत में अवैध रूप से दुकानें, कोचिंग सेंटर और शैक्षणिक संस्थान संचालित किए जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2014 के बाद भवन को पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया था, जबकि इसके लिए कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी।
भवन मालिकों पर गंभीर आरोप
यह इमारत तीन भाइयों — वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला — के स्वामित्व में बताई जा रही है। आरोप है कि इन्होंने नियमों को दरकिनार कर इमारत का व्यावसायिक उपयोग किया और कई संस्थानों को किराए पर देकर संचालन की अनुमति दी।
हादसे के समय एक एनीमेशन कोचिंग सेंटर भी इमारत में चल रहा था, जहां कई छात्र पढ़ाई कर रहे थे। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश मृतक दूसरी मंजिल पर फंस गए थे, जहां से निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था।
सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इमारत में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी। भवन में न तो कोई इमरजेंसी एग्जिट मौजूद था और न ही आग से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी।
सबसे गंभीर बात यह रही कि छत तक जाने का रास्ता भी बंद कर दिया गया था, जिससे लोग किसी सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सके। आग लगने के बाद लोग इमारत के अंदर ही फंस गए और बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं बचा।
इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिस्टम बना मौत का कारण
अधिकारियों के अनुसार, इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार पर आधुनिक थंब इंप्रेशन आधारित इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम लगाया गया था। यह सिस्टम सामान्य स्थिति में सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन आग लगने के दौरान यह सिस्टम फेल हो गया और दरवाजा अपने आप लॉक हो गया।
इस तकनीकी खराबी के कारण कई लोग इमारत से बाहर नहीं निकल सके और अंदर ही फंसकर रह गए। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह तकनीकी खामी मौतों की संख्या बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनी।
LDA के रिकॉर्ड और पुराने आदेशों का खुलासा
करीब 1,992 वर्ग फुट क्षेत्र में बनी इस इमारत को 20 अगस्त 2014 को आवासीय भवन के रूप में मंजूरी दी गई थी। बाद में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2016 में अवैध निर्माण का हवाला देते हुए भवन को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था।
10 मई 2016 को भवन गिराने का आदेश भी दिया गया था, लेकिन बाद में भवन मालिकों की आपत्ति और प्रशासनिक सुनवाई न होने के कारण 5 जुलाई 2016 को यह आदेश वापस ले लिया गया।
इस फैसले के बाद भवन में व्यावसायिक गतिविधियां और तेजी से बढ़ गईं और इसे पूरी तरह कमर्शियल उपयोग में बदल दिया गया।
प्रशासन की कार्रवाई और जांच
घटना के बाद अलीगंज थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है। अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद इस इमारत में कोचिंग और दुकानें कैसे चलती रहीं और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
घायलों का इलाज जारी, इलाके में दहशत
घायलों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय होते तो यह बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
निष्कर्ष
UP लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। रिहायशी नक्शे पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर इस दर्दनाक घटना को जन्म दिया। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं।
