Ujjain: वैष्णव तिलक और मस्तक पर ‘श्री राम’ नाम से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
Ujjain विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर शुक्रवार तड़के आयोजित भस्म आरती में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का विशेष और मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिसमें उन्हें वैष्णव तिलक धारण कराया गया और मस्तक पर ‘श्री राम’ नाम का विशेष अलंकरण किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। पूरे परिसर में ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे।
देर रात से लगी रही श्रद्धालुओं की लंबी कतार
Ujjain भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु गुरुवार देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। सुबह मंदिर के पट खुलते ही भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिला। मंदिर प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
भक्तों का कहना था कि बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन से उन्हें आध्यात्मिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव हुआ। कई श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक श्रृंगार को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।
वीरभद्र की आज्ञा के बाद प्रारंभ हुई पूजा-अर्चना
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी से आज्ञा ली गई। इसके बाद मंदिर के गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
पूजन प्रक्रिया के दौरान भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटानाद के साथ ‘हरि ओम’ मंत्र का उच्चारण करते हुए जल अर्पित किया गया। इसके बाद पूरे गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच विशेष पूजा संपन्न हुई।
भव्य श्रृंगार के बाद अर्पित की गई पवित्र भस्म
अभिषेक और पूजन के पश्चात पुजारियों ने भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया। कपूर आरती के बाद बाबा को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई।
भस्म अर्पण के दौरान झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की मंगल ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इसके बाद पारंपरिक विधि से विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई, जिसे देखने के लिए उपस्थित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
वैष्णव तिलक और ‘श्री राम’ नाम से सजा बाबा का दिव्य स्वरूप
शुक्रवार की भस्म आरती का सबसे बड़ा आकर्षण बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार रहा। इस अवसर पर भगवान महाकाल को वैष्णव परंपरा के अनुसार तिलक लगाया गया। इसके साथ ही उनके मस्तक पर ‘श्री राम’ नाम का विशेष अलंकरण किया गया, जिसने उनके स्वरूप को और अधिक दिव्य एवं आकर्षक बना दिया।
श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर में मौजूद भक्त लगातार ‘जय श्री महाकाल’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोष करते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
Ujjain भस्म आरती का धार्मिक महत्व
महाकाल मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने के लिए देश-विदेश से उज्जैन पहुंचते हैं।
भस्म आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और शिव भक्ति का अद्वितीय प्रतीक भी मानी जाती है। इस दिव्य आयोजन का प्रत्यक्ष दर्शन करना भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
मंदिर में गूंजे जयघोष
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’, ‘जय श्री महाकाल’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर भाव-विभोर नजर आए। कई भक्तों ने आरती के दौरान ध्यान और भजन-कीर्तन में भी भाग लिया।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए थे, जिससे पूरी व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।
Ujjain महाकाल मंदिर की आरतियों का समय
आषाढ़ मास से आरतियों के समय में किए गए बदलाव के अनुसार मंदिर में वर्तमान में आरतियां निम्न समय पर हो रही हैं—
- भस्म आरती: सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: प्रातः 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: प्रातः 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात्रि 10:30 बजे से 11:00 बजे तक
मंदिर प्रशासन के अनुसार आरती के इन संशोधित समयों का पालन आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक किया जाएगा।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
शुक्रवार को आयोजित भस्म आरती में बाबा महाकाल के वैष्णव तिलक और ‘श्री राम’ नाम से सजे दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। हजारों भक्तों ने इस दुर्लभ दर्शन का लाभ लेकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और भक्ति से परिपूर्ण यह आयोजन एक बार फिर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और सनातन संस्कृति की भव्यता को प्रदर्शित करता नजर आया।
