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New World Map: दुनिया का नक्शा बदलने के प्रस्ताव को UN की मंजूरी, अफ्रीका दिखेगा बड़ा; अमेरिका ने किया विरोध

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Published On: 5 September 2026
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New World Map: दुनिया का नक्शा बदलने के प्रस्ताव को UN की मंजूरी, अफ्रीका दिखेगा बड़ा; अमेरिका ने किया विरोध

नई दिल्ली। आने वाले वर्षों में स्कूलों, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देने वाला दुनिया का नक्शा कुछ अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘Equal Earth Projection’ जैसे अधिक क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाले ‘Correct the Map’ प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।

इस प्रस्ताव के समर्थन में भारत सहित 164 देशों ने मतदान किया। अमेरिका अकेला देश रहा, जिसने इसके खिलाफ वोट दिया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोरक्को, सर्बिया और यूक्रेन मतदान से दूर रहे। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। सदस्य देशों के लिए नए नक्शे को अपनाना अनिवार्य नहीं होगा।

इस पहल का उद्देश्य वर्षों से व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जा रहे मर्केटर प्रोजेक्शन की जगह ऐसे मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जो महाद्वीपों और देशों के वास्तविक क्षेत्रफल को तुलनात्मक रूप से ज्यादा सही तरीके से प्रस्तुत करें। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक विवरण के मुताबिक प्रस्ताव 164 मतों से पारित हुआ।

क्या सचमुच बदल जाएगा दुनिया का नक्शा?

इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि दुनिया के देशों, महाद्वीपों या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में कोई वास्तविक बदलाव होने जा रहा है। केवल गोलाकार पृथ्वी को सपाट कागज या स्क्रीन पर दिखाने की तकनीक यानी मैप प्रोजेक्शन में बदलाव को प्रोत्साहित किया गया है।

पृथ्वी त्रि-आयामी गोलाकार सतह है, जबकि किताब, दीवार या डिजिटल स्क्रीन पर बनने वाला नक्शा दो-आयामी होता है। इस कारण दुनिया के किसी भी सपाट नक्शे में आकार, क्षेत्रफल, दिशा या दूरी में से कुछ न कुछ विकृति आना स्वाभाविक है। अलग-अलग मैप प्रोजेक्शन इन विकृतियों को अलग-अलग तरीके से नियंत्रित करते हैं।

नए प्रस्ताव में ‘Equal Earth Projection’ को अधिक उपयुक्त विकल्प माना गया है। यह महाद्वीपों के आपसी क्षेत्रफल को वास्तविक अनुपात के अधिक करीब दिखाने का प्रयास करता है।

नए मानचित्र में अफ्रीका क्यों दिखेगा बड़ा?

वर्तमान में लोकप्रिय मर्केटर प्रोजेक्शन में भूमध्य रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों का आकार तुलनात्मक रूप से छोटा दिखाई देता है। इसके विपरीत, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के नजदीक स्थित भूभाग अपने वास्तविक क्षेत्रफल से काफी बड़े नजर आते हैं।

अफ्रीका का बड़ा हिस्सा भूमध्य रेखा के आसपास स्थित है। इसलिए मर्केटर प्रोजेक्शन में अफ्रीका अपने वास्तविक आकार की तुलना में छोटा दिखाई देता है। Equal Earth Projection में अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और भूमध्य रेखा के आसपास मौजूद दूसरे क्षेत्रों को उनके क्षेत्रफल के अधिक वास्तविक अनुपात में प्रस्तुत किया जाएगा।

इसका परिणाम यह होगा कि नए नक्शे में अफ्रीका पहले से बड़ा दिखाई देगा, जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड तुलनात्मक रूप से छोटे नजर आएंगे। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन क्षेत्रों का वास्तविक भौगोलिक आकार बदल रहा है। बदलाव केवल मानचित्र पर उनके प्रदर्शन में होगा।

मर्केटर प्रोजेक्शन क्या है?

मर्केटर प्रोजेक्शन को फ्लेमिश मानचित्रकार जेरार्डस मर्केटर ने वर्ष 1569 में तैयार किया था। इसका प्रमुख उद्देश्य समुद्री यात्राओं और नौवहन को आसान बनाना था। इसमें दिशाओं और कोणों को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि नाविकों के लिए निश्चित दिशा में यात्रा करना सरल हो सके।

समुद्री नेविगेशन के लिए मर्केटर प्रोजेक्शन उपयोगी रहा, लेकिन दुनिया के देशों और महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना के लिए इसे सही नहीं माना जाता। ध्रुवों की ओर बढ़ने पर इसमें क्षेत्रफल की विकृति बढ़ती जाती है।

इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड और अफ्रीका का है। मर्केटर मानचित्र पर दोनों का आकार लगभग समान दिखाई दे सकता है, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। इसलिए विशेषज्ञ लंबे समय से शिक्षा में अधिक क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों के उपयोग की वकालत करते रहे हैं।

Equal Earth Projection कब तैयार हुआ?

Equal Earth Projection को वर्ष 2018 में मानचित्रकार टॉम पैटरसन, बोजन साव्रिक और बर्नहार्ड जेनी ने विकसित किया था। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि दुनिया के भूभागों के सापेक्ष क्षेत्रफल को सुरक्षित रखते हुए उनके आकार को भी पहचानने योग्य रखा जा सके।

इसके बावजूद Equal Earth Projection को पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं कहा जा सकता। गोलाकार पृथ्वी को सपाट सतह पर उतारने वाला कोई भी नक्शा आकार, दूरी, कोण अथवा दिशा—इन सभी को एक साथ पूरी तरह सटीक नहीं रख सकता। Equal Earth मानचित्र की प्राथमिकता क्षेत्रों के वास्तविक सापेक्ष आकार को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करना है।

भारत समेत 164 देशों ने किया समर्थन

इस प्रस्ताव को टोगो ने आगे बढ़ाया और अफ्रीकी संघ ने इसका समर्थन किया। प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने मतदान किया। समर्थक देशों का मानना है कि मानचित्र केवल भौगोलिक जानकारी देने का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे लोगों की दुनिया को लेकर धारणा भी बनाते हैं।

भारत की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि समान क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन महाद्वीपों और क्षेत्रों के वास्तविक सापेक्ष आकार को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करते हैं।

अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करते हुए इसकी आवश्यकता और प्राथमिकता पर सवाल उठाया। अमेरिका का तर्क था कि संयुक्त राष्ट्र को अधिक गंभीर वैश्विक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। इसके बावजूद प्रस्ताव बड़े बहुमत से पारित हो गया।

क्या सभी देशों को नया नक्शा अपनाना होगा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी है। इसका अर्थ है कि किसी देश पर Equal Earth Projection को अपनाने की कानूनी बाध्यता नहीं होगी। प्रस्ताव सदस्य देशों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी निकायों, मीडिया संगठनों और तकनीकी कंपनियों को ज्यादा सटीक मानचित्र इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

मर्केटर प्रोजेक्शन पर प्रतिबंध भी नहीं लगाया गया है। समुद्री नेविगेशन और कुछ डिजिटल उपयोगों में इसका इस्तेमाल जारी रह सकता है। स्कूलों और सामान्य भौगोलिक शिक्षा में Equal Earth जैसे क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों का उपयोग बढ़ सकता है।

शिक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पड़ सकता है असर

यदि विभिन्न देश इस प्रस्ताव के अनुरूप अपनी शैक्षणिक सामग्री में बदलाव करते हैं तो स्कूलों की भूगोल की किताबों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक प्रदर्शन में नया विश्व मानचित्र दिखाई दे सकता है। मैपिंग और लोकेशन से जुड़ी तकनीकी कंपनियां भी क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों को प्राथमिकता दे सकती हैं।

यह बदलाव तत्काल पूरी दुनिया में लागू नहीं होगा। अलग-अलग देशों और संस्थानों को अपने स्तर पर निर्णय लेना होगा। फिर भी संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव वैश्विक मानचित्रों को लेकर जारी बहस में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

English Heading: UN Backs Equal Earth World Map as Africa Appears Larger; US Votes Against Resolution

English Tags: New World Map, Equal Earth Projection, UN General Assembly, Correct the Map, Africa Map, Mercator Projection, India Supports New Map, United States Vote, World Geography, United Nations Resolution, Africa True Size, International News

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