Ujjwala Scheme Update: साल में सिर्फ 4 सिलेंडर पर सब्सिडी, गरीब परिवारों में बढ़ी नाराजगी
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
Ujjwala Scheme Update : केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसके तहत अब लाभार्थी परिवारों को सालभर में केवल 4 एलपीजी सिलेंडरों पर ही सब्सिडी दी जाएगी। इस फैसले के बाद देशभर में गरीब परिवारों की रसोई का बजट बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहले इस योजना में महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन देकर स्वच्छ ईंधन की ओर प्रेरित किया गया था, लेकिन अब सिलेंडरों की संख्या में कटौती से कई परिवारों में चिंता बढ़ गई है।
पहले 12 से अब 4 सिलेंडर तक पहुंचा कोटा
उज्ज्वला योजना की शुरुआत साल 2016 में की गई थी, जिसमें लाभार्थियों को सालाना 12 सिलेंडर तक सब्सिडी दी जाती थी। बाद में इसे घटाकर 9 सिलेंडर किया गया और अब जून 2026 से इसे सीधे 4 सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला औसत घरेलू खपत के आधार पर लिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका विरोध तेज होता दिख रहा है।
कई राज्यों में महिलाओं में नाराजगी
इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली सहित कई राज्यों में देखा जा रहा है। ग्रामीण और गरीब परिवारों की महिलाओं ने इसे आर्थिक रूप से बड़ा झटका बताया है।
महिलाओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच रसोई चलाना पहले ही मुश्किल था, अब सिलेंडरों की कमी से स्थिति और खराब हो जाएगी।
बिहार में महिलाओं ने जताई नाराजगी
बिहार के बेगूसराय और सहरसा जिलों में कई महिलाओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पहले 9 सिलेंडरों से किसी तरह साल चलता था, लेकिन अब 4 सिलेंडरों में घर चलाना असंभव होगा।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि अगर सिलेंडर खत्म हो गया तो उन्हें मजबूरी में फिर से लकड़ी के चूल्हे पर लौटना पड़ेगा, जिससे धुएं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ेंगी।
यूपी में फिर चूल्हे की ओर लौटते परिवार
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी इस कटौती का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई परिवारों ने गैस की कमी के कारण फिर से पारंपरिक चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि बड़े परिवारों में एक सिलेंडर एक महीने भी नहीं चल पाता, ऐसे में साल में सिर्फ 4 सिलेंडर बेहद कम हैं। कई घरों में सूखी लकड़ियों का उपयोग बढ़ गया है।
मध्य प्रदेश में बढ़ी मुश्किलें
मध्य प्रदेश के आगर मालवा और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार गैस चूल्हा छोड़कर फिर से लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर हो गए हैं।
महिलाओं का कहना है कि धुएं से स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी हो रही है। महंगे सिलेंडर के कारण अतिरिक्त खरीद भी संभव नहीं है।
राजस्थान में भी असर साफ
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में भी इस फैसले का विरोध देखा जा रहा है। कई परिवारों का कहना है कि पहले ही सिलेंडर महंगा है, और अब सब्सिडी घटने से स्थिति और खराब हो जाएगी।
लोगों का कहना है कि बिजली की कटौती और महंगे ईंधन के बीच रसोई चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
गुजरात में आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका
गुजरात में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार उज्ज्वला योजना के लाखों लाभार्थी हैं। यहां औसतन प्रति परिवार साल में 6 से 7 सिलेंडर की खपत होती है, ऐसे में 4 सिलेंडर का कोटा पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
लाभार्थियों का कहना है कि पहले ही घरेलू खर्च बढ़ चुका है और अब रसोई गैस की कटौती से अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
सरकार का पक्ष
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय औसत खपत और योजना के संतुलन को देखते हुए लिया गया है। सरकार का दावा है कि जरूरतमंद परिवारों को अभी भी योजना का लाभ मिलता रहेगा और भविष्य में स्थिति की समीक्षा की जा सकती है।
निष्कर्ष
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि उज्ज्वला योजना ने उन्हें लकड़ी और चूल्हे के धुएं से राहत दिलाकर स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ाया था, लेकिन अब सिलेंडर की सीमित संख्या के कारण उन्हें फिर से पुराने चूल्हे का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल रसोई का काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी दोबारा बढ़ने लगा है।
महिलाओं का यह भी कहना है कि महंगाई के इस दौर में अतिरिक्त सिलेंडर खरीदना उनके लिए आसान नहीं है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है और रोजमर्रा की जिंदगी और अधिक कठिन हो गई है।
