उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान: मंडलेश्वर में निरक्षर युवाओं और बुजुर्गों को पढ़ाएंगे ‘साक्षर साथी’, हर गांव में बनेंगे शिक्षा केंद्र
स्वराज वाणी संवाददाता जिला गौतम साल्वे ब्यूरो चीफ मंडलेश्वर
मंडलेश्वर (खरगोन)। देश में साक्षरता दर बढ़ाने और शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत मंडलेश्वर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब केवल निरक्षर युवाओं ही नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों को भी शिक्षा दी जाएगी, जो पढ़ना-लिखना जानते हैं लेकिन उनके पास किसी प्रकार का औपचारिक शैक्षणिक प्रमाण-पत्र या अंकसूची उपलब्ध नहीं है।
इस अभियान का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा से जोड़ना, उन्हें औपचारिक रूप से साक्षर बनाना तथा शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक तैयार करना है। बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, संकुल प्राचार्यों, जन शिक्षकों तथा शासकीय एवं निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की।
महात्मा गांधी स्कूल संकुल केंद्र में हुई समीक्षा बैठक
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर शासकीय महात्मा गांधी स्कूल संकुल केंद्र, मंडलेश्वर में विस्तृत बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मंडलेश्वर संकुल केंद्र के अंतर्गत आने वाले सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा विभिन्न योजनाओं की समीक्षा भी की।
इन अधिकारियों की रही उपस्थिति
बैठक में कई वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी एवं जनशिक्षक उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से—
- संकुल प्राचार्य जे. के. सोनी
- बीआरसी मनीष डोंगरे
- बीएसी हिम्मत सिंह सिटोले
- अक्षय शर्मा
- संजय बैस
- एमडीएम प्रभारी सागर शर्मा
- जन शिक्षक सरदार सिंह ठाकुर
- अंकित श्रीवास
सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
60, 70, 90 वर्ष तक के बुजुर्ग भी होंगे साक्षर
बैठक में बताया गया कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत अब ऐसे सभी व्यक्तियों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा जिनकी आयु 15 वर्ष से अधिक है और जिन्होंने किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की या बीच में पढ़ाई छोड़ दी।
विशेष रूप से—
- 60 वर्ष
- 70 वर्ष
- 80 वर्ष
- 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग
भी इस अभियान के तहत शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि उम्र अब शिक्षा प्राप्त करने में कोई बाधा नहीं होगी। प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति को उसकी सुविधा के अनुसार पढ़ने-लिखने का अवसर दिया जाएगा।
शाला त्यागी युवाओं को भी मिलेगा दूसरा अवसर
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ऐसे बच्चे एवं युवा जिन्होंने किसी कारणवश विद्यालय छोड़ दिया है और जिनकी आयु 15 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, उन्हें भी दोबारा शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि ऐसे युवाओं को दोबारा पढ़ाई का अवसर दिया जाए तो वे भविष्य में रोजगार, कौशल विकास तथा अन्य योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से उठा सकेंगे।
हर गांव में बनेंगे सामाजिक चेतना केंद्र
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत प्रत्येक गांव में उल्लास नवभारत सामाजिक चेतना केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इन केंद्रों पर निरक्षर युवाओं और बुजुर्गों को नियमित रूप से शिक्षा दी जाएगी। जरूरत के अनुसार प्रत्येक गांव में मुख्य केंद्र और उपकेंद्र बनाए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक लोगों तक शिक्षा पहुंच सके।
बैठक में बताया गया कि शिक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई का समय भी लचीला रखा जाएगा।
प्रतिदिन 2 से 4 घंटे होगी पढ़ाई
अधिकारियों के अनुसार शिक्षार्थियों की सुविधा के अनुरूप प्रतिदिन 2 से 4 घंटे तक अध्ययन कराया जाएगा।
इस दौरान उन्हें—
- पढ़ना
- लिखना
- सामान्य गणित
- दैनिक जीवन में उपयोगी जानकारी
- सामाजिक जागरूकता
- सरकारी योजनाओं की जानकारी
जैसे विषयों की शिक्षा दी जाएगी।
‘साक्षर साथी’ निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘साक्षर साथी’ होंगे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक केंद्र पर कम से कम हाईस्कूल उत्तीर्ण व्यक्ति को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। ऐसे स्वयंसेवकों को साक्षर साथी कहा जाएगा।
प्रत्येक 10 निरक्षर व्यक्तियों पर एक साक्षर साथी नियुक्त किया जाएगा, जो नियमित रूप से उन्हें पढ़ाने और उनकी प्रगति की निगरानी करेगा।
मंडलेश्वर नगर में बनाए गए 13 केंद्र
बैठक में जानकारी दी गई कि मंडलेश्वर नगर में इस अभियान के लिए 13 शिक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले निरक्षर युवाओं एवं बुजुर्गों को शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आगे और केंद्र भी स्थापित किए जा सकते हैं।
आधार और अपार आईडी को लेकर भी दिए निर्देश
बैठक में केवल साक्षरता अभियान ही नहीं, बल्कि विद्यालयी शिक्षा से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।
अधिकारियों ने निर्देश दिए कि—
- सभी विद्यार्थियों की APAAR ID समय पर बनाई जाए।
- जिन विद्यार्थियों के आधार कार्ड में त्रुटियां हैं, उनका शीघ्र सुधार कराया जाए।
- सभी आवश्यक दस्तावेजों का समय पर सत्यापन किया जाए।
ड्रॉपआउट बच्चों की होगी मैपिंग
बैठक में यू-डाइस (UDISE) पोर्टल पर ड्रॉप बॉक्स में शामिल बच्चों की मैपिंग करने के निर्देश भी दिए गए।
इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है जो किसी कारण से स्कूल नहीं जा रहे हैं, ताकि उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ा जा सके।
नर्सरी से 12वीं तक शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य
शिक्षा विभाग ने बैठक में स्पष्ट किया कि नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक प्रत्येक पात्र बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित किया जाए।
इसके लिए सभी विद्यालयों को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
छात्रवृत्ति, पाठ्यपुस्तक और साइकिल वितरण पर भी जोर
बैठक में अधिकारियों ने छात्र हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिए कि—
- छात्रवृत्ति के लिए विद्यार्थियों की प्रोफाइल समय पर अपडेट की जाए।
- पात्र विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
- साइकिल वितरण योजना का लाभ योग्य विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचे।
साक्षरता अभियान से बदलेगी समाज की तस्वीर
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम केवल पढ़ना-लिखना सिखाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
जब युवा और बुजुर्ग शिक्षा से जुड़ेंगे तो वे सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल माध्यमों और सामाजिक अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होंगे। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और समाज में उनकी भागीदारी भी मजबूत होगी।
शिक्षा से सशक्त होगा हर वर्ग
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से सरकार का उद्देश्य समाज के उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाना है जो किसी कारणवश अब तक औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे।
मंडलेश्वर में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग शिक्षा से जुड़ सकेंगे तथा साक्षरता दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी।
