—Advertisement—

Ujjain News: भस्म आरती में वैष्णव तिलक धारण कर प्रकट हुए बाबा महाकाल, दर्शन को उमड़ा जनसैलाब

Author Picture
Published On: 16 November 2025
whatsapp image 2024 05 19 at 54417 am 1716079493 1

—Advertisement—

Ujjain News: भस्म आरती में वैष्णव तिलक धारण कर प्रकट हुए बाबा महाकाल, दर्शन को उमड़ा विशाल जनसैलाब

उज्जैन से बड़ी खबर—अगहन मास कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर रविवार सुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित विश्वविख्यात भस्म आरती में आज अलौकिक दृश्य देखने को मिला। प्रातः 4 बजे जब बाबा महाकाल जागे और वैष्णव तिलक धारण कर भक्तों के सामने प्रकट हुए, तो पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। बाबा का यह दिव्य स्वरूप न सिर्फ भक्तों को मंत्रमुग्ध कर गया, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं ने इसके साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया।

सुबह 4 बजे से शुरू हुई भक्तों की भीड़

ऐसा माना जाता है कि भस्म आरती में शामिल होना अत्यंत पुण्यदायी होता है। इसी पावन अवसर के लिए शनिवार देर रात से ही हजारों श्रद्धालु कतार में लगना शुरू हो गए थे। महाकाल के दिव्य श्रृंगार और विशेष आरती के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त उज्जैन पहुंचे। भीड़ का आलम यह रहा कि मंदिर परिसर के सभी मार्ग ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंजते रहे।

वैष्णव तिलक में प्रकट हुए बाबा महाकाल – श्रृंगार ने मन मोहा

आज के विशेष श्रृंगार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल को वैष्णव तिलक से सुसज्जित किया गया। महाकालेश्वर के इस अद्भुत स्वरूप ने भक्तों के हृदय में अपार आनंद भर दिया। भगवान का यह अलौकिक दर्शन प्रतिवर्ष कुछ विशिष्ट अवसरों पर ही कराया जाता है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

पूरे गर्भगृह को विशेष पुष्प सज्जा से सजाया गया था। दीपों की रोशनी और वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच जब बाबा महाकाल प्रकट हुए, तो भक्तों ने इसे जीवन का सौभाग्य बताया।

विधिवत भस्म आरती और पंचामृत अभिषेक

मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अगहन मास कृष्ण पक्ष की द्वादशी पर प्रातः 4 बजे विधि-विधान के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। सबसे पहले वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में मौजूद सभी देव प्रतिमाओं का पूजन हुआ।

भगवान महाकाल का जलाभिषेक अत्यंत पारंपरिक विधि से किया गया, जिसमें शामिल थे—

  • दूध

  • दही

  • घी

  • शक्कर

  • पंचामृत

  • फलों का रस

पूजन की शुरुआत प्रथम घंटाल बजाकर और ‘हरि ओम’ का जल अर्पित कर की गई। इसके बाद पंडितों ने मंत्रोच्चार के बीच अलंकृत श्रृंगार किया।

नवीन मुकुट और भस्म अर्पण

पूजन-अभिषेक के बाद भगवान को नवीन मुकुट से सुशोभित किया गया। कपूर आरती के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के साधु-संतों ने परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर शमशान की पवित्र भस्म अर्पित की।

मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट होते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को शिवभक्तों के लिए अत्यंत शुभ और चमत्कारी माना जाता है।

भक्तों में उत्साह—दर्शन कर हुए अभिभूत

विशेष श्रृंगार और वैष्णव तिलक के साथ प्रस्तुत बाबा महाकाल के दर्शन ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। सुबह की ठंड को भी भक्तों के उत्साह ने मात दी। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि यह दर्शन जीवन में पहली बार मिले दिव्य अनुभव जैसा था।

कुछ भक्तों ने बताया कि—

  • “बाबा महाकाल के ऐसे दीदार दुर्लभ होते हैं।”

  • “वैष्णव तिलक में महाकाल का स्वरूप अलौकिक था।”

  • “हमने इतनी भीड़ कभी नहीं देखी, पर भक्तों की आस्था अद्भुत है।”

महाकालेश्वर मंदिर की परंपरा—विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश ही नहीं, बल्कि विश्व भर में अपने अनूठे भस्म आरती अनुष्ठान के लिए प्रसिद्ध है। सुबह-सुबह आयोजित होने वाली इस आरती में शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है। यह भस्म वैदिक विधि से तैयार की जाती है और इसे सृष्टि, विनाश और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है।

यह भी माना जाता है कि—

  • भस्म आरती जीवन-मरण के रहस्य का बोध कराती है।

  • यह भगवान शिव की अनंत शक्तियों का साक्षात्कार कराती है।

  • इसमें शामिल भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं की विशेष तैयारी

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा एवं व्यवस्थाएँ की गईं। पुलिस बल, स्वयंसेवक और मंदिर के सेवक लगातार भक्तों की सहायता में लगे रहे। भस्म आरती के दौरान व्यवस्था सुचारू रखने के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए थे।

आज का दिन बना ऐतिहासिक—भक्त बोले: महाकाल ने दर्शन देकर कृतार्थ किया

अगहन मास की इस पावन द्वादशी पर बाबा महाकाल का वैष्णव तिलक धारण कर दर्शन देना भक्तों के लिए किसी महापर्व से कम नहीं रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का सर्वोच्च आध्यात्मिक अनुभव बताया।

मंदिर परिसर से लेकर उज्जैन शहर तक आज केवल एक ही स्वर सबसे अधिक सुनाई दे रहा था—

“जय श्री महाकाल… जय महाकाल!”

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp